मुजफ्फरपुर में बड़ा खुलासा: एआई डीपफेक और हनीट्रैप के जाल में फंसे पटना के होटल कारोबारी, ब्लैकमेल कर ₹97 लाख वसूले
बिहार के मुजफ्फरपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और हनीट्रैप के खतरनाक गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे के साथ-साथ पूरे कारोबारी जगत को हिलाकर रख दिया है। पटना के एक रसूखदार होटल कारोबारी को पहले हनीट्रैप के जाल में फंसाया गया और फिर एआई डीपफेक' के जरिए उनकी फर्जी और आपत्तिजनक तस्वीरें-वीडियो तैयार कर एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई। समाज में बदनामी और प्रतिष्ठा धूमिल होने के डर से पीड़ित कारोबारी अपराधियों की हर शर्त मानते चले गए और अब तक उनसे 97 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली जा चुकी थी। हालांकि, आखिरी किस्त के दौरान कारोबारी की सूझबूझ और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से इस हाईटेक रैकेट का भंडाफोड़ हो गया।
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, ब्लैकमेलर्स ने इस बार कारोबारी से 20 लाख रुपये की और मांग की थी। पीड़ित कारोबारी ने इस बार चालाकी दिखाते हुए रुपयों के बैग में एक गुप्त जीपीएस ट्रैकर लगा दिया और अपराधियों के बताए ठिकाने अहियापुर थाना क्षेत्र में रकम पहुंचा दी। इसके तुरंत बाद कारोबारी ने पूरी घटना की गुप्त सूचना मुजफ्फरपुर पुलिस को दी। सूचना मिलते ही मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस की टीम ने जीपीएस ट्रैकर की लाइव लोकेशन को ट्रैक करते हुए अहियापुर थाना क्षेत्र के एक मकान पर अचानक छापेमारी की और अपराधियों के पास मौजूद पूरे 20 लाख रुपये रंगे हाथों बरामद कर लिए। पुलिस ने बताया कि इतनी बड़ी नकदी की बरामदगी को देखते हुए कानूनन इसकी सूचना तुरंत आयकर विभाग को दे दी गई है, ताकि रकम के वित्तीय स्रोतों की भी जांच की जा सके। सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया पुलिस इस पूरे हाईटेक ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट की गहनता से जांच कर रही है। सुरक्षा और गोपनीयता के कारणों से पीड़ित कारोबारी की पहचान को पूरी तरह गुप्त रखा गया है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस डिजिटल साजिश का ताना-बाना किस तरह बुना गया था। टाउन डीएसपी विनीता सिन्हा ने मामले की तकनीकी जांच के बाद बताया कि इस पूरे खेल के पीछे मुजफ्फरपुर के 'अभिषेक' नामक युवक और उसके शातिर साथियों का गिरोह सक्रिय है। पीड़ित कारोबारी की ओर से लिखित आवेदन प्राप्त कर लिया गया है और अहियापुर थाने में रंगदारी, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रारंभिक जांच में यह बात साफ हो गई है कि अपराधी इंटरनेट से तस्वीरें लेकर एआई टूल्स के जरिए उन्हें एडिट करते थे, ताकि वह पूरी तरह असली लगें और फिर पीड़ित को डराकर जबरन उगाही की जा सके। मुजफ्फरपुर पुलिस की विशेष टीमें अभिषेक और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं और इसके जाल में कई अन्य रसूखदार लोग भी फंसे हो सकते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि साइबर स्पेस या सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करने और अपनी तस्वीरें साझा करने में अत्यधिक सावधानी बरतें।