Oct 17, 2026 Login
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सवाल तो उठेगाः जहां सत्ता में बैठी महिला मंत्री ही घरेलू हिंसा से प्रताड़ित हों, वहां आम बहू-बेटियों को कैसे न्याय मिलेगा? अंकिता भंडारी मामले में आक्रोश के बीच कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की प्रताड़ना वाली व्यथा ने महिला सुरक्षा पर छेड़ी बड़ी बहस

The question is bound to arise: if even a female minister in power faces abuse—specifically domestic violence—how can ordinary women and daughters expect to find justice? Amidst the public outrage su

देहरादून/रुद्रपुर। उत्तराखण्ड में एक तरफ अंकिता भंडारी हत्याकाण्ड मामले को लेकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर जहां उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक संग्राम छिड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने पति पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला सामने आने के बाद जहां प्रदेश की सियासत गरमाती हुई नजर आ रही है, वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि जब प्रदेश की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री ही घरेलू हिंसा से प्रताड़ित हां,े तो वहां अंकिता भंडारी जैसी बहन-बेटियों को कैसे न्याय मिलेगा। 
गौरतलब है कि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मंत्री ने पति पर पहली शादी की बात छिपाने, दूसरी महिलाओं से संबंध रखने, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बीच उनकी तबीयत भी बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया। रेखा आर्या ने इस मामले में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया है, जिसने उन्हें अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाने के लिए मजबूर किया। साथ ही अपना पक्ष रखते हुए एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें वह रोते हुए सब बात बता रही हैं। गिरधारी लाल साहू इसी साल जनवरी में भी विवादों में आए थे। बिहार की लड़कियों को लेकर उनके कथित बयान के सार्वजनिक होने के बाद विरोध प्रदर्शन हुए थे। विवाद बढ़ने पर साहू ने अपने बयान को लेकर सफाई भी दी थी। एफआईआर के मुताबिक, मंत्री आर्या ने आरोप लगाया कि उनके पति गिरधारी लाल साहू ने शादी के समय अपनी पहली शादी की बात उनसे छिपाई थी। उनके पति के दूसरी महिलाओं से संबंध हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। साथ ही, जान से मारने की धमकी दी और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। मंत्री रेखा आर्या ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें उन्हें मारने की साजिश से जुड़ी बातें सामने आईं। उनके मुताबिक, इस ऑडियो ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस का रुख किया और पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। 

कंपनी से हटाने के लिए फर्जी साइन का भी आरोप
रेखा आर्या ने अपने पति पर कंपनी के निदेशक पद से उन्हें हटाने के लिए उनके हस्ताक्षरों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है। उनके अनुसार, इस मामले में भी उनके साथ गलत किया गया। मंत्री ने अपने आरोपों के जरिए निजी जीवन में लंबे समय से चल रहे विवाद की ओर इशारा किया है। रेखा आर्या ने एक वीडियो जारी कर इस मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने के बाद उन्हें अपनी और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस के पास जाना जरूरी लगा। उन्होंने महिलाओं से भी अपील की कि वे घरेलू हिंसा और प्रताड़ना को चुपचाप सहन न करें, बल्कि अपने साथ हो रहे गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाएं। मंत्री ने कहा कि किसी भी महिला को डर या दबाव में आकर अन्याय सहने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को कानूनी मदद लेनी चाहिए और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। 

अंकिता भंडारी हत्याकांड के बीच महिला सुरक्षा पर सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में न्याय की मांग तेज है। अभी दो दिन पूर्व ही अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट के सामने धरना प्रदर्शन किया था। इस दौरान उनके समर्थन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत तमाम कांग्रेसी भी धरना स्थल पर पहुंचे थे। अंकिता के माता पिता ने कथित वीआईआपी को लेकर सवाल उठाए थे और दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने का विरोध किया था। ऐसे में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के मामले ने महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक बहस और तेज कर दी है। हालांकि, दोनों मामले अलग-अलग हैं और रेखा आर्या की शिकायत को अंकिता भंडारी हत्याकांड से सीधे जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। फिर भी दोनों घटनाक्रमों के बीच महिला सुरक्षा और न्याय के व्यापक सवाल पर चर्चा होना स्वाभाविक है। सवाल यह है कि कानून और व्यवस्था पर भरोसा कायम करने के लिए पीड़ित महिलाओं को समय पर सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और न्याय कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।