धारचूला में जनजातीय प्रमाण पत्र का मामला सदन में गूंजा, सरकार एक माह में करेगी जांच का निर्णय

The issue of tribal certificate in Dharchula resonated in the House, the government will decide on the investigation within a month.

गैरसैंण। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में कथित रूप से एक गैर-जनजातीय महिला को जनजातीय प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सदन में गूंजा। इस मुद्दे को कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने उठाते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की। मामले पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकार इस प्रकरण की जांच कराएगी और एक माह के भीतर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में एक महिला को जनजातीय प्रमाण पत्र जारी किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने सदन में कहा कि यह गंभीर मामला है, क्योंकि जनजातीय प्रमाण पत्र केवल अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को ही जारी किया जाना चाहिए। यदि किसी गैर-जनजातीय व्यक्ति को यह प्रमाण पत्र मिल जाता है तो इससे वास्तविक जनजातीय समुदाय के अधिकार प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में 29 अगस्त 2025 को रजिस्ट्री के माध्यम से जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के सचिव को शिकायत भेजी गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। धामी ने आरोप लगाया कि जनजातीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा में प्रशासन गंभीरता नहीं दिखा रहा है। सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकार इस शिकायत को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित प्रकरण की जांच कराई जाएगी और एक महीने के भीतर सरकार इस पर निर्णय लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले के सदन में उठने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो इससे जुड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।