धन्यवाद मोदी जी :ऋषिकेश एम्स में बेड को तरसती 8 साल की बच्ची कोई सुनवाई नहीं । पुराने एम्स में ही नहीं मिल पा रहे बेड और देश में नए एम्स बनने का जश्न है एक ऐसा लतीफा जो सुनने में बहुत अच्छा लगता है लेकिन खुद पर गुजर जाए तो हादसा बन जाता है ।
उत्तराखंड के ऋषिकेश में एम्स की स्थापना 2012 में इस उद्देश्य के साथ की गई थी ताकि राज्य के मरीजो को बेहतर इलाज के लिए कहीं बाहर न जाने पड़े।लेकिन यही ऋषिकेश एम्स अब मरीज़ो के लिए सिर्फ बद्दुआ सेंटर बन चुका है। ऋषिकेश एम्स मरीजों के लिए मौत का कुंआ बनता जा रहा है। विश्व स्तरीय चिकित्सा का दावा करने वाले ऋषिकेश एम्स में मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पा रहा है।राज्यभर के जिलो से गम्भीर मरीजो को ऋषिकेश एम्स ही रेफर किया जाता है मरीजो के तीमारदार जब मरीज को लेकर एम्स पहुंचते है तब उन्हें घण्टो घण्टो इमरजेंसी के बाहर खड़ा होना पड़ता है कई बार तो मरीजो को अगले दिन भी इमरजेंसी में बेड उपलब्ध नही होता।भले ही मरीज की हालत कितनी भी नाजुक क्यो न हो।कुछ दिन पहले भी एक गर्भवती महिला की मौत के मामले में ऋषिकेश एम्स पर सवालिया निशान खड़े हुए थे जिस पर अस्पताल प्रशासन ने पल्ला झाड़ लिया।ऐसे ही ब्लैक फंगस के मामलों हो या कोरोना के या फिर ऑक्सीज़न की ज़रूरत के मामले हो ऋषिकेश एम्स में हमेशा बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाएं ही देखने को मिलती है।
हालिया वाक्या भी हल्द्वानी की 8 साल की बच्ची निहारिका फर्त्याल का जिसे फेफड़ों में दिक्क्क्त होने के चलते और ऑपरेशन के लिए ऋषिकेश एम्स रेफर किया गया बच्ची के पिता बड़ी उम्मीद लेकर एम्स पहुंचे लेकिन इमरजेंसी में बच्ची के लिए न तो बेड ही उपलब्ध हुआ न ही ओपीडी में बच्चों का डॉ ही मिला।इस मामले में आवाज़24x7 ने भी तीमारदार के फोन पर इमरजेंसी विभाग में बात की तो कहा गया कि आप ऊपर बात कीजिये ,इसके बाद पीआरओ हरीश थपलियाल को कई बार फ़ोन किया तो उन्होंने भी फ़ोन नही उठाया। मामले को दो दिन बीत चुके है पर बच्ची को अभी तक अस्पताल में रूम नही मिला है 8 साल की बच्ची अपनी ज़िंदगी की जंग हर पल लड़ रही है लेकिन ऋषिकेश एम्स को मासूम बच्ची पर ज़रा भी रहम नही आ रहा।
वैसे तो बीजेपी और भक्त चिल्ला चिल्ला कर कहते है कि 2014 से पहले देश में केवल 4 ही एम्स थे लेकिन आज नरेंद्र मोदी की बदौलत 19 एम्स है लेकिन धरातल की हकीकत यह है कि पुराने बने एम्स में ही मरीजों को धक्के खाने पड़ते है बेड तक की व्यवस्था नहीं हो पाती है तो अंदाज़ा लगाइए कि जो एम्स अभी पूरी तरह नहीं बन पाये है उनकी क्या स्थिति होगी ? राजनीति चमकाने के लिए फर्जी विकास के काम गिनवाना बहुत आसान होता है क्योंकि मन की बात में संवाद एकतरफा होता है वास्तविक स्थिति का पता तब चलता है जब अपने परिवार का कोई सदस्य बीमार पढ़ता है और स्वास्थ्य लाभ के लिए अस्पताल पहुंचता है तब न तो भक्तगिरी काम आती है और न ही चमचागिरी ।