बड़ा फर्जीवाड़ा: कंप्यूटर ऑपरेटर ने सीएम के उपसचिव के नाम से बनाई 'फेक आईडी', फर्जी बिलों से विभाग को लगाया चूना

Major Fraud: Computer Operator Creates 'Fake ID' in Name of CM's Deputy Secretary, Swindles Department Using Bogus Bills

हल्द्वानी। उत्तराखंड के सरकारी तंत्र में सेंधमारी और रसूख का डर दिखाकर धोखाधड़ी करने का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। हल्द्वानी में वन विकास निगम के एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने मुख्यमंत्री के उपसचिव के नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाकर न केवल विभाग को गुमराह किया, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों को भी धमकाया। मंगलवार देर रात मुखानी कोतवाली में आरोपी महेंद्र सिंह बिष्ट के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

विभागीय जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी महेंद्र सिंह बिष्ट ने सामने वाले व्यक्ति पर प्रभाव डालने के लिए अपने कई मोबाइल नंबरों को ट्रू-कॉलर पर 'सीएम ऑफिस', 'उपसचिव सीएम', 'वन विभाग', 'एचएसओ लालकुआं', 'इनकम टैक्स कमिश्नर' और 'नाबार्ड' जैसे प्रभावशाली नामों से सेव कर रखा था। वह इन नंबरों का इस्तेमाल वन विकास निगम के कार्मिकों को स्थानांतरण का लालच देने और उन्हें डराने के लिए करता था। हद तो तब हो गई जब उसने सीएम के उपसचिव के नाम से एक फर्जी ईमेल आईडी भी तैयार कर ली, ताकि इसका उपयोग धोखाधड़ी और गुमराह करने के लिए किया जा सके। प्रभागीय विक्रय प्रबंधक उपेंद्र सिंह द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, आरोपी ने स्वतंत्रता दिवस और अन्य बैठकों के दौरान जलपान के नाम पर फर्जी रेस्टोरेंट के बिल तैयार किए। इन फर्जी बिलों के जरिए उसने 4635 रुपये का गबन किया। इतना ही नहीं, उसने खुद ही फर्जी नाम से स्टांप पेपर खरीदकर अपने मोबाइल नंबर और फेक ईमेल आईडी से इन्हीं बिलों के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई, ताकि विभाग को उलझाया जा सके। जांच में यह भी पाया गया कि महेंद्र सिंह बिष्ट ने कार्यालय की बायोमेट्रिक मशीन और उपस्थिति पंजिका के आंकड़ों के साथ भी गंभीर छेड़छाड़ की। जब एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) आवेदन के जरिए उसकी करतूतों की जानकारी मांगी गई, तो उसने अनधिकृत रूप से पोर्टल का पासवर्ड ही बदल दिया और उसे लॉक कर दिया। प्रभागीय लौंगिंग प्रबंधक (पूर्वी हल्द्वानी) के कार्यालय में तैनात रहे इस कंप्यूटर ऑपरेटर की शिकायत मिलने पर विभाग ने पहले ही उसे ब्लैक लिस्ट कर नौकरी से बाहर कर दिया था। अब मुखानी कोतवाली पुलिस ने धोखाधड़ी, गबन और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस फर्जी आईडी के जरिए उसने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।