पिथौरागढ़ में कुदरत का कहरः बारिश ने मचाई भारी तबाही! 20 सड़कें बंद, भूस्खलन से मकान क्षतिग्रस्त! मंजर देख सहम उठे ग्रामीण
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। भारी वर्षा के चलते जिले के कई हिस्सों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जबकि चीन सीमा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय मार्ग सहित जिले की 20 मोटर सड़कें मलबा आने से बंद हो गई हैं। मार्ग बंद होने से सैकड़ों यात्री और स्थानीय लोग विभिन्न स्थानों पर फंस गए हैं। वहीं, थल क्षेत्र के नायल सपोली गांव में भूस्खलन से एक मकान की दीवार ढह गई, जिससे गौशाला में बंधे मवेशी मलबे में दब गए। मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। जिले में गुरुवार रात से शुरू हुई भारी बारिश ने कई क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़ वर्षा दर्ज कराई। सबसे अधिक 199 मिलीमीटर बारिश थल तहसील में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा तेजम में 130 मिमी, बंगापानी में 110 मिमी, डीडीहाट में 84 मिमी, धारचूला में 54 मिमी, बेरीनाग में 50 मिमी, देवलथल में 41 मिमी, कनालीछीना में 36.4 मिमी, गणाई गंगोली में 20.5 मिमी, गंगोलीहाट में 18 मिमी, मुनस्यारी में 12.6 मिमी तथा जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ में 11.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण जिले के अनेक मोटर मार्गों पर पहाड़ियों से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिर गए हैं।
इससे धारचूला-तवाघाट, थल-मुनस्यारी, थल-डीडीहाट, उडियारीबैंड-थल, सातशिलिंग-थल, थल-पांखू, देवीसूना-खेतारकन्याल गराली, डीडीहाट-आदिचौरा खूना सहित कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं। इसके अलावा डीडीहाट-दूनाकोट, तवाघाट-ठानीधार, ड्योड़ा-बारमों, एलागाड़-जुम्मा, सोबला-उमचिया, कालिका-खुमती, बंगापानी-जारा जिबली, घट्टाबगड़-तांकुल, होकरा-नामिक, बांसबगड़-कोटा, नाचनी-भैंसकोट और डीडीहाट-आदिचौरा सीणी चामा मोटर मार्गों पर भी भारी मलबा आने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। भारी बारिश के दौरान थल.चौकोड़ी सड़क पर भी कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ, जिससे दर्जनों पेड़ सड़क पर गिर गए। विशाल पेड़ों के गिरने से कई स्थानों पर क्रैश बैरियर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों की टीमें पेड़ों को काटकर तथा मलबा हटाकर मार्ग खोलने में जुटी हुई हैं। बारिश का सबसे अधिक असर थल क्षेत्र के नायल सपोली गांव में देखने को मिला, जहां भूस्खलन के कारण स्थानीय निवासी नारायण राम के मकान की दीवार ढह गई। दीवार गिरने से गौशाला में बंधे मवेशी मलबे में दब गए। रातभर तेज बारिश के बीच परिवार के सदस्यों ने टॉर्च की रोशनी में पत्थर हटाकर घायल मवेशियों को बाहर निकाला। हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन मकान और पशुधन को नुकसान पहुंचा है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र सिंह महर ने बताया कि सभी प्रभावित सड़कों को जल्द से जल्द खोलने के लिए संबंधित विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं। जिन क्षेत्रों से नुकसान की सूचना मिली है, वहां राजस्व विभाग की टीमें भेजी गई हैं और क्षति का आकलन किया जा रहा है।