नैनीताल: सरकारी जमीन पर नेपाली मूल के लोगों द्वारा अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 4 हफ्ते में मांगा जवाब
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जे के मामले में सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अगली सुनवाई भी चार सप्ताह बाद तय की गई है।
याचिका में नैनीताल निवासी पवन जाटव ने आरोप लगाया है कि बीते कई वर्षों से नेपाल मूल के कुछ लोग नैनीताल शहर और आसपास के क्षेत्रों, विशेष रूप से ग्राम सभा खुरपाताल के तोक खाड़ी स्थित बजून चौराहे के पास सरकारी और नजूल भूमि पर अवैध कब्जा कर रहे हैं। याचिका के अनुसार करीब 25 परिवारों ने इन जमीनों पर आवासीय निर्माण भी कर लिया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि संबंधित लोगों ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की कोई वैध प्रक्रिया पूरी नहीं की, इसके बावजूद उन्होंने कथित रूप से आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कर लिए। इन दस्तावेजों के आधार पर वे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के साथ-साथ वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराकर पानी और बिजली के कनेक्शन भी प्राप्त कर चुके हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन और राज्य सरकार के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद याचिकाकर्ता को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि इस तरह की कथित अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए और जिन अधिकारियों ने नियमों के विरुद्ध दस्तावेज जारी किए हैं, उनके खिलाफ विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।