कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश ने छीना किसानों के मुँह का निवाला, खेतों में बिछ गई तैयार गेहूँ की फसल
देवभूमि में पिछले दो दिनों से जारी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। जिस समय खेतों में सुनहरी चमक के साथ गेहूँ की फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी थी, ऐन उसी वक्त कुदरत के बदले मिजाज ने किसानों की महीनों की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया। नैनीताल जिले के मैदानी इलाकों से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों तक गेहूँ, सब्जी और फलों की खेती को भारी नुकसान पहुँचा है। जिले के गौलापार, बेलबाबा और पंचायत घर जैसे क्षेत्रों में कई काश्तकारों ने गेहूँ काटकर सुखाने के लिए खेतों में फैलाया था। मंगलवार से बुधवार तक हुई झमाझम बारिश ने इस कटी हुई फसल को पूरी तरह भिगो दिया है। किसानों का कहना है कि यदि एक-दो दिन धूप नहीं निकली तो गेहूँ में कालापन आ जाएगा और दाने खराब हो जाएंगे। वहीं, जो फसल अभी खड़ी थी, वह तेज हवाओं के झोंकों से जमीन पर बिछ गई है, जिससे उसकी कटाई अब और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
मुख्य कृषि अधिकारी रितु टम्टा के अनुसार, जिले में लगभग 15 से 30 प्रतिशत नुकसान का प्रारंभिक अनुमान है। हालांकि, धरातल पर स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर दिख रही है। काश्तकारों का दावा है कि उनकी 50 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है। नैनीताल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों— भीमताल, धारी, ओखलकांडा और रामगढ़ में ओलावृष्टि ने फलों (आड़ू, खुमानी, पुलम) के फूलों को झाड़ दिया है, जिससे इस बार फलों के उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। अजीब विरोधाभास यह है कि जहाँ इस बारिश ने गेहूँ की फसल को तबाह किया, वहीं रामनगर क्षेत्र में लीची और आम के बागवानों के लिए यह राहत बनकर आई है। उद्यान अधिकारी एएस परवाल के मुताबिक, बारिश से पेड़ों पर जमी धूल और गंदगी साफ हो गई है, जिससे कीटों और रोगों का खतरा कम हो गया है। रामनगर के 1100 हेक्टेयर लीची और 900 हेक्टेयर आम के बागों के लिए यह पानी 'अमृत' समान है, लेकिन यहीं के गेहूँ किसान आँसू बहाने को मजबूर हैं। जिलाधिकारी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कृषि और उद्यान विभाग की संयुक्त टीमों को गांवों में जाकर तत्काल सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' ली है, उन्हें नुकसान के 24 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचित करना अनिवार्य है। इसके बाद पटवारी और कृषि विभाग की रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। किसानों ने सरकार से मांग की है कि केवल कागजी सर्वे न हो, बल्कि धरातल पर आकर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों के सामने अब परिवार के भरण-पोषण और बैंक की किश्तें चुकाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।