उत्तराखंड में किसान महाकुंभ का शंखनाद: वीआईपी घाट पर डेरा,धामी सरकार पर बरसे राकेश टिकैत,भूमि अधिग्रहण पर आर-पार की चेतावनी

'Kisan Mahakumbh' bugle sounded in Uttarakhand: Camp set up at VIP Ghat; Rakesh Tikait lashes out at the Dhami government and issues a warning of a decisive showdown over land acquisition.

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार का वीआईपी घाट एक बार फिर ऐतिहासिक किसान आंदोलन और नारों से गूंज उठा है। मंगलवार से भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के चार दिवसीय राष्ट्रीय किसान महाकुंभ का विधिवत शंखनाद हो गया। देश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने हरिद्वार के प्रमुख घाटों और रास्तों पर डेरा डाल दिया है। महाकुंभ के पहले ही दिन भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने हुंकार भरते हुए केंद्र और राज्य सरकारों पर जमकर निशाना साधा। टिकैत ने देश में हो रहे भूमि अधिग्रहण को इस वक्त का सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार को आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दे डाली है।

पंडाल में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि आज देश का अन्नदाता चौतरफा संकट से घिरा हुआ है। विकास के नाम पर किसानों की कीमती जमीनों का बेहद सस्ते दामों पर जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आदिवासियों और किसानों के जंगल उजाड़े जा रहे हैं। टिकैत ने आम जनता की दुखती रग पर हाथ रखते हुए कहा कि आज देश का हर नागरिक 'स्मार्ट मीटर' की तानाशाही से तंग आ चुका है और किसान संगठन अब इस लूट के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाएंगे। राकेश टिकैत ने विदेशी आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार अमेरिका के साथ जिन शर्तों पर समझौते करने जा रही है, उससे देश का घरेलू बाजार तबाह हो जाएगा। उन्होंने आगाह किया कि इस नीति के लागू होने से उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेब की खेती करने वाले किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, किसान ऋण माफी और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर अब पूरे देश में गोलबंदी हो रही है। इस महाकुंभ के जरिए तैयार होने वाले प्रस्ताव को अंतिम दिन सरकार को ज्ञापन के रूप में भेजा जाएगा। हरिद्वार में इस समय चारों तरफ सिर्फ किसान, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, गाड़ियां और भाकियू के हरे-सफेद बैनर-पोस्टर ही नजर आ रहे हैं। वीआईपी घाट के मुख्य पंडाल से लेकर एक्जिट गेट तक हजारों किसानों के रुकने की व्यवस्था की गई है। जगह-जगह लंगर चल रहे हैं और आमतौर पर बंद रहने वाले वीआईपी रास्तों को किसानों के लिए खोल दिया गया है। इस माहौल ने भाकियू के संस्थापक स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के दौर की यादें ताजा कर दीं, जब उनके एक आह्वान पर लाखों किसान हरिद्वार की ट्रेनों और बसों को पाट देते थे। हालांकि, वक्ताओं ने यह भी स्वीकार किया कि दिल्ली आंदोलन के बाद किसान संगठन कई धड़ों में बंट गए हैं, लेकिन भाकियू टिकैत आज भी देश की सबसे बड़ी ताकत बनकर किसानों की लड़ाई लड़ रही है। चार दिनों तक चलने वाले इस महाकुंभ से निकलने वाली चिंगारी आने वाले दिनों में देश की सियासत और किसान राजनीति की नई दिशा तय करेगी।