होर्मुज जलडमरूमध्य!समंदर का वो रास्ता जिससे जुड़ी है दुनिया की अर्थव्यवस्था,ऑयल लाइफलाइन पर संकट पड़ने पर क्यों कांप उठती है दुनिया?कैसे पड़ा नाम,और क्या है इसका महत्व जानिए खबर के लिंक में
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को 17 मई 2026 तक लगभग 78 दिन से अधिक हो चुके हैं। इस संघर्ष का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। भारत समेत कई देशों में इस युद्ध को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। अखबारों की सुर्खियों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक हर जगह एक नाम बार-बार सुनाई दे रहा है — “होर्मुज जलडमरूमध्य”।
दरअसल, यह वही समुद्री रास्ता है जिसके जरिए दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG की सप्लाई प्राप्त करता है। ईरान की ओर से इस मार्ग पर “टोल” या नियंत्रण संबंधी संकेतों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी। यही वजह है कि युद्ध की आंच अब जमीन से निकलकर समुद्री व्यापार तक पहुंच गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में जब अमेरिका ईरान युद्ध का तनाव बढ़ा तो इसका असर यहां भी हुआ और सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार, तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने लगा।
अगर “होर्मुज” नाम की बात करें तो इसकी जड़ें इतिहास में काफी गहराई तक जाती हैं। इतिहासकारों के मुताबिक इसका संबंध प्राचीन फारसी शब्द “होर्मोज़” या “अहुरा मज़्दा” से माना जाता है। अहुरा मज़्दा पारसी धर्म यानी ज़रथुष्ट्र धर्म में ज्ञान और प्रकाश के सर्वोच्च देवता माने जाते थे। माना जाता है कि इसी आस्था और सांस्कृतिक प्रभाव से “हॉर्मुज़” नाम की उत्पत्ति हुई।
11वीं सदी से 17वीं सदी तक इस क्षेत्र में “हॉर्मुज़” नाम का एक बेहद समृद्ध बंदरगाह शहर हुआ करता था। यह शहर भारत, फारस और अरब देशों के बीच व्यापार का बड़ा केंद्र था। दुनिया भर के व्यापारी यहां पहुंचते थे और समुद्री व्यापार के जरिए यह इलाका बेहद समृद्ध बन गया था। बाद में सुरक्षा कारणों और समुद्री तूफानों से बचने के लिए इस शहर को पास के एक द्वीप पर स्थानांतरित किया गया, लेकिन इसका नाम हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गया।
समय के साथ “हॉर्मोज़” नाम में भाषाई बदलाव भी हुए। यूरोपीय अभिलेखों में इसे “ऑर्मस” कहा गया। 16वीं सदी में जब पुर्तगाली व्यापारियों ने कुछ समय तक इस द्वीप पर नियंत्रण किया, तब उन्होंने भी इसी नाम का इस्तेमाल किया। धीरे-धीरे यही नाम बदलकर “होर्मुज” बन गया और फिर पूरे समुद्री मार्ग की पहचान बन गया।
कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि “होर्मुज” नाम फारसी शब्द “हुर मोघ” से निकला हो सकता है, जिसका अर्थ “खजूर” बताया जाता है। इस इलाके में खजूर के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते थे और स्थानीय कबीलों के बीच यह नाम प्रचलित था।
आज होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक शक्ति का प्रतीक बन चुका है। यही कारण है कि मिडिल ईस्ट में जब भी तनाव बढ़ता है, दुनिया की नजर सबसे पहले इसी समुद्री गलियारे पर टिक जाती है। क्योंकि यह रास्ता केवल जहाजों का मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है