नैनीताल:सवाल बहते सीवर के अपडेट का था,जवाब कुंठा ने दिया!वीडियो बना रहे व्यापार मंडल अध्यक्ष से कथित अभद्रता ने खड़ा किया नया विवाद
नैनीताल में तल्लीताल के फांसी गधेरे में सीवर ओवरफ्लो का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब एक नया विवाद सामने आ गया है। सीवर समस्या को लेकर लगातार आवाज उठा रहे माँ नयना देवी नैनीताल व्यापार मंडल के संस्थापक अध्यक्ष पुनीत टंडन ने एक जूनियर इंजीनियर (JE) पर अभद्र व्यवहार और वीडियो बनाने से रोकने का आरोप लगाया है।
पुनीत टंडन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शुक्रवार सुबह लगभग 7:45 बजे वह फांसी गधेरे क्षेत्र में चल रहे कार्यों का एक सकारात्मक अपडेट वीडियो बना रहे थे। वीडियो बनाते हुए पुनीत कह रहे थे कि काम तो काफी तेजी से हो रहा है,पर आराम की भी जरूरत होती है। उनका दावा है कि इसी दौरान स्वयं को JE बताने वाले एक अधिकारी ने उनके पास आकर पहले उनकी पहचान पूछी और फिर वीडियो बनाने पर आपत्ति जताई। आरोप है कि अधिकारी ने उन्हें "अपने रास्ते चलने" तक की बात कही और उनका व्यवहार एक जिम्मेदार अधिकारी के अनुरूप नहीं था।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से फांसी गधेरे में सीवर ओवरफ्लो का मामला लगातार सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कुमाऊँ कमिश्नर ने भी मामले का संज्ञान लिया था। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब कोई नागरिक या सामाजिक संगठन सार्वजनिक समस्या को उजागर कर रहा हो, तब उसका स्वागत होना चाहिए या उसे हतोत्साहित किया जाना चाहिए?
पुनीत टंडन का कहना है कि संबंधित अधिकारी ने यह भी कहा कि वह चार रातों से सोए नहीं हैं। यदि वास्तव में ऐसा है तो यह विभागीय कार्यप्रणाली और मानव संसाधन प्रबंधन पर भी सवाल खड़ा करता है। लेकिन किसी अधिकारी की कार्यगत थकान या तनाव को आम नागरिकों अथवा जनप्रतिनिधि संगठनों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का आधार नहीं माना जा सकता,और न ही जनहित से जुड़े मामलों में अपडेट देने से रोका जा सकता है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति और एक अधिकारी के बीच हुए विवाद का नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। आखिर यदि एक व्यापारी संगठन का प्रतिनिधि और सार्वजनिक मुद्दों को उठा रहा नागरिक इस प्रकार के व्यवहार का आरोप लगा रहा है, तो आम लोगों के साथ अधिकारियों का रवैया कैसा होगा? यह सवाल अब शहर में चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
पुनीत टंडन ने कुमाऊँ कमिश्नर, जिलाधिकारी और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से पूरे प्रकरण की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि फांसी गधेरे में सीवर संकट से जुड़ा मामला पहले ही जनचर्चा का विषय बना हुआ है और अब अधिकारियों के व्यवहार पर उठ रहे सवालों ने प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
नैनीताल जैसे संवेदनशील और पर्यटन आधारित शहर में प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि वह न केवल समस्याओं का समाधान करे, बल्कि जनता की शिकायतों और सुझावों को भी गंभीरता तथा सम्मान के साथ सुने। फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाते हैं।