नीट यूजी री-परीक्षा में झारखंड के जांबाजों का जलवा: जेवीएम श्यामली के ज्ञानेंद्र गर्व को मिली ऑल इंडिया रैंक 676, राज्य के दर्जनों छात्रों ने लहराया परचम

Jharkhand's Achievers Shine in NEET-UG Re-exam: Gyanendra Garv of JVM Shyamali Secures All India Rank 676; Dozens of Students from the State Excel

रांची। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा नीट यूजी के घोषित अंतिम परिणामों में झारखंड के मेधावी छात्र-छात्राओं ने एक बार फिर अपनी अद्वितीय प्रतिभा का लोहा मनवाया है। राज्य के कई होनहारों ने परीक्षा में न केवल 600 से अधिक अंकों का पहाड़ खड़ा किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष रैंकिंग हासिल कर झारखंड का नाम रोशन किया है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखने की चाह रखने वाले इन युवाओं के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि झारखंड के छात्र अब देश के सबसे बड़े और सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को हर मोर्चे पर कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

राजधानी रांची के प्रतिष्ठित स्कूल जवाहर विद्या मंदिर (जेवीएम), श्यामली के छात्र ज्ञानेंद्र गर्व ने इस राष्ट्रीय परीक्षा में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। ज्ञानेंद्र ने 720 में से 665 अंक अर्जित किए हैं। उन्हें परीक्षा में 99.9629481 पर्सेंटाइल प्राप्त हुआ है। ज्ञानेंद्र ने ऑल इंडिया रैंक 676 और सामान्य श्रेणी में 413वीं रैंक हासिल कर अपनी मेधा की चमक बिखेरी है। उन्होंने जीव विज्ञान, भौतिकी और रसायन विज्ञान तीनों ही विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके अलावा, दिल्ली पब्लिक स्कूल रांची समेत राज्य के कई अन्य प्रतिष्ठित विद्यालयों और प्रमुख कोचिंग संस्थानों के सैकड़ों विद्यार्थियों ने 650 और 600 से अधिक अंक हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। राष्ट्रीय स्तर की बात करें तो इस वर्ष पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। वहीं, उनके ठीक पीछे झारखंड के इन मेधावियों ने बेहद कड़े मुकाबले में अपनी जगह पक्की की। झारखंड के हमारे विद्यार्थियों ने अपनी कठिन मेहनत, अनुशासन और अटूट संकल्प के बल पर यह बड़ी सफलता अर्जित की है। यह पूरे झारखंड और हमारे विद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। हमें पूरा विश्वास है कि ये होनहार आगे चलकर चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देंगे और समाज व राष्ट्र के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में झारखंड के भीतर राष्ट्रीय परीक्षाओं की तैयारी का स्तर काफी ऊपर उठा है। अब यहां के बच्चों को तैयारी के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ता; स्थानीय स्कूल और संस्थान ही उन्हें देश की सबसे कठिन परीक्षाओं के लिए पूरी तरह तैयार कर रहे हैं। सफल छात्रों की यह गौरवमयी गाथा निश्चित रूप से राज्य के आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बनेगी।