बड़ी खबरः नेपाल-चीन बॉर्डर पर कुदरत का कहर! प्रचंड बाढ़ में बहा विशाल कस्टम ऑफिस, 22 की मौत की खबर! 105 भारतीय समेत 400 लापता, यूपी-बिहार में भी अलर्ट
नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल-चीन सीमा पर स्थित केरुंग बॉर्डर के पास बाढ़ का पानी इतनी तेज रफ्तार से आया कि देखते ही देखते विशाल कस्टम ऑफिस की इमारत पानी की प्रचंड लहरों में बह गई। चीन की ओर से जारी किए गए सीसीटीवी वीडियो में बाढ़ की भयावहता साफ दिखाई दे रही है। वीडियो में कुछ ही सेकंड के भीतर कई मंजिला इमारत पानी के तेज बहाव में ढहती और बहती नजर आती है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भोटेकोशी नदी में अचानक बढ़े जलस्तर से नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन समेत कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। अब तक 22 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। शुरुआती रिकॉर्ड के अनुसार 105 भारतीयों समेत करीब 400 विदेशी पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, लापता लोगों का आंकड़ा अभी सत्यापन के दौर में है और राहत एवं बचाव अभियान जारी है। नेपाल-चीन सीमा के केरुंग बॉर्डर पर हुई तबाही का वीडियो सामने आने के बाद आपदा की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वीडियो में दिखाई देता है कि पानी का तेज बहाव अचानक सीमा क्षेत्र की ओर बढ़ता है। जैसे ही लोगों को खतरे का अंदाजा होता है, वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है और लोग सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगते हैं। लेकिन पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही सेकंड में कई मंजिला कस्टम ऑफिस उसकी चपेट में आ गया। देखते ही देखते इमारत का बड़ा हिस्सा पानी के साथ बह गया। बताया जा रहा है कि यह वही महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसके जरिए चीन से कंटेनर नेपाल पहुंचते हैं और मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्री भी इस रूट का इस्तेमाल करते हैं। बाढ़ के पानी के तेज बहाव ने करीब 40 किलोमीटर सड़क और 19 पुलों को भी नुकसान पहुंचाया है। कई वाहन और अन्य संपत्तियां भी पानी में बह गईं। सीमा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण राहत एवं बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं।
ऐसा लगा जैसे आसमान टूट पड़ा हो, अब तक 22 मौतों की पुष्टि
चीनी मीडिया में सामने आए प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से भी बाढ़ की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। कुछ लोगों ने बताया कि पानी इतनी अचानक और तेजी से आया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। एक प्रत्यक्षदर्शी ने स्थिति को इस तरह बताया कि ऐसा लग रहा था जैसे आसमान टूट पड़ा हो और धरती फट गई हो। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नदी का पानी देखते ही देखते रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में घुस गया। कई लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे, जबकि बड़ी संख्या में लोग और वाहन बाढ़ की चपेट में आ गए। नेपाल के बागमती प्रदेश पुलिस के मुताबिक रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में अब तक 22 मौतों की पुष्टि हुई है। वहीं, बाढ़ प्रभावित इलाकों से 65 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। इनमें रसुवा से 43, नुवाकोट से 19 और धादिंग से तीन लोग शामिल बताए गए हैं। हालांकि, बाढ़ से प्रभावित कई इलाकों में अभी राहत दल पूरी तरह नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाशी और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
400 यात्रियों के लापता होने की जानकारी, पीएम मोदी ने बालेंद्र शाह से की बात
नेपाल में बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चिंता विदेशी नागरिकों और पर्यटकों को लेकर है। पर्यटन और ट्रैवल कंपनियों से मिले शुरुआती रिकॉर्ड के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में 105 भारतीयों समेत करीब 400 यात्रियों के लापता होने की जानकारी मिली है। इन आंकड़ों का सत्यापन ट्रैवल एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन, गाइड और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक भी शामिल हो सकते हैं। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और बाढ़ में हुई जनहानि पर दुख जताया। प्रधानमंत्री ने नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता और राहत उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, भारत काठमांडू के लगातार संपर्क में है और नेपाल में हालात पर नजर रख रहा है। जरूरत के अनुसार नेपाल के लिए राहत सामग्री और मानवीय सहायता भेजने की तैयारी की जा रही है।
भारतीय नागरिकों के लिए दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
नेपाल में फंसे या प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। भारतीय नागरिक किसी भी तरह की सहायता और जरूरी जानकारी के लिए +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित भारतीय नागरिकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यूपी-बिहार में भी बढ़ी चिंता, नदियों के जलस्तर पर नजर
नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी प्रशासन अलर्ट हो गया है। नेपाल से आने वाले पानी के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में हुई तबाही को चिंताजनक बताते हुए महाराजगंज और कुशीनगर में प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए अधिकारियों को पहले से जरूरी तैयारियां पूरी रखने को कहा गया है। नेपाल से आने वाले पानी का असर बिहार में भी पड़ने की आशंका है। संभावित बाढ़ को देखते हुए राज्य के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं, ताकि अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से आगे निकाला जा सके। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात कर हालात की जानकारी दी और संभावित खतरे को लेकर चर्चा की। राज्य के कई जिलों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर और गोपालगंज समेत संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। बेतिया, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें भेजी गई हैं, जबकि एसडीआरएफ की टीमें पहले से ही तैयार रखी गई हैं।