Good Morning India:मानसून सत्र से पहले बड़ा सियासी उलटफेर: परिसीमन बिल पर डीएमके दे सकती है सरकार का साथ,स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर जीता फुटबॉल विश्व कप,उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में बड़ा बदलाव,फरार पॉक्सो आरोपी पर रुद्रपुर पुलिस का शिकंजा,लिंक में पढ़ें प्रमुख खबरें
नमस्कार दोस्तों, आवाज इंडिया अपना खास कॉलम 'गुड मॉर्निंग इंडिया' लेकर एक फिर आपके समक्ष हाजिर है। आईए शुरुआत करते हैं उन सुर्खियों के साथ,जो आज पूरे दिन चर्चा में रहने वाली हैं।
मानसून सत्र से पहले बड़ा सियासी उलटफेर: परिसीमन बिल पर डीएमके दे सकती है सरकार का साथ, दो-तिहाई बहुमत के करीब एनडीए
दिल्ली में सुबह-सुबह जंतर मंतर पर बढ़ी हलचल, फोर्स आने की खबरों के बीच चारों तरफ बैरिकेडिंग, पुलिस अलर्ट
5 अगस्त को बड़ी साजिश: पाकिस्तान में भारत विरोधी अभियान की कमान अब सीधे सेना के हाथ
अयोध्या: किसी भी हाल में भंग नहीं हो सकता राम मंदिर ट्रस्ट, सिर्फ व्यवस्था में होगा संशोधन
आंसुओं के साथ थमा मेसी का महाअभियान: स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर जीता फुटबॉल विश्व कप
मध्य प्रदेश में भीषण हादसा: पिकनिक मनाकर लौट रहे 6 युवकों को डंपर ने रौंदा, 4 की मौत, 2 नाजुक
संसद मार्च से पहले अस्पताल से वांगचुक का संदेश: रखी अनशन खत्म करने की 3 शर्तें
ईरान संकट की आड़ में चीन की बड़ी चाल: चोरी-छिपे किया परमाणु मिसाइल का परीक्षण
वंदे मातरम' के अपमान पर अब होगी 3 साल की जेल, आज राज्यसभा में बिल पेश करेंगे अमित शाह
बदरीनाथ धाम की अनोखी परंपरा: 2021 से बंद हुआ भगवान को चढ़ावे का 'हिसाब' सुनाने का रिवाज
उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में बड़ा बदलाव: कक्षा 9 से 12वीं तक लागू होगा आधुनिक शिक्षा मॉडल
उत्तराखंड में आज भारी बारिश का अलर्ट: आपदा प्रबंधन विभाग 24 घंटे मुस्तैद, जिलों को विशेष सतर्कता के निर्देश
उत्तराखंड चुनाव के लिए कांग्रेस की महाबैठक: आज दिल्ली में तैयार होगा 'मिशन 2027' का मास्टर प्लान
फरार पॉक्सो आरोपी पर रुद्रपुर पुलिस का शिकंजा: आत्मसमर्पण न करने पर कुर्क होगा मकान
हेडलाइंस के बाद आइए अब रुख करते हैं आज की बड़ी खबरों की तरफ-नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र आज (सोमवार) से शुरू हो रहा है, लेकिन सत्र के आगाज से ठीक पहले देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। विपक्षी खेमे को बड़ा झटका देते हुए संकेत मिले हैं कि बहुप्रतीक्षित परिसीमन बिल और महिला आरक्षण विधेयक पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम मोदी सरकार का साथ दे सकती है। अगर यह सियासी समीकरण हकीकत में बदलता है, तो केंद्र सरकार संसद में दो-तिहाई के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, इस समर्थन के बदले द्रमुक ने सरकार के सामने एक बड़ी शर्त रखी है। पार्टी चाहती है कि देश के सभी राज्यों में आनुपातिक आधार पर 50 फीसदी सीटें बढ़ाई जाएं, ताकि दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व को कोई नुकसान न हो। दिलचस्प बात यह है कि इस मांग पर गृह मंत्री अमित शाह बजट सत्र के दौरान पहले ही चर्चा में आश्वासन दे चुके हैं, जिसके बाद सरकार भी इस शर्त पर राजी दिख रही है। हालांकि, रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा ने इस पर सीधे कुछ भी कहने से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्यों के हितों के खिलाफ पार्टी कोई समझौता नहीं करेगी और वे परिसीमन पर सरकार से और स्पष्टता चाहते हैं। इसके उलट, आरपीआई सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि द्रमुक परिसीमन विधेयक पर सरकार का समर्थन करने को तैयार हो चुकी है।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सुबह-सुबह भारी सियासी हलचल और तनाव देखा जा रहा है। देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों ने आज 'संसद मार्च' का एलान किया है। इसके साथ ही लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आंदोलन भी इस मार्च से जुड़ गया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। आज से संसद का सत्र शुरू होने के कारण दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद की तरफ मार्च करने की अनुमति देने से साफ इन्कार कर दिया है। एहतियात के तौर पर जंतर-मंतर के चारों तरफ भारी बैरिकेडिंग कर दी गई है और पूरे इलाके को एक तरह से किले में तब्दील कर दिया गया है। सुबह से ही अतिरिक्त पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ियों के घटना स्थल पर पहुंचने की खबरें आ रही हैं, जिससे आंदोलनकारियों के बीच भी सरगर्मी बढ़ गई है।
