नैनीताल HC:दीपाली शर्मा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत,टर्मिनेशन आदेश रद्द कर सीनियॉरिटी सहित बहाली

Nainital HC: Deepali Sharma gets major relief from the High Court; termination order cancelled and reinstated with seniority.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार की सिविल जज दीपाली शर्मा को बड़ी राहत देते हुए उनके विरुद्ध पारित फुल कोर्ट रेजोल्यूशन (14 अक्टूबर 2020) और राज्य सरकार द्वारा जारी टर्मिनेशन आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि दीपाली शर्मा को सीनियारिटी सहित सेवा में बहाल किया जाए और यह माना जाए कि उन्हें कभी सेवा से हटाया ही नहीं गया था।
खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि सेवा से हटाए जाने के वर्ष से अब तक मिलने वाले समस्त लाभों का 50 प्रतिशत भुगतान उन्हें किया जाए, जबकि उनकी ज्येष्ठता (सीनियारिटी) पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की। 

आपको बता दें कि 2018 में एक बेनामी शिकायत के आधार पर शुरू की गई जांच और उसके बाद नवंबर 2020 में पारित फुल कोर्ट के प्रस्ताव को चुनौती दी गई थी। आरोप था कि दीपाली शर्मा ने एक नाबालिग लड़की को अपने पास रखकर घरेलू कार्य कराया, प्रताड़ित किया और शारीरिक चोट पहुंचाई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया और पाया कि जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इस मामले के मुख्य गवाह नाबालिग लड़की और उसके पिता ने अपने आरोपों से पीछे हटते हुए कहा कि दीपाली शर्मा ने बच्ची की उचित देखभाल की थी।
कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण तथ्य माना कि वर्ष 2018 में हरिद्वार की जज कॉलोनी में दी गई दबिश के संबंध में तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कोई विधिवत स्वीकृति रिकॉर्ड पर नहीं पाई गई। इसके अलावा, जज कॉलोनी में आसपास रहने वाले अन्य न्यायिक अधिकारियों द्वारा भी किसी प्रकार के दुर्व्यवहार की पुष्टि नहीं की गई और न ही कोई स्वतंत्र गवाह प्रस्तुत किया गया।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि दीपाली शर्मा पर लगाया गया आरोप नाबालिग को रखने या उससे घरेलू कार्य कराने से संबंधित नहीं था, बल्कि यह आरोप उत्तराखंड गवर्नमेंट सर्वेंट रूल्स, 2002 के तहत उनकी कार्यशैली और आचरण से जुड़ा हुआ था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियम 3 और उसकी उपधारा 4, जो बच्चों से घरेलू कार्य कराने से संबंधित है, उसके तहत दीपाली शर्मा पर कोई आरोप तय ही नहीं किया गया था।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने फुल कोर्ट रेजोल्यूशन और राज्य सरकार के टर्मिनेशन आदेश को क्वैश करते हुए दीपाली शर्मा को सेवा में पुनः बहाल करने का आदेश दिया।