बड़ी खबरः रांची में छात्र आंदोलन के बीच JPSC के तीन सदस्यों ने दिया इस्तीफा! पांच घंटे की वार्ता भी बेनतीजा, सोमवार को विधानसभा घेराव का ऐलान

Big News: Three JPSC members resign amidst student protests in Ranchi! Five-hour talks yield no result; announcement made to lay siege to the Legislative Assembly on Monday.

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में तीन सदस्यों के इस्तीफे और छात्र संगठनों के आंदोलन के बीच प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। छात्र संगठनों की ओर से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच JPSC के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तीनों सदस्यों ने अपना इस्तीफा राज्यपाल संतोष गंगवार को भेजा था, जिसे राज्यपाल ने मंजूर कर लिया है। JPSC में एक साथ तीन सदस्यों के पद छोड़ने के बाद आयोग की आगे की कार्यप्रणाली और रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पर भी नजरें टिक गई हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब राज्य में छात्र संगठन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच लंबे समय तक बातचीत के बावजूद कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में तीन JPSC सदस्यों के इस्तीफे ने पहले से चल रहे छात्र आंदोलन को और महत्वपूर्ण बना दिया है। छात्र आंदोलन को समाप्त कराने और उनकी मांगों पर सहमति बनाने के लिए छात्र संगठनों तथा सरकार के प्रतिनिधियों के बीच पांच घंटे से अधिक समय तक बैठक चली। इस दौरान सभी छात्र संगठनों के साथ तीन दौर में बातचीत की गई। सरकार की ओर से दावा किया गया कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों को मान लिया गया है, लेकिन छात्र संगठनों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मांगों पर अभी तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। छात्र नेताओं के मुताबिक केवल कुछ परीक्षाओं को लेकर निर्णय लेना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी एक परीक्षा को रद्द कराना भर नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है। सरकार की ओर से 14वीं JPSC PT (Regular & Backlog) परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा ACF परीक्षा को रद्द करने की बात कही गई है। हालांकि, छात्र संगठनों का कहना है कि उनकी मांगें इससे कहीं व्यापक हैं। छात्रों की ओर से अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है। छात्रों का कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

सरकार ने किन मांगों पर जताई सहमति?
बैठक के बाद सरकार की ओर से जिन बिंदुओं पर सहमति या कार्रवाई की बात कही गई है, उनमें 14वीं JPSC PT परीक्षा को रद्द करना, ACF परीक्षा को रद्द करना और FRO परीक्षा की जांच शामिल है। सरकार के अनुसार FRO परीक्षा की जांच में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो परीक्षा रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा TDPL Agency की ओर से कराई गई भर्ती परीक्षाओं की भी जांच कराने की बात कही गई है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित परीक्षा को रद्द करने का विकल्प खुला रखा गया है। वहीं JSSC CGL की दोबारा जांच कराने और गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही गई है। सरकार ने JSSC Reforms को लेकर भी सहमति जताई है। हालांकि, छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल CBI जांच को लेकर सहमति नहीं बन पाई। सरकार की ओर से कहा गया है कि CID जांच के दौरान यदि वित्तीय घोटाले से संबंधित कोई मामला सामने आता है तो ED से जांच कराने के लिए तैयार है। छात्र संगठनों की ओर से कथित परीक्षा गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। छात्र CBI जांच की मांग पर जोर दे रहे हैं, जबकि सरकार इस पर सहमत नहीं हुई है। यही मुद्दा बातचीत के दौरान भी प्रमुख विवादों में रहा। सरकार का कहना है कि CID जांच के दौरान यदि वित्तीय अनियमितता या घोटाले से जुड़ा कोई मामला सामने आता है तो उस हिस्से की जांच ED से कराई जा सकती है। लेकिन छात्र संगठन इसे अपनी मांगों का पूर्ण समाधान नहीं मान रहे हैं।

वार्ता विफल, छात्रों ने आंदोलन तेज करने का किया ऐलान
सरकार और छात्र संगठनों के बीच लंबी बातचीत के बावजूद पूरी सहमति नहीं बनने के बाद छात्रों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है। छात्र संगठनों ने सोमवार सुबह 9:30 बजे विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। इसके लिए बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी बाकी मांगों पर ठोस और स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। छात्र संगठनों ने सरकार से परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई है। फिलहाल एक तरफ सरकार 98 प्रतिशत मांगें मानने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ छात्र संगठन इसे अधूरा समाधान बता रहे हैं। JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे और सोमवार को प्रस्तावित विधानसभा घेराव के कारण अब सरकार और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति और गंभीर होती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाता है और सरकार छात्रों की शेष मांगों पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।