Good Morning India: जंग के 163 दिन,अब तक झुलस रहा पश्चिम एशिया,चीन पर भारत का पलटवार,मानसून सत्र का आखिरी दौर, आज संसद में पेश होंगे 4 अहम बिल,उत्तराखंड के उत्तरकाशी में महसूस किए गए भूकंप के झटके,लिंक में पढ़ें प्रमुख खबरें
नमस्कार दोस्तों, आवाज इंडिया अपना खास कॉलम 'गुड मॉर्निंग इंडिया' लेकर एकबार फिर आपके समक्ष हाजिर है। आईए शुरुआत करते हैं उन सुर्खियों के साथ,जो आज पूरे दिन चर्चा में रहने वाली हैं।
ट्रंप की बढ़ीं मुश्किलें: बिना परमाणु डील के जंग खत्म करने की तैयारी में अमेरिका, पर ईरान ने रख दीं सख्त शर्तें।
चीन पर भारत का पलटवार: अरुणाचल में 27 स्थानों के भारतीय नाम तय, तिलमिलाया ड्रैगन।
जंग के 163 दिन:अब तक झुलस रहा पश्चिम एशिया,नेतन्याहू ने ठुकराई ट्रंप की योजना।
हवा में मंडराया खतरा: फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के पायलट का डोप टेस्ट पॉजिटिव, कोलकाता में लेजर लाइट से बची मलयेशियाई उड़ान।
परीक्षा धांधली पर छात्रों का हल्ला बोल: आज झारखंड विधानसभा का घेराव, रांची में धारा 163 लागू, सुरक्षा कड़ी।
मानसून सत्र का आखिरी दौर: आज संसद में पेश होंगे 4 अहम बिल, परिसीमन की लड़ाई में डीएमके बनी किंगमेकर।
समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत: कोच्चि में आज से भारत-अमेरिका का संयुक्त युद्धाभ्यास, गोताखोर और बम निरोधक दस्ते दिखाएंगे दम।
शादी करने पर सरकार दे रही 5 लाख तक की मदद।
4200 करोड़ की लागत से बना कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे फिर धंसा: 10 जगहों पर धंसी सड़क,एनएचएआई की जांच में खुली पोल।
12-13 अगस्त की रात सजेगा ब्रह्मांड: आसमान में होगी उल्कापिंडों की बारिश, दिखेगा पर्सीड उल्कापात का अद्भुत नजारा।
असम में बाढ़ का भयावह तांडव: मरने वालों का आंकड़ा 100 पहुंचा, कई जिलों में जलप्रलय से तबाही।
उत्तराखंड में फिर सक्रिय हुआ मानसून: आज भारी बारिश का ऑरेंज अलर्टजारी, 4 जिलों में आफत के बादल, मौसम विभाग की चेतावनी।
सावन के दूसरे सोमवार पर हरिद्वार में आस्था का सैलाब: दक्षेश्वर महादेव में उमड़े श्रद्धालु, जयकारों से गूंजी धर्मनगरी।
उत्तराखंड भाजपा ने घोषित की नई प्रदेश कार्यसमिति, 178 नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी।
उत्तराखंड में भाजपा का 2027 चुनावी प्लान: मौजूदा विधायकों पर ही दांव, सीएम धामी को 25 सीटों से चुनाव लड़ने का न्योता
उत्तराखंड के किसानों की बढ़ेगी आय: 'एक मंडी-एक गांव' योजना की शुरुआत, गांव में ही मिलेगी बाजार की सुविधा
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में देर रात भूकंप के झटकों से फैली दहशत: 4.2 रही तीव्रता, घरों से बाहर भागे लोग
हेडलाइंस के बाद आइए अब रुख करते हैं आज की बड़ी खबरों की तरफ- वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशों में एक नई बड़ी अड़चन खड़ी हो गई है। परमाणु समझौते पर सहमति न बन पाने के कारण अब अमेरिकी प्रशासन बिना किसी नए परमाणु समझौते के ही इस संघर्ष को खत्म करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, तेहरान के कड़े रुख ने वॉशिंगटन के लिए इस युद्ध से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का रास्ता बेहद कठिन बना दिया है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी पिछले कई हफ्तों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को दोबारा बहाल करने की योजना बना रहे थे। अमेरिका की रणनीति थी कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुलवाकर इसे अपनी एक बड़ी उपलब्धि के रूप में दुनिया के सामने पेश किया जाए। जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता लगातार उलझती चली गई, तो अमेरिका का पूरा ध्यान इस जलमार्ग को मुक्त कराने पर केंद्रित हो गया। लेकिन अब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के बदले ऐसी कड़ी शर्तें रख दी हैं, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन के सामने बड़ा संकट पैदा कर दिया है। दुनिया भर के तेल और व्यापारिक जहाजों के लिए यह रास्ता बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। ईरान की इन नई शर्तों के कारण वॉशिंगटन के लिए बिना कोई बड़ा समझौता किए पीछे हटना राजनीतिक और रणनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत ने चीन के नैरेटिव दांव की हवा निकाल दी है। भारत द्वारा अरुणाचल के 27 स्थानों को मानक भारतीय नामों से चिह्नित करने के फैसले से चीन बुरी तरह बौखला गया है। चीन के सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ और वहां के विशेषज्ञों ने भारत के इस कदम पर अपनी खीझ जताते हुए इसे दोनों देशों के सुधरते रिश्तों के खिलाफ बताया है। चीनी विशेषज्ञों का दावा है कि भारत की यह एकतरफा कार्रवाई सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयासों को और अधिक जटिल बना सकती है। दरअसल, चीन साल 2017 से एक साजिश के तहत अरुणाचल के गांवों, पहाड़ियों और नदियों को मंदारिन (चीनी) भाषा में नए नाम देता आ रहा था। उसका मकसद दुनिया भर की मीडिया में अपने दिए नामों को प्रचलित कर क्षेत्र पर अपना दावा मजबूत करना था। लेकिन भारत के इस कड़े रुख ने चीन के इसी दांव को उसी पर उल्टा भारी कर दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया और आधिकारिक संदर्भों में भारत द्वारा तय किए गए मानक नामों का ही इस्तेमाल होगा, जिससे अरुणाचल प्रदेश को 'ज़ांगनान' बताने की चीन की पुरानी रट पूरी तरह खोखली साबित हो जाएगी। चीन ने इस कदम को रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का यह 'धोबीपाट' चीन के दुष्प्रचार का करारा जवाब है, जिसने ड्रैगन के प्रशासनिक और ऐतिहासिक दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
तेहरान। पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच जारी संघर्ष 163वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की उम्मीदें धमिल होती दिख रही हैं। गाजा में युद्धविराम के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश की गई 15-सूत्री योजना को इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खारिज कर दिया है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि जब तक हमास का पूरी तरह निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता, तब तक इस्राइली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। दूसरी ओर, हमास अमेरिका और मध्यस्थ देशों से इस्राइल पर दबाव बनाने की उम्मीद कर रहा है। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोलने के लिए ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम दौर में है। प्रस्तावित अंतरिम समझौते के तहत जहाजों को ईरान की तरफ से प्रवेश कर ओमान की तरफ से निकलने की अनुमति दी जा सकती है, वह भी बिना किसी टोल शुल्क के। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि बातचीत का मतलब रास्ता तुरंत खोलना नहीं है। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका को युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और अन्य विवादों को सुलझाना होगा। यमन में हूती विद्रोहियों के हमलों और अमेरिका को जमीन पर सेना न भेजने की ईरान की चेतावनी से क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
नई दिल्ली। विमानन क्षेत्र से सुरक्षा में गंभीर लापरवाही और खतरे के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। गत 4 अगस्त को थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान हवा के तेज झटकों (टर्बुलेंस) में फंसकर अचानक 300 फीट नीचे आ गई थी, जिसमें 17 लोग घायल हुए थे। दिल्ली लैंडिंग के बाद हुए डोप टेस्ट में विमान का पायलट-इन-कमांड साइकोएक्टिव (नशीले) पदार्थों के सेवन का दोषी पाया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, पुष्टि के लिए दूसरा टेस्ट कराया गया है। फिलहाल दोनों पायलटों को रोस्टर से हटा दिया गया है। नियमानुसार पहली बार पॉजिटिव पाए जाने पर पायलट को रिहैब सेंटर भेजा जाता है। दूसरी घटना कोलकाता हवाई अड्डे की है, जहाँ शनिवार रात कुआलालंपुर से आ रही मलयेशिया एयरलाइंस की उड़ान (MH-184) पर लैंडिंग के दौरान नीचे से तेज लेजर लाइट मारी गई। इससे पायलट का ध्यान भटक गया और उसे आसमान में ही चक्कर काटने पड़े। 159 यात्रियों से भरा विमान आखिर 5 मिनट की देरी से सुरक्षित लैंड हुआ। एयरपोर्ट निदेशक ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है। हवाई अड्डे के आसपास लेजर लाइट का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। अमेरिका में इस पर 30,000 डॉलर से अधिक का जुर्माना है, जबकि भारत में इसे लेकर कड़े प्रावधानों की जरूरत महसूस की जा रही है।
रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। सोमवार, 10 अगस्त को छात्रों द्वारा प्रस्तावित 'विधानसभा घेराव' प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी रांची में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं ने युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से जुटने की अपील की है। एक पत्रकार वार्ता में छात्र नेताओं ने राज्य सरकार के सीआईडी जांच के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए धांधली की निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की मांग की। छात्रों ने सरकार के उस दावे को भी झूठा बताया जिसमें 98% मांगें पूरी होने की बात कही गई थी। छात्र नेताओं के अनुसार, उठाए गए 13 परीक्षा विवादों में से सरकार ने महज 3 परीक्षाएं ही रद्द की हैं। छात्रों के उग्र प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए नए विधानसभा परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रांची जिला प्रशासन ने विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू कर दी है। इसके तहत किसी भी तरह के जुलूस, प्रदर्शन और 5 या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के अंतिम चार दिनों में राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। एक तरफ जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत अन्य मंत्री सोमवार को चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परिसीमन (संविधान संशोधन) विधेयक को लेकर सत्तापक्ष (NDA) और विपक्ष में आर-पार की जंग छिड़ गई है। सोमवार को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री अमित शाह 'केरल (नाम में बदलाव) विधेयक-2026' और 'राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक-2026' पेश करेंगे। इनके अलावा न्यायाधिकरण सुधार और खान एवं खनिज संशोधन विधेयक भी पेश होने हैं। संविधान संशोधन से जुड़े परिसीमन विधेयक को पास कराने के लिए सरकार को 350 से 360 सांसदों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है। एनडीए के पास वर्तमान में लगभग 326 सांसदों का समर्थन है, जबकि विपक्षी खेमा 189 के आसपास सिमट गया है। ऐसे में तटस्थ दिख रही एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके के 22 लोकसभा सदस्य सबसे अहम भूमिका में आ गए हैं।यदि डीएमके सरकार के पक्ष में आती है या वाकआउट करती है, तो एनडीए के लिए राह बेहद आसान हो जाएगी। यही वजह है कि सरकार और विपक्ष, दोनों ही दल डीएमके को साधने की हरसंभव कोशिश में जुटे हुए हैं।
कोच्चि। आतंकवाद, बारूदी सुरंगों और समुद्री खतरों से निपटने के लिए भारत और अमेरिका की नौसेनाएं आज यानी 10 अगस्त से कोच्चि में एक विशेष संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू कर रही हैं। केरल स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में आयोजित यह पांच दिवसीय अभ्यास 14 अगस्त तक चलेगा। यह दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आयोजित होने वाले विशेष बचाव और विस्फोटक ऑर्डनेंस डिस्पोजल अभ्यास का 8वां संस्करण है। भारत और अमेरिकी नौसेना के बीच इस तरह के द्विपक्षीय प्रशिक्षण की शुरुआत साल 2005 में हुई थी। 14 अगस्त तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों के नौसैनिक गोताखोर और बम निरोधक विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। अभ्यास के दौरान आधुनिक तकनीकों, बम निष्कासन के नए तरीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को साझा किया जाएगा। इसके अलावा, विषय विशेषज्ञों के बीच बैठकें, क्रॉस-ट्रेनिंग, अत्याधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन और वास्तविक युद्ध जैसे हालात से निपटने के लिए प्रैक्टिकल ट्रेनिंग आयोजित की जाएगी। इस विशेष कसरत का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाना और समुद्री सुरक्षा में पेशेवर सहयोग को मजबूत करना है। इससे दोनों देशों के विशेष बलों को एक-दूसरे की कार्यशैली और आधुनिक तकनीक को करीब से समझने का मौका मिलेगा।
