हाईवे हादसों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: 34 मौतों के बाद देशभर में कड़े नियम लागू
नई दिल्ली। देश में बढ़ते सड़क हादसों पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुए भीषण सड़क हादसों में 34 लोगों की मौत के बाद कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने इन हादसों को “टाला जा सकने वाला” बताते हुए इसे सिस्टम की लापरवाही और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर का नतीजा माना।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सुरक्षित यात्रा नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि हाईवे, जो तेज रफ्तार यात्रा के लिए बनाए जाते हैं, वे लापरवाही के कारण “मौत के रास्ते” नहीं बन सकते।
अपने आदेश में कोर्ट ने देशभर में कई सख्त नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं। सबसे अहम निर्देश के तहत अब कोई भी भारी या व्यावसायिक वाहन नेशनल हाईवे पर बिना निर्धारित स्थान (ले-बाय या पार्किंग एरिया) के खड़ा नहीं किया जा सकेगा। इस नियम को लागू करने के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS), जीपीएस और ई-चालान सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा और 60 दिनों के भीतर इसका पालन सुनिश्चित करना होगा।
कोर्ट ने हाईवे किनारे अवैध कब्जों और ढाबों पर भी सख्ती दिखाई है। आदेश में कहा गया है कि नेशनल हाईवे के राइट ऑफ वे (ROW) में बने सभी अवैध ढांचे हटाए जाएं और भविष्य में ऐसे किसी भी निर्माण पर पूरी तरह रोक रहेगी। जिला प्रशासन को 60 दिनों के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, हर जिले में “डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स” बनाने का आदेश दिया गया है, जिसमें पुलिस, प्रशासन, एनएचएआई और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। यह टीम नियमित निगरानी करेगी और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी।
आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए कोर्ट ने हर 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का निर्देश दिया है, ताकि हादसे के बाद तुरंत राहत मिल सके। साथ ही, 45 दिनों के भीतर दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट की पहचान कर वहां हाईमास्ट लाइट, चेतावनी संकेत और स्पीड कैमरे लगाने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम तथ्य भी रखा कि देश के कुल सड़क नेटवर्क में नेशनल हाईवे की हिस्सेदारी सिर्फ 2% है, लेकिन यहां करीब 30% सड़क हादसे होते हैं। इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कोर्ट ने कहा कि एक भी जान का नुकसान सरकार की विफलता है और इसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को 75 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई दो महीने बाद होगी।
यह फैसला देश में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में हादसों को कम करने और लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।