उत्तराखंड में निकाहनामा पंजीकरण की व्यवस्था होगी और व्यवस्थित! मौलवियों का होगा रजिस्ट्रेशन, यूसीसी पोर्टल पर दर्ज हो सकता है विवाह का रिकॉर्ड
देहरादून। उत्तराखंड में अलग-अलग समुदायों के महिला-पुरुष के निकाह और निकाहनामे के पंजीकरण की व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए निकाहनामा और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया का आधिकारिक प्रारूप तैयार करने पर मंथन किया जा रहा है। सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य निकाह से संबंधित आवश्यक अभिलेखों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करना और विवाह का प्रामाणिक रिकॉर्ड तैयार करना है। इस दिशा में समिति के गठन की प्रक्रिया चल रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निकाह कराने वाले मौलवियों का पंजीकरण किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही निकाहनामा में वर-वधू से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट रूप से दर्ज करने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे विवाह से जुड़े दस्तावेजों में पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में सामने आने वाले विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है। प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास के अनुसार, निकाहनामा की व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले इसके कानूनी, प्रशासनिक और धार्मिक पक्षों पर संबंधित लोगों से परामर्श लिया जा रहा है। प्रस्तावित प्रारूप में वर-वधू की पहचान, धर्म एवं मत, विवाह की तिथि, निकाह पढ़ाने वाले मौलवी का पंजीकरण नंबर और गवाहों से संबंधित जानकारी दर्ज किए जाने का प्रस्ताव है।
इस व्यवस्था में निकाह पढ़ाने वाले मौलवी के पंजीकरण को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यानी निकाह कराने वाले मौलवी की पहचान और पंजीकरण से संबंधित जानकारी निकाहनामा में दर्ज होने से निकाह का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जा सकेगा। प्रस्तावित व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू निकाह के अभिलेखों को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित रखना भी है। इसके तहत स्थानीय प्रशासन के साथ.साथ यूसीसी पोर्टल पर भी निकाह से संबंधित रिकॉर्ड दर्ज किए जाने की व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि विवाह का व्यवस्थित और प्रामाणिक रिकॉर्ड तैयार होने से पहचान, निवास और विवाह से संबंधित दस्तावेजों में संभावित गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। साथ ही भविष्य में विवाह से जुड़े किसी विवाद की स्थिति में आधिकारिक अभिलेख उपयोगी साबित हो सकते हैं। सरकार के मुताबिक, समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निकाहनामा की प्रस्तावित व्यवस्था को अंतिम रूप देने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। अगले दो से तीन माह में प्रारूप तैयार होने की संभावना जताई गई है। मंत्री खजान दास ने कहा कि निकाहनामा के प्रारूप को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। कानूनी, प्रशासनिक और धार्मिक पहलुओं पर विचार के बाद ही व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा। ऐसे में आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि उत्तराखंड में निकाहनामा के पंजीकरण, मौलवियों के रजिस्ट्रेशन और यूसीसी पोर्टल पर रिकॉर्ड दर्ज करने की व्यवस्था किस स्वरूप में लागू होती है।