एनडीए की महाबैठक से ठीक पहले नीतीश कुमार बीमार: सियासी हलकों में हलचल तेज, बैठक में जाने पर सस्पेंस

Nitish Kumar falls ill just before the mega NDA meeting: Stir in political circles, suspense over his attendance.

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी ड्रामा शुरू हो गया है। राजधानी पटना में आज होने जा रही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की हाई-प्रोफाइल महाबैठक से ठीक पहले जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अचानक बीमार पड़ने की खबर सामने आई है। इस खबर के बाद मुख्यमंत्री आवास से लेकर एनडीए खेमे तक हड़कंप मच गया है।

बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार को अचानक कमजोरी, चक्कर आने और ब्लड प्रेशर (बीपी) से जुड़ी शिकायत हुई है, जिसके तुरंत बाद डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके आवास पर पहुंची और उनके स्वास्थ्य की जांच कर रही है। हालांकि, उनके स्वास्थ्य को लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है। नीतीश कुमार की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा तुरंत उनके आवास पर पहुंचे। वहीं, दूसरी ओर एनडीए की इस महाबैठक के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नित्यानंद राय, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा जैसे कद्दावर नेता पहले ही पटना पहुंच चुके हैं। चर्चा तेज है कि नीतीश कुमार इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, नीतीश की अनुपस्थिति में दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव बैठक में पार्टी और सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। हालांकि, बांकीपुर उपचुनाव के मद्देनजर भाजपा हर हाल में चाहती है कि नीतीश कुमार इस बैठक का हिस्सा बनें ताकि गठबंधन में सब कुछ ठीक होने का संदेश दिया जा सके। बिहार की राजनीति को करीब से समझने वालों का मानना है कि नीतीश कुमार का ऐन मौके पर बीमार होना महज एक इत्तेफाक नहीं है। अतीत में भी जब-जब नीतीश कुमार गठबंधन सहयोगियों से नाराज हुए हैं, तब-तब उनके बीमार होने या चुप्पी साधने की खबरें सुर्खियां बनी हैं। जब वे एनडीए से बाहर थे, तब भी बार-बार उनके बीमार होने पर तत्कालीन विपक्षी दल (भाजपा) ने मेडिकल बुलेटिन की मांग की थी। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के वक्त भी उनकी बीमारी की अफवाहें उड़ी थीं, लेकिन उन्होंने पूरी ताकत से चुनाव प्रचार कर सबको चौंका दिया था। सूत्रों का दावा है कि जून के अंत से ही भाजपा और जदयू के बीच सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। इस 'अचानक आई बीमारी' के पीछे निम्नलिखित तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं।  जेडीयू कोटे के मंत्रियों द्वारा अपने विभागों में किए गए अधिकारियों के ट्रांसफर पर ऐन वक्त पर रोक लगा दी गई। कहा जा रहा है कि जदयू कोटे के मंत्री स्वतंत्रता से काम नहीं कर पा रहे हैं, जिससे नीतीश कुमार असहज हैं। इस हाई-प्रोफाइल पुलिस एनकाउंटर मामले में भाजपा और जदयू का स्टैंड पूरी तरह अलग-अलग है, जिसने दोनों दलों के बीच तल्खी को और बढ़ा दिया है। जदयू के भीतर नीतीश कुमार के पुराने और मूल समर्थकों में पार्टी के मौजूदा प्रभावशाली नेताओं के बढ़ते कद को लेकर गहरी नाराजगी है। अब देखना यह होगा कि डॉक्टरों की जांच के बाद क्या नीतीश कुमार इस महाबैठक में शामिल होकर इन तमाम सियासी कयासों पर विराम लगाते हैं, या फिर उनकी यह 'बीमारी' बिहार में किसी नए सियासी बवंडर का संकेत है।