हल्द्वानी विजय शंखनाद रैलीः पुलिस बनाम कांग्रेस विवाद! सवाल- जब वाहन रोके ही नहीं गए तो वायरलेस पर ‘सभी गाड़ियां छोड़ने’ का मैसेज क्यों भेजना पड़ा? भाजपा के प्रदर्शन से और गरमाई सियासत
हल्द्वानी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की शनिवार को हल्द्वानी में आयोजित ‘विजय शंखनाद रैली’ से पहले हुए घटनाक्रम ने उत्तराखंड की सियासत को गरमा दिया है। रैली से पहले कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के एसएसपी कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करने के बाद अब भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। नैनीताल से लेकर हल्द्वानी और रामनगर तक भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस के समर्थन में प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को ‘ओछी राजनीति’ करार दिया। वहीं कांग्रेस ने पुलिस पर रैली में आने वाले कार्यकर्ताओं और वाहनों को रोकने का आरोप लगाते हुए एसएसपी मंजूनाथ टीसी के खिलाफ नाराजगी जताई। इस पूरे घटनाक्रम के बीच नैनीताल पुलिस की ओर से सोशल मीडिया पर जारी स्पष्टीकरण ने विवाद को और तूल दे दिया है। पुलिस ने कांग्रेस के आरोपों को मनगढ़ंत, निराधार और तथ्यहीन बताया है। दरअसल, शनिवार को खड़गे की रैली से पहले उस समय माहौल गरमा गया, जब कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एसएसपी कार्यालय पहुंच गए। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि पुलिस रैली में आने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं और लोगों के वाहनों को रोक रही है। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नैनीताल एसएसपी मंजूनाथ टीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कार्यालय परिसर में ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर एसपी क्राइम जगदीश चंद्र पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और कांग्रेस नेताओं को समझाने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों की ओर से बताया गया कि वीआईपी कार्यक्रम को देखते हुए रूटीन चेकिंग और सुरक्षा व्यवस्था के तहत वाहनों की जांच की जा रही थी। हालांकि, कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि रैली में पहुंचने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से रोका जा रहा था।
वायरलेस पर ‘सभी गाड़ियां छोड़ने’ की बात से उठे सवाल
विरोध प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे एसपी क्राइम जगदीश चंद्र द्वारा वायरलेस सेट पर सभी गाड़ियों को छोड़ने की बात कहे जाने का मामला भी अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस का कहना है कि यदि वाहनों को रोका ही नहीं जा रहा था तो एसपी क्राइम को वायरलेस पर सभी वाहनों को छोड़ने का निर्देश देने की आवश्यकता क्यों पड़ी। इसके बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता रैली स्थल तक पहुंचे। घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने पुलिस की कार्रवाई और एसएसपी की भूमिका पर सवाल उठाए।
भाजपा ने कई जगह किया प्रदर्शन
कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के जवाब में भाजपा ने भी मोर्चा खोल दिया। देर शाम नैनीताल में विधायक सरिता आर्या के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। हल्द्वानी, रामनगर सहित अन्य स्थानों पर भी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस के समर्थन में आवाज उठाई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस रैली में पर्याप्त भीड़ नहीं जुटा सकी और अपनी राजनीतिक कमजोरी का ठीकरा पुलिस पर फोड़ने का प्रयास कर रही है। भाजपा की ओर से कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया गया। नैनीताल में प्रदर्शन के दौरान विधायक सरिता आर्या ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस भीड़ नहीं जुटा पाई और इसका दोष पुलिस पर डाल दिया।
‘रैली में उमड़ी भीड़ फिर किसे नहीं दिखी?’
भाजपा के आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर भी इस घटनाक्रम को लेकर बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि हल्द्वानी में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। ऐसे में भाजपा द्वारा भीड़ नहीं जुटने का दावा सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया पर लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि यदि रैली में भीड़ नहीं थी तो फिर भाजपा को प्रदर्शन करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दिख रही तस्वीरें सभा में उमड़ी भीड़ की गवाह हैं, जबकि भाजपा को ये तस्वीरें और सभा में उमड़ी भीड़ की वीडियो नहीं दिखी। लोग दबी जुबान से बोल रहे हैं कि क्या भाजपाईयों को हल्द्वानी शंखनाद रैली में उमड़ी भीड़ नहीं दिखी या फिर भीड़ देखकर भाजपाई घबरा गए हैं और पुलिस के समर्थन की आड़ में अपनी खींच निकाल रहे हैं।
नैनीताल पुलिस ने जारी किया स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने के बाद शनिवार देर रात नैनीताल पुलिस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से पूरे घटनाक्रम को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया। पुलिस के अनुसार कांग्रेस की रैली को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पहले से तैयार की गई थी। पुलिस का कहना है कि एसपी ट्रैफिक/क्राइम, संबंधित थाना प्रभारी और वरिष्ठ अधिकारियों ने कांग्रेस के जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ पहले ही बैठक की थी। इस बैठक में रूट प्लान, डायवर्जन प्लान, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, पुलिस बल की तैनाती, वीआईपी सुरक्षा और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी दी गई थी। पुलिस के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न भ्रम और असमंजस की स्थिति आयोजकों की ओर से आपसी समन्वय तथा कार्यक्रम से संबंधित आवश्यक जानकारी के समुचित प्रचार-प्रसार में कमी के कारण पैदा हुई। पुलिस ने यह भी कहा कि गणमान्य व्यक्तियों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए अपेक्षित एंट्री आईडी की व्यवस्था नहीं होने से कुछ स्थानों पर असमंजस हुआ। नैनीताल पुलिस ने कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस पर लगाए जा रहे आरोप मनगढ़ंत, निराधार और तथ्यहीन हैं। पुलिस के अनुसार उसकी ओर से सुरक्षा और यातायात से संबंधित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार की गई थीं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका दायित्व निष्पक्ष रूप से कानून-व्यवस्था, यातायात और जनसुरक्षा सुनिश्चित करना है। व्यक्तिगत टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देना पुलिस के कार्यक्षेत्र और आचार संहिता के अनुरूप नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। कांग्रेस जहां पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा पुलिस के समर्थन में उतरकर कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक स्टंट बता रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पुलिस और कांग्रेस पदाधिकारियों के बीच रैली से पहले रूट, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैठक हो चुकी थी, तो कार्यक्रम के दौरान वाहनों को लेकर असमंजस की स्थिति क्यों बनी? और यदि वाहनों को रोका नहीं गया था तो मौके पर एसपी क्राइम को वायरलेस के जरिए सभी गाड़ियों को छोड़ने की बात क्यों कहनी पड़ी? फिलहाल खड़गे की रैली से पहले शुरू हुआ पुलिस-कांग्रेस विवाद रैली खत्म होने के बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा के प्रदर्शन और कांग्रेस के आरोपों ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है।