महिलाओं के साथ बढ़ता ऑनलाइन अपराध: रोजाना 370 केस, टॉप पर नकली प्रोफाइल,अश्लील संदेश भी बढ़ा रहे परेशानी
नई दिल्ली। तकनीक के इस दौर में जहाँ एक ओर महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधी उन्हें अपना सॉफ्ट टारगेट बना रहे हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों की संख्या 6,76,019 तक पहुंच गई है। औसतन, देश में हर दिन 370 महिलाएं साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करा रही हैं।
देश में महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और यह एक गंभीर सामाजिक चुनौती का रूप लेता जा रहा है। हालात यह हैं कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर रोजाना औसतन 370 मामलों की शिकायत दर्ज हो रही है। पिछले पांच वर्षों में महिलाओं से जुड़े साइबर अपराधों की कुल संख्या 6,76,019 तक पहुंच चुकी है, जो डिजिटल दुनिया के बढ़ते खतरों की तस्वीर साफ करती है। इन मामलों में सबसे अधिक शिकायतें नकली प्रोफाइल, अश्लील संदेश और पहचान चोरी से जुड़ी हैं। अकेले इन श्रेणियों में 4,89,790 केस दर्ज किए गए हैं। सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर महिलाओं को परेशान करना अब अपराधियों का सबसे आम हथियार बन चुका है। इसके अलावा अश्लील मैसेज और साइबर स्टॉकिंग के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 में साइबर बदमाशी, स्टॉकिंग और अश्लील संदेशों के 21,589 मामले दर्ज हुए थे, जो 2025 तक बढ़कर 45,832 हो गए। यानी इन अपराधों में दोगुने से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह फर्जी अकाउंट से जुड़े मामलों की संख्या 2021 में 15,843 थी, जो 2025 में बढ़कर 46,784 हो गई। पांच वर्षों में इस श्रेणी में कुल 1,56,371 केस सामने आए हैं। पहचान चोरी और प्रोफाइल हैकिंग के मामलों में भी चिंताजनक वृद्धि हुई है। 2021 में जहां 10,650 मामले सामने आए थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा 38,297 तक पहुंच गया और 2025 में 34,533 केस दर्ज हुए। पिछले पांच वर्षों में कुल 1,43,492 महिलाएं इस तरह के अपराधों का शिकार बनी हैं। इसके अलावा ई-मेल फिशिंग, ऑनलाइन नौकरी धोखाधड़ी और वैवाहिक ठगी जैसे मामलों में भी महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। पांच साल में ई-मेल फिशिंग के 7,682 केस, नौकरी से जुड़े ऑनलाइन धोखाधड़ी के 53,143 मामले और ऑनलाइन वैवाहिक धोखाधड़ी के 4,680 केस सामने आए हैं। वहीं, डराने-धमकाने वाले ई-मेल और छद्म पहचान से अपराध करने के मामलों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि अब महिलाएं इन अपराधों के खिलाफ खुलकर शिकायत दर्ज करा रही हैं। पहले जहां झिझक और डर के कारण कई मामले सामने नहीं आते थे, अब जागरूकता बढ़ने के साथ शिकायतों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। साइबर अपराधों से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की स्थापना की गई है, जो इन मामलों में समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करता है। इसके तहत एक अत्याधुनिक साइबर धोखाधड़ी शमन केंद्र भी बनाया गया है, जहां विभिन्न एजेंसियां मिलकर तेजी से कार्रवाई करती हैं। साथ ही पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को साइबर जांच और अभियोजन के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 1,42,025 प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्कता और जागरूकता ही इन अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। महिलाओं को चाहिए कि वे अपनी निजी जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।