खुशखबरीः उत्तराखंड में बढ़ा श्रमिकों का वेतन! धामी सरकार का बड़ा फैसला, अब यूपी समेत कई राज्यों से अधिक मिलेगी मजदूरी

Good news: Workers' wages have increased in Uttarakhand! The Dhami government has made a significant decision, now workers will receive higher wages than in many states, including Uttar Pradesh.

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के श्रमिकों को बड़ी राहत देते हुए न्यूनतम वेतन में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी का फैसला लिया है। यह निर्णय न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि औद्योगिक अशांति की संभावनाओं को भी कम करने में मददगार साबित होगा। नई दरें जारी होने के बाद अब उत्तराखंड के श्रमिकों को पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों की तुलना में अधिक वेतन मिलेगा। दरअसल ऊधमसिंह नगर में श्रमिक संगठनों और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। ऊधम सिंह नगर जिले के जिलाधिकारी द्वारा 18 अप्रैल को श्रमिकों के शोषण और न्यूनतम वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर श्रमायुक्त को रिपोर्ट भेजी गई थी। रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई थी कि यदि समय रहते वेतन में वृद्धि नहीं की गई, तो नोएडा जैसी औद्योगिक अशांति उत्तराखंड में भी देखने को मिल सकती है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने तुरंत शासन को अवगत कराया। जांच में यह सामने आया कि राज्य में लागू न्यूनतम वेतन की अधिसूचना लगभग 20 वर्ष पुरानी है, जबकि इस दौरान जीवनयापन की लागत में लगातार वृद्धि हुई है।

इसके बावजूद श्रमिकों की आय में समुचित वृद्धि न होने के कारण उनकी क्रयशक्ति में गिरावट आई, जिससे असंतोष बढ़ रहा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने सचिव श्रम की अध्यक्षता में एक त्रिदलीय समिति का गठन किया। इस समिति में श्रमिक संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और सरकार के अधिकारियों को शामिल किया गया। समिति की बैठक 27 अप्रैल को आयोजित हुई, जिसमें सभी पक्षों के विचारों और मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट को मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी, जिसके बाद बुधवार को नई न्यूनतम वेतन दरों की घोषणा कर दी गई। इस फैसले के तहत श्रमिकों के वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिससे उन्हें बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से न केवल श्रमिकों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि उद्योगों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच संतोष का माहौल भी बनेगा। साथ ही यह कदम औद्योगिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और निवेश को प्रोत्साहित करने में भी सहायक होगा।