LUCC 1000 करोड़ घोटाले के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, पीड़ितों ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार,अभिनेता आयुष शाह भी हो चुके हैं ठगी का शिकार

Protest at Jantar Mantar Against the ₹1,000 Crore LUCC Scam; Victims Appeal to the President—Actor Ayush Shah Also Falls Victim to the Fraud

नई दिल्ली। उत्तराखंड में सामने आए कथित 1000 करोड़ रुपये के LUCC घोटाले के विरोध में बड़ी संख्या में लोग राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और जोरदार प्रदर्शन किया। श्रीनगर गढ़वाल से पदयात्रा करते हुए दिल्ली पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की मांग उठाई।


प्रदर्शन का नेतृत्व सरस्वती देवी ने किया, जिनके साथ उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप भी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस घोटाले में राज्य के हजारों भोले-भाले लोगों की मेहनत की कमाई डूब गई है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।


प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात कर मामले में सहयोग की अपील की। हरीश रावत ने पीड़ितों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मांग की गई कि घोटाले से प्रभावित लोगों को आर्थिक राहत पैकेज दिया जाए, ताकि वे नुकसान की भरपाई कर सकें।


हाई-प्रोफाइल कनेक्शन से बढ़ी मामले की गंभीरता
LUCC चिटफंड घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह मामला अब आम नागरिकों से आगे बढ़कर हाई-प्रोफाइल लोगों तक पहुंच गया है। अभिनेता आयुष शाह भी कथित तौर पर MyFledge से जुड़े निवेश मामले में ठगी का शिकार हो चुके हैं। आरोप है कि कंपनी ने निवेश और बिजनेस पार्टनरशिप के नाम पर उनसे बड़ी रकम वसूली, लेकिन तय समय पर न तो राशि लौटाई गई और न ही कोई वैध रिटर्न दिया गया।


कंपनी डायरेक्टर्स पर गंभीर आरोप, कोर्ट में दर्ज केस
इस मामले में कंपनी के डायरेक्टर्स बिश्वजीत घोष, पियाली चटर्जी घोष और शबाब हुसैन उर्फ शबाब हाशिम पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, आरोपियों द्वारा जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद मुंबई के गिरगांव कोर्ट में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कुल छह आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।


पूरे नेटवर्क पर उठे सवाल
इस खुलासे के बाद LUCC घोटाले ने व्यापक रूप ले लिया है। अब यह मामला केवल निवेशकों के नुकसान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे नेटवर्क, उसकी कार्यप्रणाली और नियामक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस तरह के मामलों में सख्त जांच और समयबद्ध कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके।