Aug 25, 2026 Login

नैनीताल:वीसी रावत को क्लीन चिट और छात्रा का चरित्र हनन ! एकतरफा प्रेस नोट और सीसीटीवी फुटेज का सवाल हुआ गायब !!

Nainital:A clean chit for VC Rawat and character assassination of the female student! A one-sided press note, while the question regarding CCTV footage has vanished!

नैनीताल : कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.दीवान सिंह रावत पर पूर्व  छात्रा के द्वारा लगाए गए संगीन आरोपों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है । कुछ दिनों पूर्व कुलपति दीवान सिंह रावत के खिलाफ यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा ने सीएम पोर्टल में कुलपति के खिलाफ अभद्र व्यवहार करने को लेकर शिकायत की थी । खबर का प्रकाशन होने के बाद यूनिवर्सिटी में अटकलों का बाजार गर्म हो गया । कुलपति की छवि को दुरुस्त करने के लिए उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष ने यूनिवर्सिटी में इस मामले को लेकर एक सभा का आयोजन करवाया जिसमें कुलपति के द्वारा छात्रा के साथ किए गए अभद्र व्यवहार को सही ठहराते हुए लगभग 500 से अधिक कर्मचारियों, शिक्षकों और छात्र छात्राओं ने सामूहिक तौर पर आरोप लगाने वाली पूर्व छात्रा का चरित्र हनन कर डाला और उस पर एफआईआर दर्ज़ करने की संस्तुति की ।  

मामले के अनुसार जियोलोजी विभाग की पूर्व छात्रा ने यूनिवर्सिटी द्वारा मार्क्स अपडेट न किए जाने की शिकायत सीएम पोर्टल पर करने के बाद कुमाऊँ यूनिवर्सिटी के उप परीक्षा नियंत्रक नन्दन सिंह बिष्ट के द्वारा दिये गए जवाब के अनुसार क्लोजिंग रिपोर्ट में छात्रा को प्रथम सेमेस्टर की आंतरिक परीक्षा में अनुपस्थित बताया गया है । दूसरी तरफ, RTI के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग ने 23 जुलाई 2026 को लिखित रूप से बताया है कि संबंधित पेपर के इंटरनल असेसमेंट के अंकों का विवरण यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक को चार बार भेजा गया था। विभाग के अनुसार ये अंक 24 अप्रैल 2023, 15 जुलाई 2023, 5 अप्रैल 2024 और 25 अप्रैल 2026 को भेजे गए। खास बात यह है कि 25 अप्रैल 2026 को अंक भेजे जाने की बात विश्वविद्यालय की खुद की क्लोजिंग रिपोर्ट में भी दर्ज है। बावजूद इसके यूनिवर्सिटी ने छात्रा के मार्क्स अपडेट नहीं किए जिससे उसकी फ़र्स्ट की जगह सेकेंड डिवीजन बन गयी ।

जब इस मामले को लेकर प्रेस कोन्फ्रेंस में कुलपति दीवान सिंह रावत से सवाल किया गया तो उन्होने मीडिया को बताया कि जब छात्रा उनके पास आई थी तब छात्रा के पास रिप्रेजेंटेशन की कॉपी तक नहीं थी और न ही उसने दिसंबर 2023 में आयोजित समाधान पखवाड़े में मार्क्स को लेकर शिकायत की थी । कुलपति रावत के अनुसार छात्रा से सवाल करने पर वो भावुक होकर रोने लगी। इसके बाद उन्होंने मौके पर मौजूद अपने पीए और डिप्टी कंट्रोलर से मामले की जानकारी ली । डिप्टी कंट्रोलर ने बताया कि छात्रा का मामला वर्ष 2025 में परीक्षा समिति के समक्ष रखा गया जिसे परीक्षा समिति ने खारिज कर दिया था।

छात्रा के अनुसार कुमाऊँ यूनिवर्सिटी ने उन्हें बहुत चक्कर कटवाए लेकिन मार्क्स दर्ज़ नहीं किए जिसकी शिकायत लेकर वो पहले डॉ. महेंद्र सिंह राणा के पास गयी जिनके परीक्षा नियंत्रक होते हुए डिपार्टमेन्ट नें तीन बार मार्क्स यूनिवर्सिटी को भेजे थे डॉ. राणा ने अपनी नाकामी छुपने के लिए सारा ठीकरा परीक्षा समिति पर फोड़ते हुए पल्ला झाड लिया । जिसके बाद छात्रा कुलपति कार्यालय पहुंची जहां कथित तौर पर कुलपति दीवान सिंह रावत ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और छात्रा को पैनिक अटैक आ गया । छात्रा किसी तरह कुलपति रावत की शिकायत करने मल्लीताल कोतवाली पहुंची लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज़ नहीं की की जिसके बाद छात्रा ने सीएम पोर्टल पर शिकायत की और मामला नैनीताल एसएसपी कार्यालय से फिर मल्लीताल कोतवाली पहुँच गया और पुलिस ने 22 जुलाई को शाम 7 बजे छात्रा के बयान दर्ज़ किए ।

