भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत: रूसी तेल पर अमेरिकी छूट बरकरार, ट्रंप प्रशासन का 'यू-टर्न'

Major Documentary Win for India: US Waiver on Russian Oil Remains; Administration's 'U-Turn'

नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार की उथल-पुथल के बीच भारत के लिए राहत और उत्साह भरी खबर आई है। अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट को एक महीने के लिए और बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के इस अप्रत्याशित कदम को एक बड़े 'यू-टर्न' के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पहले संकेत दिए गए थे कि इस रियायत को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। 

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा देर रात जारी नए लाइसेंस के अनुसार, अब भारत सहित अन्य देश 16 मई तक समुद्री मार्ग से रूसी तेल का आयात जारी रख सकेंगे। गौरतलब है कि यह छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो चुकी थी, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल था। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इस लाइसेंस के दायरे में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से संबंधित किसी भी लेनदेन को अनुमति नहीं दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह फैसला पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर तेल की आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने की एक सोची-समझी रणनीति है। अमेरिका नहीं चाहता कि आपूर्ति में कमी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़े। हालांकि, अमेरिकी संसद में इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट, जिन्होंने पहले छूट न देने की बात कही थी, अब सांसदों के निशाने पर हैं। आलोचकों का तर्क है कि इससे रूस की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस फैसले का सबसे बड़ा लाभार्थी भारत होगा। मार्च के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत ने रूस से 5.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा है, जो फरवरी के मुकाबले तीन गुना अधिक है। 2024 में भारत का रूसी तेल आयात प्रतिदिन 20 लाख बैरल तक पहुंच गया है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने इस मौके पर भारत को एक 'विश्वसनीय साझेदार' बताते हुए भरोसा दिलाया है कि रूस न केवल कच्चा तेल, बल्कि एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई भी और बढ़ाएगा। इस छूट के विस्तार से भारतीय तेल रिफाइनरियों को सस्ती दरों पर कच्चा तेल मिलता रहेगा, जिसका सीधा सकारात्मक असर घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों और मुद्रास्फीति पर पड़ने की उम्मीद है।