रुद्रपुर। जनपद ऊधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आपराधिक मामलों में कथित तौर पर लिप्त एक व्यक्ति द्वारा अपनी पहचान और कानूनी मुकदमों को छिपाकर पासपोर्ट बनवाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के मूल निवासी और वर्तमान में रुद्रपुर निवासी असगर (पुत्र अनवार हुसैन) पर पुलिस व प्रशासन को गुमराह कर पासपोर्ट प्राप्त करने का बड़ा आरोप लगा है। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, देहरादून को विस्तृत शिकायती पत्र भेजकर पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
रुद्रपुर में पासपोर्ट सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रामपुर जिले के मूल निवासी और वर्तमान में रुद्रपुर के पहाड़गंज क्षेत्र में रह रहे असगर पुत्र अनवार हुसैन पर कथित तौर पर आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाकर पासपोर्ट बनवाने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में रामपुर निवासी ओमवीर ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, देहरादून को शिकायती पत्र भेजकर आवेदन और पुलिस सत्यापन की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया रोकने की मांग की है। शिकायतकर्ता ओमवीर के अनुसार, असगर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के भोट क्षेत्र का निवासी है और वर्ष 2011 से रुद्रपुर के पहाड़गंज मोहल्ले में रह रहा है। शिकायत में उसके खिलाफ दर्ज बताए जा रहे कई आपराधिक मुकदमों का उल्लेख किया गया है। ओमवीर का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने कथित रूप से अपनी पहचान और कानूनी मामलों से जुड़ी जानकारी छिपाकर पासपोर्ट हासिल करने की कोशिश की है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि गलत या भ्रामक तथ्यों के आधार पर पासपोर्ट जारी हो जाता है तो संबंधित व्यक्ति देश छोड़कर फरार हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। शिकायती पत्र में बताया गया है कि 15 सितंबर 2026 को एसएसपी कार्यालय, रुद्रपुर में पासपोर्ट सत्यापन से संबंधित कागजात प्रस्तुत किए गए थे। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि आवेदन में दिए गए पते, पहचान और अन्य दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित थानों और अदालतों से आपराधिक मुकदमों का रिकॉर्ड मिलाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि आवेदन में किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाया तो नहीं गया है। ओमवीर ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी से आग्रह किया है कि पुलिस सत्यापन की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और यदि किसी स्तर पर गलत दस्तावेज प्रस्तुत करने या सत्यापन को प्रभावित करने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता ने जांच पूरी होने तक पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी की है।
वही मामले में एक अन्य गंभीर सवाल स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) के सत्यापन कार्य को लेकर भी उठाया गया है। सूत्रों के हवाले से आरोप लगाया जा रहा है कि कोतवाली स्थित एलआईयू कार्यालय में एक निजी व्यक्ति कथित तौर पर सत्यापन के नाम पर लोगों के घर जाता है और इसके एवज में मोटी रकम वसूलता है। यह भी दावा किया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति कार्यालय की आड़ में सत्यापन संबंधी कामकाज में दखल देता है। हालांकि, इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि निजी व्यक्ति की भूमिका और कथित वसूली के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पुलिस सत्यापन व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय होगा। ऐसे में यह जरूरी है कि संबंधित विभाग शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु की निष्पक्ष जांच करे और स्पष्ट करे कि पासपोर्ट सत्यापन का कार्य अधिकृत कर्मियों के माध्यम से ही किया जा रहा है या नहीं। फिलहाल शिकायत के आधार पर जांच और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। असगर पर लगाए गए आरोप अभी शिकायतकर्ता के दावे हैं, किसी अपराध में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं। ऐसे में निष्पक्ष जांच और सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है।