आवाज़ इंडिया समाचार पत्र,डिजिटल न्यूज़ चैनल और तमाम वेब पोर्टलों में खबर का प्रकाशन होने के बाद कुलपति दीवान सिंह रावत की छवि सुधारने के लिए कुमाऊँ यूनिवर्सिटी के कैंपस में उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष डॉ लक्ष्मण सिंह रौतेला के द्वारा बैठक कराने को लेकर एक पत्र जारी किया गया । जिसके क्रम में सोमवार को कुलपति दीवान सिंह रावत की मौजूदगी में कर्मचारी महासंघ के सदस्यों छात्र संघ और शिक्षक गणों ने एक सुर में छात्रा और संबन्धित समाचार पत्रों न्यूज़ पोर्टलों पर एफआईआर दर्ज़ करने की मांग की ।

आपको बता दें आवाज़ इंडिया समाचार पत्र और इससे संबन्धित अन्य वेब पोर्टलों और डिजिटल न्यूज़ चैनलों ने पूर्व छात्रा के द्वारा दिये गए बयान, कुलपति रावत से पूछे गए सवाल,आरटीआई से उपलब्ध जानकारी और छात्रा की अंक तालिकाओं को आधार बनाकर खबर का प्रकाशन किया था । लेकिन आज सोमवार को  हुई बैठक में प्रतिभाग कर रहे यूनिवर्सिटी के तमाम काबिल कर्मचारी और कुलपति दीवान सिंह रावत के चाहने वालों ने बिना पीड़ित छात्रा का पक्ष जाने बगैर एक सुर में चरित्र हनन कर डाला । जबकि छात्रा के द्वारा कुमायूं यूनिवर्सिटी के कुछ कर्मचारी और कुलपति दीवान सिंह रावत पर आरोप लगाए गए थे जिसे कुलपति रावत ने बड़ी ही खूबसूरती से, इसे कुमाऊँ यूनिवर्सिटी की गरिमा का प्रश्न बना दिया ।

एक छात्रा के द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता जाने बगैर सभी महान हस्तियाँ कुमाऊँ यूनिवर्सिटी की गरिमा को बचाने के लिए छात्रा को दोषी साबित करने में लग गयी और कुलपति दीवान सिंह रावत को निर्दोष बताते हुए बाईज्जत बरी कर दिया क्योंकि शायद इन सभी का मानना है कि इससे पहले कुमाऊँ यूनिवर्सिटी का कोई अस्तित्व ही नहीं था और इस तरह के आरोप भी पहली बार लग रहे हैं जिससे कुमाऊँ यूनिवर्सिटी की गरिमा और प्रतिष्ठा में चोट पहुँच रही है । जब कुलपति दीवान सिंह रावत के चरण कमल कुमाऊँ यूनिवर्सिटी में पड़े तब से मानों यूनिवर्सिटी धन्य हो गयी हालांकि वो बात और है कि कुलपति दीवान सिंह रावत खुद इसी यूनिवर्सिटी से पढें हैं । प्रो. दीवान सिंह रावत के कुलपति बनने के बाद काफी अच्छे कार्य यूनिवर्सिटी में हुए है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि कुलपति दीवान सिंह रावत पर छात्रा द्वारा लगाए गए सभी आरोप फर्जी हैं ।  

कुलपति दीवान सिंह रावत की छवि सुधारने और कुमाऊँ यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा को बनाए रखने का हवाला देकर कुमाऊँ यूनिवर्सिटी से जारी प्रेस नोट के आधार पर परिसर निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा, प्रो. संजय पंत, प्रो. एचसीएस बिष्ट, प्रो. सावित्री कैड़ा, प्रो. एसएस बर्गली, प्रो. सुची बिष्ट, बीएसएसवी के प्रधानाचार्य बीएस मेहता, कार्यपरिषद् सदस्य अरविंद पड़ियार, अधिवक्ता केवल सती, आनंद रावत, भूपाल सिंह करायत, नंदा बल्लभ पालीवाल, छात्र महासंघ अध्यक्ष आशीष कबडवाल, उपाध्यक्ष रक्षित बिष्ट आदि ने पीड़ित छात्रा के सभी आरोपों को ऐसे खारिज कर दिया जैसे कि ये सभी महानुभाव उस वक़्त कुलपति रावत और छात्रा के साथ कुलपति कार्यालय में ही मौजूद थे ।

