जेलों में मोबाइल का 'गंदा खेल': गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया के कपड़ों से निकला स्मार्टफोन और सिम, सुरक्षा में भारी सेंध

The 'dirty game' of mobile phones in jails: Smartphone and SIM card found in gangster Sujit Sinha's wife Riya's clothes; major security breach.

रांची।झारखंड की जेलों में बंद बड़े अपराधियों और गैंगस्टरों तक मोबाइल फोन और सिम कार्ड कितनी आसानी से पहुंच रहे हैं, इसका एक और बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह नया मामला कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पत्नी और खुद दर्जन भर से अधिक संगीन मामलों की आरोपी रिया सिन्हा से जुड़ा है। रांची के होटवार जेल से चाईबासा जेल शिफ्ट करने के दौरान जब चाईबासा जेल के प्रवेश द्वार पर रिया की कड़ाई से तलाशी ली गई, तो महिला पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए। कड़ी सुरक्षा के दावों को धता बताते हुए लेडी डॉन रिया सिन्हा के कपड़ों से एक चमचमाता स्मार्टफोन, सिम कार्ड और चार्जर बरामद किया गया है।

जेल प्रशासन के सुरक्षात्मक आदेश पर रिया सिन्हा को रांची की बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से चाईबासा मंडल कारा शिफ्ट करने का निर्देश जारी हुआ था। भारी सुरक्षा और पुलिस एस्कॉर्ट टीम की निगरानी में रिया को चाईबासा जेल लाया गया। जेल के मुख्य द्वार पर महिला बंदी कक्ष में प्रवेश करने से पहले नियम के तहत उसकी विधिवत चेकिंग की गई। डीएसपी स्तर की एक महिला पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में जब रिया की सघन जांच शुरू हुई, तो उसके कपड़ों के भीतर छुपाकर रखा गया एक चालू स्मार्टफोन बरामद हुआ। इतना ही नहीं, मोबाइल के साथ-साथ उसमें दो सिम कार्ड लगे हुए थे। इसके अलावा पुलिस ने उसके पास से कुछ टूटे हुए सिम कार्ड, एक चार्जर और एडाप्टर भी जब्त किया है। जेल के भीतर मोबाइल ले जाने के इस गंभीर मामले को लेकर चाईबासा के सदर थाने में एक नामजद प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। यह एफआईआर सदर थानेदार हीरालाल महतो के लिखित बयान पर दर्ज की गई है। पुलिस अब इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रही है कि आखिर रांची जेल से कड़ी सुरक्षा में चाईबासा लाते समय या उससे पहले रिया के पास यह स्मार्टफोन और सिम कार्ड कहां से और किसने पहुंचाया? क्या इसमें सुरक्षा में लगे किसी कर्मी की मिलीभगत थी? इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। रिया सिन्हा कोई साधारण महिला नहीं है, बल्कि वह अपराध की दुनिया में अपने पति सुजीत सिन्हा के साथ बहुत पहले कदम रख चुकी है। अक्टूबर 2025 में रांची पुलिस ने जब धनबाद के कुख्यात प्रिंस खान गिरोह के कुछ गुर्गों को दबोचा था, तब इस बड़े गठजोड़ का खुलासा हुआ था।  गिरफ्तार अपराधियों ने कबूला था कि साहिबगंज जेल में बंद गैंगस्टर सुजीत सिन्हा और धनबाद का वासेपुर गैंग चलाने वाला प्रिंस खान अब एक साथ मिलकर रंगदारी और हत्या का सिंडिकेट चला रहे हैं। दोनों खूंखार गैंग्स के बीच की मुख्य 'कड़ी' और रणनीतिकार रिया सिन्हा ही है। जेल के बाहर से गैंग को ऑपरेट करने और लेवी (रंगदारी) वसूलने के आरोप में ही रांची पुलिस ने रिया को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा था। इस बरामदगी ने झारखंड जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब साहिबगंज जेल में बंद सुजीत सिन्हा पर दर्जनों मामले दर्ज हैं और उसकी पत्नी रांची जेल में बंद थी, तो इतनी चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच भी उनके पास मोबाइल कैसे पहुंच रहे हैं? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि जेलों से चलने वाले इस सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।