नई दिल्ली। देश से जातिगत भेदभाव को खत्म करने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारें एक विशेष योजना चला रही हैं। इसके तहत अंतरजातीय विवाह करने वाले नवविवाहित जोड़ों को 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। शादी करने वाले जोड़े में से एक पक्ष अनुसूचित जाति से और दूसरा पक्ष गैर-अनुसूचित जाति (सामान्य या OBC वर्ग) से होना अनिवार्य है। यह दोनों ही जीवनसाथियों की पहली शादी होनी चाहिए। विवाह का पंजीकरण 'हिंदू विवाह अधिनियम, 1955' या 'विशेष विवाह अधिनियम' के तहत कानूनी रूप से दर्ज होना चाहिए। योजना का लाभ उठाने के लिए शादी के 1 साल के भीतर आवेदन करना जरूरी है। 1 साल बाद आवेदन मान्य नहीं होगा। केंद्र सरकार की ओर से 'डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन' के माध्यम से 'डॉ. अंबेडकर सामाजिक एकीकरण योजना' चलाई जाती है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसी राज्य सरकारें भी अपने समाज कल्याण विभागों के जरिए प्रोत्साहन राशि प्रदान करती हैं। योग्य अभ्यर्थी अपने संबंधित राज्य के समाज कल्याण विभाग या केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
लखनऊ। लापरवाही और खराब निर्माण गुणवत्ता के आरोपों से घिरे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की स्थिति बारिश के बाद फिर दयनीय हो गई है। रविवार को हुई बारिश के कारण असोहा और अचलगंज क्षेत्रों में एक्सप्रेसवे पर कम से कम दस स्थानों पर सड़क धंस गई, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। लगभग 4200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। बारिश के दौरान कई किलोमीटर के दायरे में जलभराव देखा गया और ड्रेनेज नालियां टूटने से पानी सड़क पर भर गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मरम्मत कार्य शुरू किया गया और सुरक्षा के मद्देनजर हल्के वाहनों की दो लेन बंद कर यातायात को डायवर्ट किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपांकर ने एक्सप्रेसवे का औचक निरीक्षण किया। सहरावां गांव के पास जब उन्होंने ड्रेनेज सिस्टम को परखने के लिए 500 लीटर पानी का टेस्ट किया, तो सात मिनट बाद भी पानी बाहर नहीं निकल सका। निर्माण कार्य की बदहाली और घटिया गुणवत्ता पर नाराजगी जताते हुए अधिकारी ने निर्माण एजेंसी 'पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड' के जिम्मेदारों को कड़ी फटकार लगाई। लगातार धंस रही सड़क और जलभराव से यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
नई दिल्ली। खगोल विज्ञान के प्रेमियों, फोटोग्राफरों और प्रकृति में रुचि रखने वालों के लिए अगस्त का महीना बेहद खास और अविस्मरणीय होने जा रहा है। 12 और 13 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि को अंतरिक्ष में एक ऐसी अद्भुत खगोलीय घटना घटने जा रही है, जो इंसानी आंखों को चकित कर देगी। इस रात दुनिया का सबसे प्रसिद्ध और भव्य 'पर्सीड उल्कापात' अपने चरम पर होगा। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान, नैनीताल के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान आसमान में प्रति घंटे 60 से 100 उल्कापिंड गिरते हुए दिखाई देंगे। ये टूटते तारे अंधेरे आकाश में रोशनी की लंबी और खूबसूरत लकीरें खींचते हुए किसी भव्य आतिशबाजी जैसे नजर आएंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वर्ष यह दृश्य पिछले कई दशकों की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट और अनोखा होगा। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उस रात अमावस्या के कारण चांद की रोशनी बिल्कुल नहीं होगी। पूरा आसमान एक गहरे काले कैनवास की तरह दिखेगा, जिससे छोटे और कम रोशनी वाले उल्कापिंड भी बेहद साफ और चमकते हुए दिखाई देंगे। इस अद्भुत 'आस्मानी शो' का असली रोमांच 12 अगस्त की आधी रात के बाद शुरू होगा। इस दुर्लभ नजारे को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी, इसे खुली आंखों से देखा जा सकेगा।
