नैनीताल बार चुनाव परिणाम: अरुण बिष्ट बने अध्यक्ष,कमल चिलवाल उपाध्यक्ष,संजय सुयाल सचिव,नीरज गोस्वामी संयुक्त सचिव निर्वाचित!

Nainital Bar Election Results: Arun Bisht Elected President; Kamal Chilwal, Vice President; Sanjay Suyal, Secretary; and Neeraj Goswami, Joint Secretary!

नैनीताल में जिला बार एसोसिएशन के चुनाव बुधवार को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गए। कड़े मुकाबले के बीच अध्यक्ष पद पर अरुण सिंह बिष्ट और सचिव पद पर संजय सुयाल ने जीत हासिल की, जबकि उपाध्यक्ष पद पर कमल चिलवाल ने शानदार बढ़त के साथ विजय दर्ज की।


चुनाव प्रक्रिया सुबह 10:30 बजे शुरू होकर दोपहर 3 बजे तक चली। इसके बाद मतगणना पूरी होने पर शाम करीब 5 बजे मुख्य चुनाव अधिकारी राजेश चंदोला ने परिणाम घोषित किए। बार एसोसिएशन में पंजीकृत 300 से अधिक अधिवक्ताओं में से कुल 257 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।


अध्यक्ष पद के मुकाबले में अरुण सिंह बिष्ट को 96 मत मिले। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी नीरज साह को 88 और हरिशंकर कंसल को 71 वोट मिले। सचिव पद पर संजय सुयाल ने 130 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की, जबकि अनिल सिंह बिष्ट को 124 मत मिले। उपाध्यक्ष पद पर कमल चिलवाल को 152 वोट मिले, जबकि प्रमोद तिवाड़ी 98 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।


चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सभी निर्वाचित पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। नवनिर्वाचित अध्यक्ष अरुण सिंह बिष्ट और सचिव संजय सुयाल ने कहा कि वे अधिवक्ताओं के हित और एसोसिएशन के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।
चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में मुख्य चुनाव अधिकारी राजेश चंदोला के साथ सह-निर्वाचन अधिकारी प्रमोद बहुगुणा, शंकर चौहान, मुकेश चंद्र, शिवांशु जोशी और बार क्लर्क आनंद कुमार का विशेष योगदान रहा।
वहीं, संयुक्त सचिव पद पर नीरज गोस्वामी सहित तारा आर्या, प्रेमा आर्या, निर्मल कुमार और मोहम्मद बिलाल को कार्यकारिणी सदस्य के रूप में निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। कार्यकारिणी के पांच पदों में से चार पर ही नामांकन होने के कारण चुनाव नहीं कराया गया, जबकि एक पद जिला न्यायाधीश की संस्तुति से भरा जाएगा।
हालांकि चुनाव के दौरान कुछ अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। जानकारी के अनुसार अप्रैल 2025 के बाद पंजीकृत अधिवक्ताओं और जिनके शुल्क बकाया थे, उन्हें मतदान की अनुमति नहीं दी गई। नियमों के तहत केवल निर्धारित अवधि में पंजीकृत और सभी देनदारियां पूरी करने वाले अधिवक्ताओं को ही मतदान का अधिकार मिला, जिससे कई वकील चुनाव प्रक्रिया से बाहर रह गए।