भारत में लागू हो कुरान का कानून?क्या वाकई विधानसभा में उठी ये मांग? राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस

Should Quranic laws be implemented in India? Was this demand actually raised in the Assembly? A heated debate erupted from political circles to social media.

  महाराष्ट्र 

भारत में कानून संविधान के मुताबिक चलता है, लेकिन अब महाराष्ट्र विधानसभा से ऐसी मांग उठी है जिसने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने की पैरवी हुई, तो दूसरी ओर कुरान और मुस्लिम पर्सनल लॉ के आधार पर कानून लागू करने की बात कही गई। विधानसभा में दिया गया यह बयान अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया है।

पूरा मामला महाराष्ट्र विधानसभा का है, जहां नासिक से भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने महिलाओं की सुरक्षा और समान अधिकारों का हवाला देते हुए राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि तीन तलाक और बहुविवाह जैसी प्रथाओं से प्रभावित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए यूसीसी जरूरी है।

इसी दौरान एनसीपी की विधायक सना मलिक ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अत्याचार केवल मुस्लिम महिलाओं के साथ ही नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ और कुरान के अनुसार कुछ परिस्थितियों में बहुविवाह की अनुमति है और इस विषय पर बहस करते समय कुरान को आधार बनाया जाना चाहिए।

सना मलिक ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने कोई नया कानून नहीं बनाया, बल्कि उसने कुरान में बताए गए सिद्धांतों के अनुसार कानून लागू किए हैं। उनका कहना था कि मुसलमान कुरान की शिक्षाओं का पालन करते हैं और कानून पर चर्चा करते समय कुरान को ही आधार माना जाना चाहिए।

तीन तलाक के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस्लाम में तलाक के कई तरीके हैं, जैसे तलाक-ए-अहसन, तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-बिद्दत। उनके अनुसार, तलाक-ए-बिद्दत मूल धार्मिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं बल्कि एक सामाजिक प्रथा थी, जबकि अन्य तरीके इस्लामी शिक्षाओं के अनुरूप माने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तत्काल तीन तलाक पर कानून ऐसी प्रथा को खत्म करने के लिए बनाया गया जिसे वह इस्लाम की मूल व्यवस्था का हिस्सा नहीं मानती हैं।

बहुविवाह पर अपनी दलील रखते हुए सना मलिक ने सवाल उठाया कि क्या बहुविवाह केवल मुस्लिम समाज में ही होता है? क्या दूसरे धर्मों के लोग बहुविवाह नहीं करते? बहस के दौरान उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि यदि कोई सक्षम व्यक्ति एक सेब के चार बराबर हिस्से करके अपनी चार पत्नियों में बांट सकता है, तो इसमें गलत क्या है? इस टिप्पणी पर विधानसभा में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

सना मलिक के इन बयानों के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। वहीं सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष में खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। यूसीसी, मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक कानूनों को लेकर एक बार फिर देश में बहस तेज होती दिखाई दे रही है।