गुवाहाटी। असम में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में आई भीषण बाढ़ से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 100 तक पहुंच गई है। राज्य के कई जिले इस समय गंभीर जलप्रलय के संकट से जूझ रहे हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। डिजास्टर रिपोर्टिंग एंड इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, इस आपदा में अब तक 60 पुरुष, 23 महिलाएं और 18 बच्चे (12 लड़के और 6 लड़कियां) अपनी जान गंवा चुके हैं। असम के बड़े हिस्से पानी में डूब चुके हैं, जिससे लाखों लोग प्रभावित हैं और सड़कों व पुलों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों में दिन-रात राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। खाद्य सामग्री, पीने का पानी और चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। नदियों के बढ़ते जलस्तर और लगातार हो रहे कटान को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है।
आइए अब नज़र डालते हैं उत्तराखंड की ख़बरों पर-उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले में बीती देर रात करीब 1 बजकर 21 मिनट पर भूकंप के तेज झटकों से हड़कंप मच गया। यमुना घाटी से लेकर गंगा घाटी तक महसूस किए गए इन झटकों के कारण लोग दहशत में आ गए और घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 4.2 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई है। इसका केंद्र उत्तरकाशी जिले के बड़कोट तहसील मुख्यालय के पास राजगढ़ी क्षेत्र में जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था। राहत की बात यह रही कि इस खगोलीय हलचल से जिले में किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान या भवनों में दरार आने की खबर नहीं है। देर रात झटके महसूस होते ही कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर घंटों खुले आसमान के नीचे बिताए और अपनों का हालचाल जानने के लिए फोन मिलाते रहे। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी तहसीलों से लगातार जानकारी जुटाई जा रही है। अति-संवेदनशील जोन में आने के कारण उत्तरकाशी में आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रशासन ने आम जनता से पैनिक न करने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचित करने की अपील की है।
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ़्तार पकड़ ली है। मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, सोमवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत जिलों के कुछ इलाकों में अति-भारी बारिश की आशंका जताते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इसके अलावा उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर समेत राज्य के अन्य जिलों में बिजली कड़कने और तेज बारिश के दौर को लेकर 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन तथा नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि की संभावना को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्राओं से बचें और नदी-नालों के पास जाने से परहेज करें। आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
हरिद्वार। सावन मास के दूसरे पावन सोमवार के शुभ अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में असीम श्रद्धा और भक्ति का नजारा देखने को मिला। प्रसिद्ध सिद्धपीठ दक्षेश्वर महादेव मंदिर में अलसुबह से ही भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्तों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय शिव शंभू' के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान रहा। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने कतारों में लगकर भगवान शिव का पवित्र गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्पों से भव्य पूजन और जलाभिषेक किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का ससुराल स्थान माना जाता है। यही कारण है कि सावन के पवित्र महीने में यहां आकर महादेव की पूजा-अर्चना करने का विशेष और अक्षय फलदायी महत्व है। भक्तों की भारी भीड़ और लंबी कतारों को देखते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस बल द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन कराने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई थी। जलाभिषेक के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पुण्य लाभ भी कमाया।
