सारण में मनरेगा का बड़ा खेल! केंद्र की संयुक्त टीम की जांच में फूटा घपला,एफआईआर दर्ज,राशि रिकवरी और अधिकारियों पर जुर्माना

Major MGNREGA scam in Saran! Joint central team's probe exposes the fraud; FIR registered, funds to be recovered, and officials fined.

बिहार के सारण जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गरजे योजना (मनरेगा) में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारियों, कर्मियों और जनप्रतिनिधियों पर शिकंजा कसते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने, 3,21,703 रुपये की रिकवरी करने, जुर्माना लगाने और दो मेट का लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया गया है। इस कार्रवाई से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देश पर 13 जून 2026 को एमओआरडी और एनआईसी की संयुक्त टीम ने सारण जिले के सदर प्रखंड की मौना व लोहड़ी पंचायत तथा सोनपुर प्रखंड की नयागांव पंचायत में संचालित मनरेगा योजनाओं का औचक निरीक्षण किया था। टीम ने जब कार्यस्थलों पर मौजूद मजदूरों की संख्या का मिलान नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम ऐप पर दर्ज ऑनलाइन उपस्थिति से किया, तो सच सामने आ गया। कई जगहों पर कागजी और डिजिटल रिकॉर्ड धरातल की सच्चाई से बिल्कुल जुदा थे। इसके बाद डीआरडीए और मनरेगा के तकनीकी अधिकारियों की विस्तृत जांच रिपोर्ट पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है। सबसे गंभीर मामला सदर प्रखंड की मौना पंचायत के ग्राम जमुना स्थित पईन सफाई योजना में मिला। करीब 4.88 लाख रुपये की इस योजना में 3.21 लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका था, लेकिन धरातल पर उसके अनुरूप कोई काम नहीं हुआ था। निरीक्षण के दौरान मौके पर 22 मजदूर मिले, लेकिन उनकी उपस्थिति एनएमएमएस ऐप पर दर्ज नहीं थी। टीम को अंदेशा है कि जांच की भनक लगते ही मजदूरों को आनन-फानन में खड़ा किया गया था।  इस मामले में कार्यक्रम पदाधिकारी, संबंधित मुखिया, पंचायत तकनीकी सहायक सत्येंद्र यादव, कनीय अभियंता सुहैल अख्तर नोमानी और पंचायत रोजगार सेवक अंजय कुमार से संयुक्त रूप से 3,21,703 रुपये की रिकवरी का आदेश दिया गया है। साथ ही सरकारी राशि के दुरुपयोग और फर्जी उपस्थिति के आरोप में मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 495/26 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। लालू सिंह के खेत से बबलू प्रसाद के खेत तक पईन सफाई योजना को दो जून 2026 से चालू दिखाया गया था, लेकिन मौके पर एक टोकरी मिट्टी भी नहीं उठी थी। यहाँ 25 मजदूर बिना डिजिटल हाजिरी के मिले। इस मामले में पीओ, मुखिया, तकनीकी सहायक, जेई और रोजगार सेवक पर मनरेगा अधिनियम की धारा-25 के तहत एक-एक हजार रुपये का जुर्माना ठोका गया है।

उदय सिंह के खेत से विनोद कुमार के खेत तक पईन सफाई योजना में भी कागजों पर काम शुरू था, लेकिन धरातल पर काम नदारद था। यहाँ भी बिना डिजिटल हाजिरी के 25 मजदूर मिले। मामले में पीओ, मुखिया, तकनीकी सहायक, जेई, रोजगार सेवक और मेट पर एक-एक हजार का जुर्माना लगाया गया, साथ ही संबंधित मेट का निबंधन तुरंत रद्द करने का आदेश दिया गया। सोनपुर प्रखंड की नयागांव पंचायत में पईन उड़ाही योजना की जांच के दौरान कार्यस्थल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला। उस दिन का एनएमएमएस रिकॉर्ड भी गायब था। पंचायत रोजगार सेवक ने सफाई दी कि सुबह 5:30 बजे हाजिरी लेने के बाद पानी भर जाने के कारण काम बंद हो गया था। जांच टीम ने इस बहाने को पूरी तरह खारिज करते हुए कार्यक्रम पदाधिकारी रीना कुमारी, संबंधित मुखिया, तकनीकी सहायक कन्हैया लाल शर्मा, कनीय अभियंता शुभ्रमणि, रोजगार सेवक शिवशरण दास और मेट सतीश कुमार पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यहाँ भी मेट का निबंधन समाप्त कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार और पारदर्शिता को रोकने के लिए लागू की गई एनएमएमएस प्रणाली का अधिकारियों और बिचौलियों द्वारा मखौल उड़ाया जा रहा था। जिला प्रशासन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि सरकारी धन की लूट और मनरेगा योजनाओं में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में अन्य पंचायतों में भी ऐसी औचक जांचें जारी रहेंगी और दोषियों को सीधे जेल भेजा जाएगा।