रुद्रपुर में 70 लाख का नजूल 'खेल': लैंड माफिया-व्यापारी की साठगांठ से सरकारी जमीन का सौदा,सरकार को लगाया चूना,जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज

Rs 70-lakh 'Nazul land scam' in Rudrapur: Government land deal struck through collusion between land mafias and a businessman, causing financial loss to the state; a probe could unravel several secre

रुद्रपुर। शहर के प्राइम लोकेशन पर स्थित सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे 'बेचने' और 'खरीदने' का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। रुद्रपुर के रवींद्रनगर स्थित श्याम टॉकीज रोड पर लैंड माफिया और शहर के एक कॉपी-किताब के व्यापारी (स्टेशनरी और बुक सेलर) ने मिलकर सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए करीब 70 लाख रुपये से अधिक का अवैध सौदा कर डाला। यह जमीन नजूल यानी राज्य सरकार के स्वामित्व वाली जमीन है, जिस पर मालिकाना हक का सपना दिखाकर माफिया ने बैंक तक को अंधकार में रख दिया।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रुद्रपुर के रवींद्रनगर क्षेत्र में करोड़ों की कीमत वाली नजूल भूमि को भू-माफिया ने जालसाजी और कूटरचित (फर्जी) कागजातों के आधार पर वही के एक स्थानीय व्यापारी को बेच दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध खरीद-फरोख्त में सिर्फ सरकारी जमीन का सौदा ही नहीं हुआ, बल्कि बैंक को भी गुमराह कर इस विवादित संपत्ति पर मोटा लोन पास करा लिया गया। यदि प्रशासन अब इस अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलाता है या पट्टा रद्द करता है, तो सरकारी राजस्व के साथ-साथ संबंधित बैंक को भी भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ेगा। इस 'मास्टरमाइंड' सौदे के सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस सौदे में न केवल सरकारी स्टाम्प और राजस्व का नुकसान किया गया, बल्कि ब्लैक मनी को व्हाइट करने और इनकम टैक्स में भारी हेरफेर का भी अंदेशा है। कानूनी परिणामों से बेखौफ होकर दोनों पक्षों ने इस डील को अंजाम दिया, मानो उन्हें प्रशासन और कानून का कोई खौफ ही न हो। नजूल भूमि सीधे तौर पर राज्य सरकार की संपत्ति होती है। इसे आमतौर पर 15 से 99 वर्षों के लिए केवल पट्टे (लीज) पर आवंटित किया जाता है। इसे न तो सीधे खरीदा जा सकता है और न ही बेचा जा सकता है। आपको बता दे कि आप नजूल भूमि का मालिकाना हक कभी नहीं खरीद सकते। इस पर केवल लीज के सीमित अधिकार होते हैं, जिन्हें बिना सरकारी अनुमति के ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। ऐसी जमीन की कोई भी खरीद-बिक्री या रजिस्ट्री कानून की नजर में शून्य (मान्य नहीं) होती है। शर्तों का उल्लंघन या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर सरकार कभी भी पट्टा रद्द कर जमीन का कब्जा वापस ले सकती है। लैंड माफिया के झांसे में आकर फर्जी कागजात पर डील करने से जीवन भर की कमाई डूब सकती है और आपराधिक मुकदमे (420 आदि) का सामना करना पड़ सकता है। इस मामले के उजागर होने के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। जानकारों का मानना है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल भू-माफिया, व्यापारी और लोन पास करने वाले बैंक अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हुई, तो कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन इस नटवरलाली पर कितनी जल्दी शिकंजा कसता है!