वैशाली समाहरणालय में निगरानी का बड़ा प्रहार: डीएम दफ्तर के सामने 2 हजार की घूस लेते रंगेहाथ धराया अनुमंडल कार्यालय का बाबू
वैशाली। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहीम के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ी और साहसिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। वैशाली समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) परिसर में, जहाँ जिलाधिकारी (डीएम) समेत जिले के तमाम आला अधिकारियों के दफ्तर मौजूद हैं, वहाँ निगरानी की टीम ने जाल बिछाकर अनुमंडल कार्यालय में तैनात लिपिक सुमन सौरभ को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोच लिया। डीएम दफ्तर के ठीक सामने हुई इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद समाहरणालय परिसर में देखते ही देखते भारी भीड़ जमा हो गई और कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक महकमे में पूरी तरह हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, पूरा मामला लालगंज प्रखंड के लक्ष्मीनारायणपुर से जुड़ा है। यहाँ के निवासी और जन वितरण प्रणाली दुकानदार किशन कुमार का राशन दुकान लाइसेंस पिछले दिनों अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) द्वारा निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई के खिलाफ दुकानदार ने जिलाधिकारी (डीएम) की अदालत में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद डीएम कोर्ट ने दुकानदार का लाइसेंस बहाल करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया। आरोप है कि कलेक्ट्रेट से आदेश जारी होने के बाद जब पीड़ित दुकानदार किशन कुमार अपने लाइसेंस बहाली की फाइल को आगे बढ़वाने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के लिए अनुमंडल कार्यालय पहुंचा, तो वहाँ तैनात लिपिक सुमन सौरभ ने इस सरकारी काम को करने के एवज में ₹2,000 की रिश्वत की सीधी मांग कर दी। डीएम कोर्ट का आदेश होने के बावजूद घूस मांगे जाने से परेशान और आक्रोशित दुकानदार किशन कुमार ने भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय इसकी लिखित शिकायत पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से कर दी। ब्यूरो ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गुप्त रूप से पहले शिकायत का सत्यापन कराया। प्रारंभिक जांच में आरोप पूरी तरह सही पाए जाने के बाद विभाग ने एक विशेष 'धावा दल' (छापेमारी टीम) का गठन कर कलेक्ट्रेट परिसर में जाल बिछा दिया। जैसे ही तय रणनीति के तहत शिकायतकर्ता दुकानदार ने कलेक्ट्रेट परिसर में लिपिक सुमन सौरभ को केमिकल लगे दो हजार रुपये के नोट सौंपे, वैसे ही सादे कपड़ों में पहले से मुस्तैद निगरानी की टीम ने झपट्टा मारकर आरोपी बाबू को मौके पर ही रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद टीम आरोपी को तुरंत पटना लेकर रवाना हो गई, जहाँ उसे निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। इस बड़ी कामयाबी पर स्थिति स्पष्ट करते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीएसपी गोविंद चन्द्र माथुर ने बताया शिकायतकर्ता किशन कुमार के पीडीएस लाइसेंस का निलंबन कलेक्ट्रेट के आदेश से वापस हो चुका था। इसके बावजूद फाइल को दबाकर आगे बढ़ाने के नाम पर घूस मांगी जा रही थी। विधिक शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की गई और आरोपी लिपिक को रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। इस कार्रवाई के बाद वैशाली समाहरणालय परिसर में भ्रष्टाचार के खेल को लेकर कलेक्ट्रेट कर्मियों और जनता के बीच कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों के बीच यह सवाल तैर रहा है कि क्या फाइलों को अटकाकर घूस की यह वसूली केवल क्लर्क के स्तर पर हो रही थी या इसके पीछे कलेक्ट्रेट के भीतर कोई बड़ा और संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है। फिलहाल, निगरानी की टीम आरोपी से पूछताछ कर इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और संदिग्धों की गहराई से जांच कर रही है।