छात्रा ने कुलपति दीवान सिंह रावत को खुला चैलेंज दिया है कि अगर उसके द्वारा लगाए गए आरोप झूठे है तो कुलपति रावत को कार्यालय की सीसीटीवी रिकार्डिंग सार्वजनिक कर देनी चाहिए ताकि सभी को सच और झूठ का पता चल सके । कुमाऊँ यूनिवर्सिटी में बैठक 11 बजे शुरू हुई जहां कई पत्रकार कुलपति दीवान सिंह रावत का बयान लेने के लिए इंतजार कर रहे थे लेकिन 4 घंटे बीतने के बाद भी पत्रकारों के सवालों का जवाब देने कि बजाय कुलपति महोदय पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ कार्यालय से प्रस्थान कर गए । कुछ पत्रकारों ने आवाज़ लगाकर बयान लेने का निवेदन किया लेकिन कुलपति रावत ने पत्रकारों को अनसुना कर दिया । कुछ ही घंटों में कुमाऊँ यूनिवर्सिटी ने एकतरफा प्रेस नोट जारी किया जिसमें आरोप लगाने वाली छात्रा,खबर का प्रकाशन करने वाली मीडिया पर कार्रवाही की बात की है और इस  पूरे मामले को लेकर निष्पक्ष जांच करने की भी बात कही है ।

जैसा कि कुमाऊँ यूनिवर्सिटी की बैठक में कुलपति की उपलब्धियों  पर एक लंबा चौड़ा व्याख्यान हुआ लेकिन कुलपति रावत के द्वारा की जा रही अनियमितताओं पर कोई जिक्र तक नहीं हुआ । यहाँ तक छात्र के द्वारा मांगी जा रहाई सीसीटीवी फुटेज को तक सभी ने नज़रअंदाज़ कर दिया । कुलपति दीवान सिंह रावत की शैक्षिक योग्यता भी उच्च श्रेणी की है इसलिए ये बिलकुल नहीं माना जा सकता कि कुलपति रावत अपने कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज नष्ट करेंगे और सीसीटीवी को खराब दिखाने के लिए कुछ न कुछ निर्माण कार्य करने का या फिर अन्य बहाना करेंगे । अगर कुलपति दीवान सिंह रावत वास्तव में जीनियस है तो जिस दिन छात्रा उनके कार्यालय में आई थी उसी दिन कुलपति दीवान सिंह रावत को सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर लेनी चाहिए थी क्योंकि उसी दिन मामला सीएम पोर्टल पर पहुँच चुका था । हमारा मानना है कि ऐसी गलती कुलपति के पद पर बैठा व्यक्ति नहीं कर सकता जब मामला इतना गंभीर है कि कुलपति साहब ने एक पीड़ित छात्रा के खिलाफ अन्य छात्र छात्राओं को ही खड़ा करते हुए राजनैतिक अखाड़े में तब्दील कर दिया  और अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को कुमाऊँ यूनिवर्सिटी कि प्रतिष्ठा के साथ जोड़ दिया । अगर भविष्य में जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज नष्ट करने या फिर किन्हीं कारणों से रिकार्डिंग बाधित होने का हवाला कुलपति कार्यालय से दिया जाता है तो छात्रा के द्वारा कुलपति रावत पर लगाए गए आरोपों को बल मिलेगा । आज हुई बैठक में इस रिकार्डिंग को लेकर एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं था जिसने कुलपति से सवाल पूछा हो कि छात्रा के द्वारा दिये गए चैलेंज को आप स्वीकार करते हुए आज इसी सभा में सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक कर दीजिये ताकि आरोप लगाने वाली छात्रा की सच्चाई मीडिया के साथ दुनिया देख सके लेकिन ऐसा नहीं हुआ ।

सन 1973 में बनी कुमाऊँ यूनिवर्सिटी जिसका एक लंबा और सफलता का इतिहास रहा है इसने यहाँ अनेक शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रतिष्ठित नागरिकों को तैयार किया है। आज भी कुमाऊँ विश्वविद्यालय उत्तराखंड की उच्च शिक्षा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और गौरवशाली संस्थान के रूप में अपनी पहचान रखता है। लेकिन आज ये पहली शर्मनाक घटना है जहां एक छात्रा का पक्ष जाने बिना कुलपति दीवान सिंह रावत पर लगे आरोपों को कुमायूं यूनिवर्सिटी का मामल बनाते हुए यूनिवर्सिटी से जुड़े सभी कर्मचारियों, शिक्षकगणों और अन्य महानुभावों ने कुलपति दीवान सिंह रावत को क्लीन चिट देने के लिए उत्तराखंड मूल एक बेटी को झूठा साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी  है ।