केतन हत्याकांड पर सियासी घमासान तेजः सांसद चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने फिर रोका! देवल गांव जाने की जिद पर अड़े, भीम आर्मी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, कई हिरासत में
देहरादून। टिहरी जिले के चर्चित केतन हत्याकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। मंगलवार को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद एक बार फिर मृतक केतन लाल के परिजनों से मिलने प्रतापनगर के देवल गांव के लिए रवाना हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें नरेंद्रनगर बाईपास पर रोक दिया। इसके बाद मौके पर काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। सांसद अपने समर्थकों के साथ आगे जाने की जिद पर अड़े रहे, जबकि पुलिस प्रशासन सुरक्षा और कानून-.व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति देने से इंकार करता रहा। पुलिस अधिकारियों ने सांसद को बताया कि वह सीमित संख्या में, लगभग 10 से 12 लोगों के साथ देवल गांव जा सकते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में समर्थकों को साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का कहना था कि भारी भीड़ के गांव पहुंचने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए एहतियात के तौर पर यह निर्णय लिया गया है। हालांकि सांसद अपने समर्थकों के साथ जाने की मांग पर डटे रहे।
इसी बीच, केतन हत्याकांड को लेकर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने भी एक बार फिर विरोध प्रदर्शन किया। टिहरी की ओर कूच कर रहे कार्यकर्ताओं को हरिद्वार के शंकराचार्य चौक पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। काफी देर तक कार्यकर्ता आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे और पुलिस के साथ उनकी नोकझोंक भी हुई, लेकिन पुलिस ने किसी को आगे नहीं जाने दिया। इस दौरान कुछ पदाधिकारी अलग-अलग वाहनों से आगे निकल गए, जिनके पीछे पुलिस अधिकारी भी रवाना हुए। जानकारी के अनुसार, सांसद चंद्रशेखर आजाद दो वाहनों के काफिले के साथ हरिद्वार पहुंचे थे। पहले उन्हें शंकराचार्य चौक पर रोका गया, लेकिन कुछ समय बाद काफिले को आगे बढ़ने दिया गया। इसके बाद नरेंद्रनगर बाईपास पर पुलिस ने दोबारा उन्हें रोक लिया, जहां प्रशासन और सांसद के बीच लंबी बातचीत का दौर चला। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब सांसद चंद्रशेखर आजाद को केतन हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जाने से रोका गया हो। कुछ दिन पहले भी वह खानपुर विधायक उमेश कुमार के साथ देवल गांव जाने के लिए निकले थे, लेकिन हरिद्वार के शंकराचार्य चौक पर पुलिस ने उनके काफिले को रोक दिया था। उस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का.मुक्की भी हुई, जिसमें सांसद की शर्ट फट गई थी।
सांसद ने उस समय पुलिस पर अभद्र व्यवहार और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया था। उस घटना के बाद कई घंटे तक चले हंगामे के बीच आईजी गढ़वाल ने फोन पर सांसद से बातचीत कर उन्हें जल्द ही पीड़ित परिवार से मुलाकात कराने और मामले में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया था। आश्वासन मिलने के बाद सांसद वापस लौट गए थे। लेकिन मंगलवार को वह एक बार फिर समर्थकों के साथ पीड़ित परिवार से मिलने के उद्देश्य से रवाना हुए, जहां उन्हें दोबारा पुलिस ने रोक दिया। उधर, प्रदेश में अनुसूचित जाति समाज के लोगों के कथित उत्पीड़न और केतन हत्याकांड को लेकर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास कूच का भी प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बीच रास्ते में ही रोक दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर डालनवाला थाने भेज दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने से भी रोका जा रहा है।