Sep 03, 2026 Login

हल्द्वानी: AI के सहारे बना ‘फर्जी मेजर’! दिल्ली से केरल तक लड़कियों को फंसाकर करता था ब्लैकमेल, ऐसे खुला राज

Haldwani: 'Fake Major' created using AI! He entrapped and blackmailed girls from Delhi to Kerala—here’s how the secret was exposed.

हल्द्वानी। सोशल मीडिया पर लाइक्स, कमेंट्स और फॉलोअर्स बढ़ाने की चाह एक 20 वर्षीय युवक को कानून के शिकंजे तक ले गई। हल्द्वानी में पुलिस ने ऐसे युवक का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटरनेट की मदद से खुद को भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फोर्स का मेजर बताकर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी पहचान के साथ सक्रिय था। आरोपी सेना की वर्दी में अपनी मॉर्फ्ड तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था और इसी पहचान का इस्तेमाल युवतियों को प्रभावित करने के लिए करता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की गतिविधियों की जानकारी 1 सितंबर को मिलिट्री इंटेलिजेंस की ओर से नैनीताल पुलिस को दी गई थी। सूचना में बताया गया था कि एक युवक फर्जी पहचान बनाकर सोशल मीडिया पर पैरा कमांडो और सेना अधिकारी के रूप में अपनी तस्वीरें और वीडियो अपलोड कर रहा है। मामला सेना से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टीसी ने एसओजी प्रभारी मोहन सिंह सौन को कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच और तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान 20 वर्षीय रोहित सिंह मेहता के रूप में हुई है। वह मूल रूप से चंपावत जिले के पाटी तहसील क्षेत्र के ग्राम कानीकोट का रहने वाला बताया गया है और वर्तमान में हल्द्वानी के गोरापड़ाव क्षेत्र में रह रहा था।

एआई से तैयार करता था सेना की वर्दी वाली तस्वीरें
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने इंटरनेट और सोशल मीडिया से भारतीय सेना के अधिकारियों की वर्दी वाली तस्वीरें हासिल की थीं। इसके बाद एआई टूल्स, जिसमें गूगल जेमिनी के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है, की मदद से कथित तौर पर अपनी फर्जी और मॉर्फ्ड तस्वीरें तैयार करता था। इन तस्वीरों में वह सेना की वर्दी पहने और हाथ में हथियार लिए संवेदनशील अथवा जोखिम वाले स्थानों पर दिखाई देता था। इन तस्वीरों और वीडियो को वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करता था, ताकि देखने वालों को लगे कि वह वास्तव में सेना की पैरा स्पेशल फोर्स में मेजर है। पुलिस को उसके मोबाइल फोन की जांच में सेना की वर्दी से संबंधित कई फोटो और वीडियो मिले हैं। इसके अलावा उसके कब्जे से सेना के अधिकारी का फर्जी प्रतीत होने वाला आईडी कार्ड भी बरामद किया गया है।

सेना की भर्ती में दौड़ में हो गया था बाहर
पुलिस पूछताछ में आरोपी के सेना से जुड़ने की कोशिश का भी पता चला। बताया गया कि रोहित पूर्व में सेना की भर्ती में शामिल हुआ था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान शारीरिक क्षमता परीक्षण में वह दौड़ में ही बाहर हो गया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी का एक रिश्तेदार युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रशिक्षण देता है और उसने रोहित को भी कई बार ट्रेनिंग के लिए आने को कहा था, लेकिन वह प्रशिक्षण लेने के लिए तैयार नहीं हुआ। सेना में भर्ती न हो पाने के बावजूद सोशल मीडिया पर उसने खुद को सेना का अधिकारी बताना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसने इसी फर्जी पहचान को अपनी सोशल मीडिया गतिविधियों का आधार बना लिया।

सुरक्षा कारणों से चेहरा नहीं दिखा सकता
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के सोशल मीडिया और मोबाइल फोन से कई युवतियों से संपर्क की जानकारी भी मिली। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वह 10 से अधिक लड़कियों से बातचीत करता था और खुद को उनके सामने सेना का मेजर बताता था। वीडियो कॉल के दौरान आरोपी कथित तौर पर अपना चेहरा नहीं दिखाता था। जब सामने से चेहरा दिखाने के लिए कहा जाता तो वह सेना में अधिकारी होने और सुरक्षा कारणों का हवाला देता था। आरोप है कि बातचीत के दौरान युवतियों की निजी तस्वीरें और वीडियो हासिल करने के बाद वह उन्हें अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लेता था। इसके बाद कथित तौर पर इन तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल उन्हें धमकाने तथा पैसे ऐंठने के लिए किया जाता था। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी का संपर्क केवल हल्द्वानी तक सीमित नहीं था। पुलिस को देहरादून, दिल्ली और केरल समेत अन्य स्थानों की युवतियों से उसके संपर्क के संकेत मिले हैं। अब पुलिस उसके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट की विस्तृत जांच कर रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि उसने कितने लोगों को अपनी फर्जी पहचान के जरिए प्रभावित किया और उसके खिलाफ इस तरह की गतिविधियों से जुड़े कितने मामले सामने आ सकते हैं।

दो मोबाइल, आधार-पैन और फर्जी आर्मी आईडी बरामद
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो स्मार्ट मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा उसके पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड और सेना के अधिकारी का फर्जी प्रतीत होने वाला आईडी कार्ड भी मिला है। मोबाइल फोन में सेना की वर्दी पहने हुए फोटो और वीडियो पाए गए हैं। पुलिस अब इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। सोशल मीडिया अकाउंट, चैट, फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री को खंगालकर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी की गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और इस पूरे फर्जीवाड़े में उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।