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन को धार देना शुरू कर दिया है। चुनावी तैयारियों को मजबूती देने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के उद्देश्य से उत्तराखंड भाजपा ने अपनी बहुप्रतीक्षित प्रदेश कार्यसमिति का ऐलान कर दिया है। इस नई सूची में कुल 178 नेताओं को तीन अलग-अलग श्रेणियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पार्टी द्वारा जारी सूची के अनुसार, 121 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, 32 को विशेष आमंत्रित सदस्य और 25 नेताओं को स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। राज्य के 10 जिलों के नेताओं को जगह मिली है, हालांकि पौड़ी और चंपावत जिले से इसमें कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं है। यह सबसे बड़ी सूची है, जिसमें राज्य के सभी जिलों का संतुलन बनाते हुए व्यापक प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसमें प्रदेश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत मंत्रिमंडल के सदस्य, भाजपा सांसद और विधायक इस सूची का हिस्सा हैं। भाजपा की इस घोषणा को सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव से पहले क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए भाजपा ने सभी वर्ग व क्षेत्रों को साधने की कोशिश की है।
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। दिल्ली में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में शीर्ष नेतृत्व ने संकेत दिया है कि आगामी चुनावी जंग में पार्टी अपने मौजूदा विधायकों पर ही जीत का दांव लगाएगी। विधायकों को क्षेत्रों में सक्रिय रहकर 'डबल इंजन' सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने और अपनी राजनीतिक परीक्षा साबित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, टिकट का अंतिम आधार क्षेत्रीय सक्रियता, संगठन का फीडबैक और सर्वे रिपोर्ट ही बनेगी। पार्टी हारी हुई और कम अंतर से जीती सीटों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जनता और कार्यकर्ताओं में बढ़ती साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से उन्हें चुनाव लड़ने का आमंत्रण मिला है। अब तक लगभग 25 विधानसभा क्षेत्रों से CM धामी को अपनी सीट से चुनाव लड़ने का न्योता मिल चुका है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन सभी प्रस्तावों के बीच चंपावत विधानसभा क्षेत्र मुख्यमंत्री के लिए पहली पसंद बना हुआ है। चंपावत में हुए अभूतपूर्व विकास कार्य और वहां का मॉडल इसके मुख्य कारण हैं। वर्तमान में धामी यहीं से विधायक हैं, हालांकि अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व ही करेगा।
देहरादून। उत्तराखंड में कृषि को बढ़ावा देने और किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 'एक मंडी-एक गांव' योजना की शुरुआत की है। इस पहल के तहत राज्य की सभी 23 कृषि उत्पादन मंडी समितियां एक-एक गांव को गोद लेकर उन्हें 'मॉडल कृषि विपणन ग्राम' के रूप में विकसित करेंगी। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में बाजार की दूरी, सीमित भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में किसानों को अक्सर औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ती थी। इस योजना के जरिए किसानों को उनके गांव के पास ही विपणन (मार्केटिंग),भंडारण और प्रसंस्करण की आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। योजना में कृषि प्रधान गांवों, जैविक क्षेत्रों, एफपीओ और महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़े गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित गांवों को 3 साल के लिए गोद लिया जाएगा और 1 साल का विशेष विकास पैकेज दिया जाएगा। इसके तहत गांवों में मिनी कलेक्शन सेंटर, ग्रामीण हाट, कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग-पैकेजिंग यूनिट, इलेक्ट्रॉनिक्स कांटे और मिलेट-मसाला प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी। अब तक देहरादून, हल्द्वानी, रुद्रपुर, ऋषिकेश समेत 11 मंडी समितियां गांवों का चयन कर चुकी हैं, जबकि शेष समितियां चयन प्रक्रिया में जुटी हैं।
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