पिथौरागढ़ की घटना ने झकझोर दिया उत्तराखण्ड! बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल, आखिर कब तक असुरक्षित रहेंगे मासूम?
पिथौरागढ़। उत्तराखण्ड को देशभर में देवभूमि, शांत वादियों, संस्कारों और सामाजिक सौहार्द की धरती के रूप में जाना जाता है। यहां की संस्कृति, पारिवारिक मूल्य और सामाजिक विश्वास हमेशा प्रदेश की पहचान रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं और मासूम बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की घटनाएं इस पहचान पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। पिथौरागढ़ में पांच वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी की घटना ने पूरे प्रदेश को भीतर तक झकझोर दिया है। यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना को झकझोरने वाली त्रासदी है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी पॉक्सो अधिनियम के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका था और हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया था। यह तथ्य कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है कि ऐसे अपराधियों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है और समाज को उनसे सुरक्षित रखने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाने चाहिए।
दरअसल, पिथौरागढ़ नगर क्षेत्र से लापता हुई पांच वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोप में पुलिस ने एक 35 वर्षीय वाहन चालक को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और लोगों में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। पुलिस के अनुसार, नगर क्षेत्र के एक व्यापारी परिवार की पांच वर्षीय बेटी अचानक लापता हो गई थी। परिजनों ने तत्काल उसकी तलाश शुरू की, लेकिन जब बच्ची का कोई पता नहीं चला तो पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम का गठन किया और आसपास के क्षेत्रों में तलाश अभियान शुरू किया। जांच के दौरान पुलिस ने शहर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक व्यक्ति बच्ची को अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दिया। इसके आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान की और उसकी तलाश शुरू कर दी। बताया गया कि आरोपी बच्ची को बहला-फुसलाकर एक वाहन में बैठाकर सुनसान क्षेत्र की ओर ले गया। बाद में बच्ची अचेत अवस्था में बरामद हुई। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। मेडिकल रिपोर्ट में अपराध की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज कर दिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी होशियार सिंह, निवासी रई, घनोड़ क्षेत्र को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। वर्ष 2022 में भी वह एक नाबालिग से जुड़े पॉक्सो अधिनियम के मामले में दोषी ठहराया गया था। उस मामले में उसे सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। बताया जा रहा है कि लगभग एक माह पहले ही वह जमानत पर जेल से बाहर आया था और बाहर आते ही उसने एक और बड़े अपराध को अंजाम दे दिया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए व्यक्तियों की निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी होनी चाहिए, ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
समाज को भी निभानी होगी जिम्मेदारी
इस घटना के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनमें समाज की जिम्मेदारी का सवाल भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को डराने के बजाय उन्हें उनकी उम्र के अनुरूप ‘गुड टच-बैड टच’, व्यक्तिगत सुरक्षा और अजनबियों से सावधान रहने जैसी बातें समझानी चाहिए। बच्चों के दैनिक कार्यक्रम की जानकारी रखें, उन्हें अकेले सुनसान स्थानों पर न भेजें और यदि बच्चा किसी व्यक्ति के प्रति असहज महसूस करे तो उसकी बात को गंभीरता से सुनें। बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखना भी बेहद जरूरी है, ताकि वे बिना डर के किसी भी असामान्य घटना या अनुभव के बारे में अपने अभिभावकों को बता सकें। पिथौरागढ़ की यह घटना पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। यदि समाज, प्रशासन, पुलिस, विद्यालय और अभिभावक मिलकर बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं देंगे, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना कठिन होगा। आज आवश्यकता केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करने की है, जहां हर बच्चा बिना भय के अपना बचपन जी सके।