Aug 19, 2026 Login

उत्तराखंड में 'बहुगुणा परिवार' पर फिर गरमाई सियासत: हरीश रावत के फेसबुक पोस्ट पर भड़के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, किया तीखा पलटवार

Politics heats up again over the 'Bahuguna family' in Uttarakhand: Cabinet Minister Saurabh Bahuguna lashes out at Harish Rawat's Facebook post, launches a sharp counter-attack.

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बहुगुणा परिवार को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने का जिक्र करते हुए हरीश रावत की टिप्पणी पर धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री और विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा ने तीखा पलटवार किया है। सौरभ ने कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे महान नेता के नाम को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। विवाद की शुरुआत हरीश रावत की फेसबुक पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने लिखा कि, “हेमवती नंदन बहुगुणा जी का बेटा दल बदलकर भाजपा में जाएगा। मैं बहुत गुणा-भाग लगाता रहता था, लेकिन मन कहता था कि वह नहीं जाएगा, मगर वह गया।” इस टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के वर्ष 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के संदर्भ में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2016 उत्तराखंड की राजनीति का सबसे चर्चित दौर रहा था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार के दौरान कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हुआ था। विजय बहुगुणा समेत कई विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी और बाद में भाजपा का दामन थाम लिया था। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी थी और कांग्रेस सरकार गहरे संकट में आ गई थी। वर्षों बाद हरीश रावत ने उसी घटनाक्रम का जिक्र कर राजनीतिक बहस को फिर से हवा दे दी है। हरीश रावत की टिप्पणी के बाद कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब हरीश रावत ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि उनकी बातों पर अधिक ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा का उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति में अतुलनीय योगदान रहा है। ऐसे महान नेता के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक कटाक्ष या व्यक्तिगत टिप्पणी के लिए नहीं किया जाना चाहिए। सौरभ बहुगुणा ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन दिवंगत नेताओं के सम्मान को बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि किसी पर राजनीतिक टिप्पणी करनी है तो सीधे उसी व्यक्ति पर की जाए, न कि ऐसे व्यक्तित्वों का नाम लिया जाए जिन्होंने देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस पूरे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, हरीश रावत की पोस्ट और सौरभ बहुगुणा के जवाब के बाद प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज होने के आसार बढ़ गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड की राजनीति में बहुगुणा परिवार हमेशा प्रभावशाली रहा है। ऐसे में परिवार को लेकर दिए गए बयान स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाते हैं। आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी माहौल को देखते हुए इस मुद्दे के और तूल पकड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, एक सोशल मीडिया पोस्ट ने उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा के नेताओं की प्रतिक्रियाएं इस सियासी विवाद को और गर्मा सकती हैं, जबकि राजनीतिक गलियारों की नजर अब विजय बहुगुणा की संभावित प्रतिक्रिया पर भी टिकी हुई है।