नैनीताल मर्डर केस: धर्म छिपाकर शादी, फिर हत्या – ऋषभ उर्फ ‘इमरान’ को उम्रकैद की सजा

Nainital murder case: Marriage under false pretenses, murder – Rishabh alias ‘Imran’ sentenced to life imprisonment

नैनीताल के जिला एवं सत्र न्यायालय ने बहुचर्चित दीक्षा हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी ऋषभ तिवारी उर्फ ‘इमरान’ को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही अदालत ने विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल को मृतका की माता को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?
प्रकरण के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर निवासी श्वेता शर्मा ने मल्लीताल कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 14 अगस्त को आरोपी ऋषभ तिवारी उर्फ ‘इमरान’, उसकी पत्नी दीक्षा और उनका मित्र अलमास नैनीताल घूमने आए थे। मल्लीताल के एक होटल में दो कमरे लिए गए।
16 अगस्त को जब परिजनों ने दीक्षा और अलमास के मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, तो दीक्षा ने फोन नहीं उठाया और आरोपी का मोबाइल स्विच ऑफ मिला। संदेह होने पर कमरे की जांच की गई, जहां दीक्षा नग्न अवस्था में मृत पाई गई। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।

जांच और कोर्ट में सुनवाई
पुलिस जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मामला अदालत में पहुंचा। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी सुशील कुमार शर्मा ने 17 गवाहों के बयान दर्ज कराए। घटनास्थल से बरामद डीवीआर को केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला, चंडीगढ़ भेजा गया, जिसे साक्ष्य के रूप में अदालत में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन ने अदालत को बताया कि आरोपी ने दीक्षा से अपना असली नाम और धर्म छिपाया था। हत्या के बाद वह मृतका के आभूषण और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी साथ ले गया।


निकाहनामा साबित करने की कोशिश नाकाम!
बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए गए, जिनमें एक काजी भी शामिल था, जिसने कथित निकाहनामे को वैध साबित करने की कोशिश की। हालांकि, सरकारी अधिवक्ताओं की जिरह में दस्तावेज को फर्जी सिद्ध कर दिया गया।

अदालत का फैसला
जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नैनीताल ने सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद गाजियाबाद निवासी ऋषभ तिवारी उर्फ ‘इमरान’ को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे आजीवन कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।