केतन अग्रवाल हत्याकांडः क्रिकेट से शुरू हुई दोस्ती, प्यार और फिर मौत की साजिश! 2004 कॉल, कैफे मीटिंग और डिजिटल सबूतों ने खोले राज, जानें पुलिस जांच में अबतक क्या आया सामने?
नई दिल्ली। पुणे के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले से जुड़े नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में अब तक मिले डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), पारिवारिक संबंध और आरोपियों की गतिविधियां इस पूरे मामले को महज एक हत्या नहीं, बल्कि एक कथित सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करती हैं। हालांकि मामले की अंतिम सच्चाई का निर्धारण न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही होगा। जांच के दौरान सामने आया है कि मुख्य आरोपी चेतन चौधरी और सिया गोयल की पहचान किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या डेटिंग ऐप के जरिए नहीं हुई थी। पुलिस के अनुसार दोनों की पहली मुलाकात सिया के बड़े भाई साहिल गोयल के माध्यम से हुई।
साहिल और चेतन लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और स्थानीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में साथ खेल चुके थे। जांच एजेंसियों को एक पुराना वीडियो भी मिला है, जिसमें दोनों एक क्रिकेट टूर्नामेंट में एक ही टीम का हिस्सा दिखाई दे रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों परिवारों के बीच अप्रत्यक्ष परिचय पहले से मौजूद था। पुलिस के मुताबिक सिया अपने भाई के साथ कई बार क्रिकेट मैच देखने जाती थी, जहां उसकी चेतन से मुलाकात हुई। शुरुआती परिचय धीरे-धीरे बातचीत में बदला और बाद में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। जांच एजेंसियों का मानना है कि वर्ष 2025 की दिवाली के आसपास एक साझा मित्र की पार्टी में मुलाकात के बाद दोनों के बीच संपर्क काफी बढ़ गया और नियमित बातचीत शुरू हो गई। जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार जनवरी 2026 से जून 2026 के बीच सिया और चेतन के बीच कुल 2,004 फोन कॉल हुईं, जिनकी कुल अवधि लगभग 238 घंटे रही। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन लंबी बातचीतों में क्या चर्चा होती थी और क्या इसी दौरान कथित हत्या की योजना बनाई गई।
इसी दौरान सिया का विवाह पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल से तय हो चुका था। दोनों की शादी नवंबर 2026 में प्रस्तावित थी और दोनों परिवार तैयारियों में जुटे हुए थे। पुलिस ने सिया के भाई साहिल गोयल से भी लंबी पूछताछ की। परिवार का कहना है कि सिया ने कभी यह नहीं बताया कि वह इस शादी से असहमत है। परिवार के अनुसार यदि उसने स्पष्ट रूप से विवाह से इनकार किया होता तो शादी आगे नहीं बढ़ाई जाती। यही तथ्य अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। पुलिस के अनुसार घटना से एक दिन पहले, 17 जून को सिया और चेतन पुणे के लुल्लानगर स्थित एक कैफे में मिले थे, जहां दोनों लगभग एक घंटे तक साथ रहे। जांच एजेंसियां इस मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण मान रही हैं और आशंका जता रही हैं कि यहीं कथित रूप से आगे की योजना पर चर्चा हुई होगी।
अगले दिन 18 जून को केतन अग्रवाल, सिया और चेतन लोहागढ़ किले के क्षेत्र में पहुंचे। पुलिस का आरोप है कि यहीं पहले से बनाई गई कथित योजना को अंजाम दिया गया। जांच अधिकारियों का दावा है कि पूछताछ और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चेतन के बयान में भी बदलाव आया है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मामले में डिजिटल फोरेंसिक जांच भी अहम भूमिका निभा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट ही नहीं, बल्कि उन्हें रीसायकल बिन से भी हटाने की कोशिश की। दोनों मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं और विशेषज्ञ डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास कर रहे हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि बरामद होने वाली डिजिटल सामग्री इस मामले की कई अहम कड़ियों को जोड़ सकती है।
इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केतन अग्रवाल के परिजनों से मुलाकात कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराने का आश्वासन दिया है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का निर्णय भी लिया है। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए छह विशेष टीमें गठित की हैं। परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच का दायरा केवल हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या कथित साजिश की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को भी थी। फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। क्या यह हत्या वास्तव में पूर्व नियोजित साजिश थी? क्या कथित प्रेम संबंध ही इस घटना की वजह बना? और यदि सिया इस विवाह से संतुष्ट नहीं थी, तो क्या समय रहते परिवार से स्पष्ट बातचीत इस पूरी घटना को टाल सकती थी? इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस की विस्तृत जांच और अदालत की सुनवाई के बाद ही सामने आएंगे।