पेपर लीक के खिलाफ उत्तराखंड में उबाल: सड़कों पर उतरे छात्र-युवा! हल्द्वानी, अल्मोड़ा और कीर्तिनगर तक गूंजा विरोध, UTU पेपर लीक मामले में जांच का दायरा बढ़ा
हल्द्वानी/देहरादून। देशभर में पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन की गूंज अब उत्तराखंड में भी तेज हो गई है। नीट-यूजी पेपर लीक मामले और राज्य में सामने आए उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) के परीक्षा प्रश्नपत्र लीक प्रकरण को लेकर छात्र संगठनों और युवाओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को हल्द्वानी, अल्मोड़ा और कीर्तिनगर में छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन कर सरकार से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। वहीं, देहरादून में UTU पेपर लीक मामले में गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को लेकर पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं वर्तमान मामला किसी पुराने पेपर लीक नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है।
हल्द्वानी में प्रदर्शन, पुलिस से हुई नोकझोंक
कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में बुद्ध पार्क में विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र हुए। उत्तराखंड क्रांति दल, आइसा, परिवर्तनकामी छात्र संगठन और एनएसयूआई समेत कई संगठनों ने पेपर लीक के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की ओर से निकाली जा रही शव यात्रा को लेकर तिकोनिया में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। पुलिस द्वारा शव यात्रा में शामिल प्रतीकात्मक अर्थी को रोकने और हटाने का प्रयास किए जाने पर स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद प्रदर्शनकारी बुद्ध पार्क से जुलूस की शक्ल में जिलाधिकारी कैंप कार्यालय की ओर रवाना हुए। प्रदर्शन के चलते तिकोनिया चौराहे पर यातायात भी प्रभावित रहा। एनएसयूआई नेताओं ने बताया कि नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के पेपर लीक प्रकरण को भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के बाद अब विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अल्मोड़ा में अनिश्चितकालीन धरना शुरू
अल्मोड़ा के गांधी पार्क में छात्र संगठनों ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस्तीफे की मांग की। छात्र नेताओं का कहना था कि लाखों युवा वर्षों तक मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण उनका भविष्य प्रभावित होता है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
कीर्तिनगर में युवाओं ने निकाला पैदल मार्च
उधर श्रीनगर गढ़वाल के कीर्तिनगर में भी युवाओं ने जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया। समाजसेवी गणेश भट्ट के नेतृत्व में युवाओं ने कीर्तिनगर बाजार से तहसील परिसर तक पैदल मार्च निकाला और धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम ज्ञापन भेजकर परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग की भी जांच की मांग उठाई।
UTU पेपर लीक मामले की जांच का दायरा बढ़ा
देहरादून में UTU पेपर लीक मामले की जांच में नए सवाल सामने आ रहे हैं। गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता पिछले करीब 16 वर्षों से उत्तराखंड के अलग-अलग इंजीनियरिंग संस्थानों में कार्यरत रहे हैं। पुलिस के अनुसार, उन्होंने कई मौकों पर UTU की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी भी संभाली थी। इसी वजह से जांच एजेंसियां वर्ष 2010 से अब तक आयोजित कुछ परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में ला रही हैं। पुलिस डॉ. गुप्ता के मोबाइल फोन, लैपटॉप, ई-मेल, व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि वर्तमान पेपर लीक की घटना तक ही मामला सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क अथवा पुराना पैटर्न भी मौजूद है। यह मामला मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी विषयों की परीक्षाओं से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंच गया था। UTU के परीक्षा नियंत्रक की शिकायत पर प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस ने डॉ. गुप्ता को गिरफ्तार किया। शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं, जबकि UTU ने उन्हें सात वर्षों तक विश्वविद्यालय की परीक्षा संबंधी गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।