उत्तराखंड में आज से 'मनरेगा' का अंत, लागू हुई विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना,अब साल में मिलेगा 125 दिन काम

MGNREGA ends in Uttarakhand today; 'Viksit Bharat Rural Employment Guarantee Scheme' implemented—125 days of work to be provided annually

देहरादून। उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की दिशा में आज से एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पुरानी 'मनरेगा' योजना को पूरी तरह बदल दिया गया है। इसके स्थान पर आज, 1 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में 'विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना' (वीबी जी राम जी) को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। इस नई और महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब प्रदेश के श्रमिकों को साल में कम से कम 125 दिन के अनिवार्य रोजगार की गारंटी मिलेगी, जो पूर्ववर्ती योजना से कहीं अधिक है। केंद्र सरकार द्वारा गत 11 मई को जारी की गई अधिसूचना के क्रम में उत्तराखंड सरकार ने भी मंगलवार को इस योजना का गजट नोटिफिकेशन जारी कर प्रशासनिक मुस्तैदी दिखा दी है। वीबी जी राम जी' योजना को केवल गड्ढे खोदने या सामान्य मजदूरी तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे बेहद व्यापक और बहुउद्देशीय बनाया गया है। नई नियमावली के तहत अब श्रमिकों से कुल 318 प्रकार के अलग-अलग कामकाज कराए जा सकेंगे। इसके तहत ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के साथ-साथ राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

उत्तराखंड की जल संपदा को सहेजने के लिए सबसे अधिक 107 प्रकार के जल संरक्षण कार्यों को शामिल किया गया है। ग्रामीण संपत्तियों के रखरखाव के लिए 97 प्रकार के कार्य तय किए गए हैं। गांवों के विकास के लिए 88 कार्य चिह्नित हैं, जिनमें से 52 कार्य पूरी तरह नए निर्माण के होंगे और 36 पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्शन) स्वरूप के होंगे। ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए प्रकृति आधारित 86 प्रकार के कार्य होंगे। उत्तराखंड जैसी संवेदनशील भौगोलिक स्थिति वाले राज्य के लिए इस योजना में एक बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है। अब आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के लिए भी इस योजना के बजट और श्रमिकों का उपयोग किया जा सकेगा। इसके तहत आपदा राहत से जुड़े 37 प्रकार के कार्यों को हरी झंडी दी गई है। इससे न केवल आपदा के समय त्वरित राहत मिलेगी, बल्कि प्रभावित ग्रामीणों को तुरंत स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध हो सकेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का दोहरा लाभ मिलेगा। पहला, श्रमिकों को साल में अधिक दिनों का रोजगार (125 दिन) मिलने से उनका पलायन रुकेगा। दूसरा, जल संरक्षण और आपदा राहत जैसे कार्यों से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। आज से योजना के लागू होते ही प्रदेश के सभी विकास खंडों (ब्लॉक्स) में नए दिशा-निर्देशों के तहत जॉब कार्ड धारकों को काम आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय इस योजना की मॉनिटरिंग सीधे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करेगा।