उत्तराखंड में महिला आरक्षण को लेकर विशेष सत्र का आगाज़, सदन में सीएम धामी का संबोधन शुरू 

Special Session on Women's Reservation Begins in Uttarakhand; CM Dhami Addresses the House

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र आज महिला आरक्षण के संवेदनशील और ऐतिहासिक मुद्दे पर चर्चा के साथ शुरू हो गया। सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश और प्रदेश की मातृशक्ति को उनके अधिकार दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना ही मुख्य लक्ष्य है। सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "मैं सदन के सभी सदस्यों से अनुरोध करता हूँ कि उत्तराखंड विधानसभा एकमत होकर केंद्र सरकार के इन प्रयासों का समर्थन करे। महिला सशक्तीकरण के इस पवित्र कार्य में राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।" मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति का उदाहरण देते हुए कहा कि हम अपनी प्रार्थनाओं में महालक्ष्मी और माँ काली का आह्वान करते हैं, ऐसे में समाज की शक्ति यानी महिलाओं को उनका हक देने के लिए पक्ष-विपक्ष को मिलकर आगे आना होगा।

सदन में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के तेवर भी तीखे नजर आए। कांग्रेस पार्टी ने महिलाओं के अधिकारों और राज्य में बढ़ते महिला अपराधों को लेकर सरकार को घेरने की पुख्ता रणनीति बनाई है। विपक्ष की मुख्य मांग है कि 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को बिना किसी देरी के तत्काल लागू करने के लिए सदन से एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जाए। विपक्ष ने साफ किया कि वे केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि धरातल पर महिलाओं की सुरक्षा और अपराधों की रोकथाम के मुद्दे पर सत्ता पक्ष से जवाब मांगेंगे। विधानसभा के इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के पूरे आसार हैं। जहाँ एक ओर सरकार इसे 'नारी शक्ति' के सम्मान के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे 'देरी और विफलता' का मुद्दा बनाकर सरकार पर दबाव बना रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य के निर्माण और विकास में योगदान देने वाली सभी महिलाओं को नमन करते हुए अपना संबोधन शुरू किया, जिसने सदन के माहौल को भावनात्मक बना दिया। अब देखना यह होगा कि क्या सदन मुख्यमंत्री की अपील के अनुरूप एकमत होकर प्रस्ताव का समर्थन करता है या चर्चा हंगामे की भेंट चढ़ जाती है।