नैनीताल:काशीपुर किसान आत्महत्या मामले में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक बढ़ाई,SIT जांच पर मांगा जवाब
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने काशीपुर के किसान आत्महत्या मामले में दर्ज मुकदमों को निरस्त करने और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से जुड़ी कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।
सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को मिली गिरफ्तारी से अंतरिम राहत को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार को अब तक की जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा दाखिल शपथपत्र पर याचिकाकर्ता अपना जवाब प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में चार्जशीट तैयार की जा चुकी है और कुल 12 लोगों को नामजद किया गया है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को इस संबंध में एक अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए।
इससे पहले अदालत ने याचिकाकर्ताओं को जांच में सहयोग करने के निर्देश देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। राज्य सरकार ने भी कोर्ट को अवगत कराया कि अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी मॉनिटरिंग स्वयं डीजीपी स्तर से की जा रही है और जांच एसआईटी को सौंपी गई है, हालांकि जांच की प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में ही बताई गई।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसमें काशीपुर निवासी सुखवंत सिंह ने हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने फेसबुक लाइव के माध्यम से कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
सुखवंत सिंह ने आरोप लगाया था कि जमीन के सौदे में उनके साथ धोखाधड़ी हुई और उनसे करीब 4 करोड़ रुपये ठग लिए गए। उन्होंने यह भी कहा था कि पुलिस से कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि उन्हें डराया-धमकाया गया।
घटना के बाद पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर आईटीआई थाने में 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया।
वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उनका कहना है कि यह मामला दो पक्षों के बीच जमीन विवाद से जुड़ा है, इसलिए दर्ज मुकदमे को निरस्त किया जाए और गिरफ्तारी पर रोक जारी रखी जाए।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी, जिसमें कोर्ट राज्य सरकार से जांच की विस्तृत स्थिति पर जवाब मांगेगा