उत्तराखंड में 10 हजार शिक्षकों की नौकरी और प्रमोशन पर 'सुप्रीम' संकट! विभाग के पास नहीं कोई फॉर्मूला,आर-पार के मूड में शिक्षक

'Supreme' crisis looms over the jobs and promotions of 10,000 teachers in Uttarakhand! The department lacks a formula, while teachers are in a mood for a showdown.

देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कक्षा एक से आठवीं तक के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य के 10 हजार से अधिक प्राथमिक और जूनियर शिक्षकों की नौकरी और पदोन्नति (प्रमोशन) पर तलवार लटक गई है। इस गंभीर संकट के बावजूद शिक्षा विभाग अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि जो शिक्षक सालों से सेवा में हैं, वे टीईटी की परीक्षा कैसे और किस माध्यम से देंगे। विभाग की इसी ढुलमुल नीति के खिलाफ अब प्रदेश भर के शिक्षक संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

टीईटी की अनिवार्यता के इस पेंच को सुलझाने के लिए शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत लगातार सक्रिय हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की सुस्ती के कारण अब तक कोई ठोस नीति नहीं बन पाई है। इस मसले पर विचार-विमर्श के लिए पहले 13 जून को शिक्षा मंत्री के कैंप कार्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के न पहुंचने के कारण बैठक को स्थगित करना पड़ा। इसके बाद सोमवार को शिक्षा निदेशालय में मंत्री की अध्यक्षता में दोबारा मैराथन बैठक हुई, लेकिन सरकार और अधिकारियों के पास इस संकट से निपटने का कोई स्पष्ट विजन नजर नहीं आया, जिससे मामला जस का तस अटका हुआ है। हैरानी की बात यह है कि उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा के मौजूदा आवेदन फॉर्म में पहले से नौकरी कर रहे (सेवारत) शिक्षकों के लिए अलग से कोई विकल्प या कॉलम ही नहीं है। यही वजह है कि पिछले दिनों वर्ष 2010 से पहले नियुक्त कुछ शिक्षकों ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के लिए गलत तथ्यों के आधार पर आवेदन कर दिया था। इन शिक्षकों ने बीएड डिग्री धारक होने के बावजूद खुद को डीएलएड या विशिष्ट बीटीसी दर्शाकर फॉर्म भरा था। हालांकि, विभाग ने पहले इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दी थी, लेकिन विवाद बढ़ने पर उसे अगले आदेश तक स्थगित करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम से नाराज शिक्षक संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय तदर्थ समिति के सदस्य मनोज तिवारी ने बताया कि इस मसले को लेकर 18 जून को शिक्षक भवन में एक महत्वपूर्ण प्रांतीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें आंदोलन की अंतिम रूपरेखा तय होगी। इसके बाद 22 जून को प्रदेश भर के हजारों शिक्षक देहरादून में सचिवालय कूच करेंगे। इस पूरे विवाद पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर देश की सर्वोच्च अदालत से जुड़ा है, इसलिए इसके आदेश की अनदेखी किसी भी सूरत में नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि 18 जून की बैठक में शिक्षक संगठनों से बातचीत कर उनके सकारात्मक सुझावों को शामिल किया जाएगा। साथ ही, सरकार इस संवेदनशील विषय पर कानूनी विशेषज्ञों और एनसीईआरटी से भी तकनीकी राय व सुझाव मांग रही है। इसके बाद ही राज्य के हितों को ध्यान में रखकर कोई अंतिम और ठोस निर्णय लिया जाएगा। बहरहाल, 31 अगस्त 2028 की समयसीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, उत्तराखंड के हजारों शिक्षकों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं।