बागेश्वर: कागजों में सड़क, जमीन पर इंतजार! फूलवाड़ी-फुलचौरा-खालीधार मार्ग को लेकर 18वें दिन भी ग्रामीणों का क्रमिक अनशन, 21 अगस्त को डीएम कार्यालय घेराव का ऐलान
कपकोट। बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र में फूलवाड़ी-फुलचौरा-खालीधार सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का क्रमिक अनशन लगातार 18वें दिन भी जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क उनके लिए सिर्फ विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की जरूरत है। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है और बरसात के मौसम में मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क धरातल पर चाहिए। समाजसेवी भूपेंद्र कोरंगा के मुताबिक आंदोलन के 17 दिन तक जब कोई जनप्रतिनिधि या संबंधित विभाग ग्रामीणों की सुध लेने नहीं पहुंचा तो उन्होंने तालाबंदी का ऐलान किया। इसके बाद क्षेत्रीय विधायक, भाजपा जिलाध्यक्ष, दर्जा राज्य मंत्री शिव सिंह बिष्ट और संबंधित विभाग के अधिकारी ग्रामीणों से वार्ता करने पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों के साथ सड़क निर्माण को लेकर बातचीत हुई। जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की ओर से ग्रामीणों को आश्वासन देने का प्रयास किया गया, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि अब केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। ग्रामीणों ने कहा कि जो सड़क कागजों में दिखाई जा रही है, वह धरातल पर भी दिखाई देनी चाहिए। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण को लेकर घोषणाएं और आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि सड़क का लाभ आज तक ग्रामीणों को नहीं मिल पाया।
2018 में फीता कटा, मशीन आई और फिर गायब हो गई
समाजसेवी भूपेंद्र कोरंगा ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीण कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में तत्कालीन विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों ने राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से सड़क निर्माण का शुभारंभ किया था। उनके मुताबिक इस दौरान फीता काटा गया, एक मशीन मौके पर लाई गई और कुछ हिस्से में खुदाई भी की गई। ग्रामीणों को लड्डू भी खिलाए गए। लेकिन कुछ दिन बाद मशीन को वहां से दूसरी जगह भेज दिया गया और उसके बाद आज तक सड़क निर्माण के लिए मशीन वापस नहीं आई। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से उन्हें सड़क निर्माण के नाम पर आश्वासन ही मिलते रहे हैं। कई बार उम्मीद बंधी कि अब सड़क का काम शुरू होगा, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। यही वजह है कि इस बार ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
विधायक और दर्जा राज्य मंत्री के सामने जताया आक्रोश
तालाबंदी के ऐलान के बाद अनशन स्थल पर पहुंचे क्षेत्रीय विधायक और दर्जा राज्य मंत्री शिव सिंह बिष्ट को भी ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने उनके सामने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की और वर्षों से सड़क निर्माण के नाम पर मिल रहे आश्वासनों पर सवाल उठाए। ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से वे सड़क के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार आश्वासन देकर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश होती है, लेकिन उसके बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती।
21 अगस्त को डीएम कार्यालय घेराव की चेतावनी
ग्रामीणों ने अब आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। भूपेंद्र कोरंगा और ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि यदि सड़क निर्माण को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 21 अगस्त को जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सड़क निर्माण का काम वास्तव में धरातल पर शुरू नहीं हो जाता। उनका कहना है कि अब वे केवल सरकारी कागजों में सड़क नहीं चाहते, बल्कि ऐसी सड़क चाहते हैं जिस पर ग्रामीण अपने वाहनों से आवागमन कर सकें। समिति अध्यक्ष पूर्व कैप्टन रतन सिंह दानू ने कहा कि रैली में कुमाऊंनी पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल-दमाऊं, तुरही, नरसिंग, भौंकर और झांझर भी शामिल किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के माध्यम से सरकार तक ग्रामीणों की आवाज पहुंचाई जाएगी और शासन की गहरी तंद्रा तोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर रतन सिंह दानू, करम सिंह दानू, चरण सिंह बघरी, शेर सिंह दानू, गजेंद्र सिंह धामी, मधन सिंह धामी, रमा देवी, तारा धामी, मोहनी देवी आदि उपस्थित थे।