सुखवंत सिंह आत्महत्या केसः पुलिस पर मीडिया मैनेजमेंट के गंभीर आरोप! दबाव, डर और ‘इनाम’ की चर्चाएं तेज

Sukhwant Singh suicide case: Serious allegations of media manipulation against the police! Discussions about pressure, fear, and 'rewards' intensify.

रुद्रपुर। काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जनपद पुलिस के तमाम प्रयासों के बावजूद यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। आरोप है कि पुलिस निष्पक्ष जांच के बजाय मामले को किसी तरह रफा-दफा करने की कोशिशों में जुटी है, जिससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस मामले में सियासत भी गरमाती नजर आ रही है, विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के लोग मृतक किसान को न्याय दिलाने के लिए खुलकर सामने आ रहे हैं। पुलिस की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल इस मामले को और संवेदनशील बना रहे हैं। वही इस बीच किसान सुखवंत के भाई परविंदर सिंह ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उनपर और उनकी भाभी प्रदीप कौर पर दबाव बनाकर बयान बदलवाए जा रहे हैं। बीते दिन भाभी पर पुलिस ने दबाव बनाकर दूसरा वीडियो बनवाया, जबकि उनका और उनकी भाभी की मांग वही है जो वह पूर्व के वीडियो में रख चुके हैं। ऐसे में वे न्याय की उम्मीद कैसे करें। परविंदर सिंह ने कहा कि बार-बार एक बात को तोड़-मरोड़कर पेश करने से उनका परिवार परेशान हो गया है। उनके भाई के वीडियो पुलिस के पास हैं। बावजूद इसके किसी न किसी तरह से दबाव बनाया जाना गलत है। वहीं सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने उनके परिवार के फोन नंबर सर्विलांस पर लगा दिए हैं। इस वजह से परिवार के सदस्य फोन पर किसी से कोई भी बात करने से डर रहे हैं। 

कुमाऊं कमिश्नर ने एसएसपी के सामने लगाई सवालों की झड़ी
दूसरी तरफ सुखवंत आत्महत्या मामले में कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की मजिस्ट्रेटी जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। आरोपित थानेदार कुंदन रौतेला के बाद शुक्रवार को ऊधमसिंह नगर के कप्तान मणिकांत मिश्रा के बयान दर्ज किए गए। सूत्रों के अनुसार आयुक्त ने एसएसपी मणिकांत के बयान दर्ज करने के लिए 50 सवालों की लंबी सूची तैयार की थी। साथ ही क्रॉस क्वेश्चन करने के लिए भी अलग से एक लिस्ट तैयार की थी जिससे सुखवंत मामले का सच सामने लाने में आसानी हो सके। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सुखवंत के वीडियो के साथ ही ई-मेल को भी आधार बनाकर जांच की जा रही है जिससे पुलिस के कारनामों को उजागर करने के साथ ही सिस्टम के भ्रष्ट तंत्र का भी खुलासा किया जा सके। ऊधमसिंह नगर के कप्तान मणिकांत मिश्रा ने जांच अधिकारी को लंबा इंतजार कराया। शुक्रवार की दोपहर बाद 3ः04 बजे वह कैंप कार्यालय में दाखिल हुए और सीधे आयुक्त के दफ्तर में चले गए। जानकारी के अनुसार कप्तान लगभग डेढ़ घंटे तक जांच अधिकारी के सवालों का जवाब देते रहे। सूत्रों के मुताबिक आयुक्त दीपक रावत ने प्रश्नों की ऐसी झड़ी लगाई कि ऊधमसिंह नगर के एसएसपी उत्तर देते-देते थक गए। डेढ़ घंटे चले सवाल-जवाब के बाद जब एसएसपी मिश्रा आयुक्त के कमरे से बाहर आए तो उनके चेहरे पर मायूसी और थकान दिखी।

मीडिया के सामने नतमस्तक पुलिस
किसान सुखवंत आत्महत्या प्रकरण में अब जनपद ऊधम सिंह नगर पुलिस की भूमिका पर सवाल और गहराते जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक जनपद के पुलिस मुखिया पर पहले से ही मीडिया कर्मियों से बदसलूकी और पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस संवेदनशील मामले में पुलिस का रवैया और भी संदेह के घेरे में आ गया है। हालात यह हैं कि सुखवंत आत्महत्या मामले को लेकर जनपद पुलिस मीडिया के सामने नतमस्तक दिख रही है, जबकि परदे के पीछे खबरों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। सूत्रों का दावा है कि पुलिस द्वारा मीडिया कर्मियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे खबरें पुलिस के अनुकूल प्रकाशित करें। जिला मुख्यालय से लेकर पूरे जनपद तक कथित तौर पर पत्रकारों को तरह-तरह के प्रलोभन और डर दिखाकर खबर न छापने या हटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जो पत्रकार इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, उन पर सीधे-सीधे दबाव डाला जा रहा है। एक मीडिया कर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनसे सुखवंत आत्महत्या मामले में प्रकाशित खबर डिलीट कराने और पुलिस के पक्ष में खबर चलाने के लिए दबाव बनाया गया। सामाजिक और व्यक्तिगत संबंधों के चलते उन्हें अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से खबर हटानी पड़ी। सूत्रों का यह भी आरोप है कि इसके बाद ‘इनाम’ के तौर पर पुलिस की ओर से शराब की कुछ बोतलें दी गईं, ताकि मामला शांत किया जा सके।

राजधानी दून में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन
वहीं बीते रोज प्रदेश मुख्यालय पर किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या की जांच सीबीआई से कराने समेत अन्य मांगों को लेकर कांग्रेसियों ने पुलिस मुख्यालय कूच किया। इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया। इस दौरान कांग्रेसियों ने बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध बढ़ता देख मौके पर एसपी सिटी पहुंचे और कांग्रेसियों से वार्ता की, लेकिन प्रदर्शनकारी डीजीपी को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे। बाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यालय में जाकर डीजीपी को ज्ञापन सौंपा। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में नारेबाजी करते हुए कांग्रेसी पुलिस मुख्यालय जा रहे थे। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि 10 जनवरी को काशीपुर क्षेत्र के गांव पैगा निवासी सुखवंत सिंह नामक किसान ने पुलिस प्रताड़ना के चलते आत्महत्या की है। यह घटना न केवल अत्यंत गंभीर है, बल्कि क्षेत्र की आम जनता व किसानों में भय, असुरक्षा, असंतोष एवं आक्रोश का वातावरण भी के उत्पन्न कर रही है। आरोप है कि किसान ने पुलिस को तहरीर दी थी। इसके विपरीत धोखाधड़ी करने वाले भू.माफियाओं को पुलिस ने संरक्षण देकर किसान को लगातार प्रताड़ित किया। ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि मृतक किसान ने मृत्यु पूर्व घोषणा में उधमसिंहनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का नाम लिया था। इसके बाद भी आरोपी अधिकारी को पद से हटाया नहीं गया है।