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ (5 अगस्त) से पहले पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक बेहद संगठित और बड़ी साजिश की तैयारी शुरू कर दी है। पाकिस्तान सरकार के एक गोपनीय दस्तावेज से सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस बार 'यौमे इस्तेहसाल' नाम के भारत विरोधी अभियान की कमान सीधे रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना मुख्यालय को सौंप दी गई है। इस साजिश को अंजाम देने के लिए सेना मुख्यालय के भीतर एक विशेष कमांड रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां से पूरे प्रोपेगैंडा की निगरानी और समन्वय किया जाएगा। इस रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए पिछले दिनों इस्लामाबाद में कश्मीर मामलों और गिलगित-बाल्टिस्तान मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में पाकिस्तान सरकार के 70 से अधिक मंत्रालयों, रक्षा प्रतिष्ठानों, सैन्य संस्थानों, विमानन एजेंसियों और सुरक्षा संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। साफ है कि इस बार पाकिस्तान अपने पूरे सरकारी और सैन्य तंत्र को भारत के खिलाफ सक्रिय कर बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुष्प्रचार फैलाने की फिराक में है।
यहाँ दिए गए तथ्यों के आधार पर समाचार पत्र के लिए एक आकर्षक और स्पष्ट खबर का ड्राफ्ट दिया गया है:
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की उठ रही मांगों के बीच एक बड़ा कानूनी तथ्य सामने आया है। ट्रस्ट की स्थापना संबंधी मूल ट्रस्ट डीड और 9 नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि इस ट्रस्ट को किसी भी स्थिति में भंग नहीं किया जा सकता है। हाल ही में निर्मोही अखाड़ा और हिंदू महासभा द्वारा ट्रस्ट को भंग करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं, जिसके बाद से यह कानूनी बहस तेज हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भारत सरकार ने 5 फरवरी 2020 को इस ट्रस्ट का गठन किया था। मूल ट्रस्ट डीड के नियमों के अनुसार, यह ट्रस्ट पूरी तरह 'अपरिवर्तनीय' है। इसका सीधा मतलब यह है कि कानूनन इस ट्रस्ट को निरस्त या समाप्त करने का कोई प्रावधान ही नहीं रखा गया है। उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, यदि आवश्यक हो तो केवल ट्रस्टियों में बदलाव किया जा सकता है या ट्रस्ट डीड की कुछ धाराओं में सीमित संशोधन संभव हैं, लेकिन संपूर्ण ट्रस्ट को खत्म नहीं किया जा सकता। इस कानूनी स्पष्टता के बाद अब अखाड़े और महासभा की याचिकाओं पर संशय खड़ा हो गया है। इस बीच, अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से अधिक अलर्ट कर दिया गया है।
न्यूयॉर्क। दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के विश्व कप सफर का अंत बेहद भावुक और दर्दनाक रहा। न्यूयॉर्क के मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए फीफा विश्व कप 2026 के रोमांचक फाइनल मुकाबले में स्पेन ने अतिरिक्त समय (Extra Time) में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। मैच खत्म होने की अंतिम सीटी बजते ही अर्जेंटीना के कप्तान मेसी मैदान पर ही रो पड़े, जिन्हें देख स्टेडियम में मौजूद हजारों प्रशंसकों की आंखें भी नम हो गईं। पूरे टूर्नामेंट में 8 गोल और 4 असिस्ट करने वाले मेसी फाइनल में स्पेनिश टीम की मजबूत रणनीति के आगे बेअसर दिखे। कोच लुइस दे ला फुएंते की स्पेनिश टीम ने मिडफील्ड पर पूरी तरह कब्जा जमाए रखा और मेसी को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया। खिताबी मुकाबले में अर्जेंटीना की राह तब और मुश्किल हो गई जब एंजो फर्नांडीज को दूसरा पीला कार्ड (रेड कार्ड) दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया गया। 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही अर्जेंटीना अतिरिक्त समय के आखिरी पलों तक कोई प्रभावी हमला नहीं कर सकी। हार के बावजूद स्टेडियम में प्रशंसकों ने तख्तियां लहराकर और मेसी के नारे लगाकर अपने चहेते स्टार को ऐतिहासिक विदाई दी।
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में रविवार देर शाम एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुआतला थाना क्षेत्र के अंतर्गत हाथीनाला वॉटरफॉल से पिकनिक मनाकर लौट रहे छह युवकों को एक तेज रफ्तार डंपर (हाइवा) ने बेरहमी से कुचल दिया। इस दर्दनाक हादसे में चार युवकों की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस के अनुसार, जबलपुर के शहपुरा, मानेगांव और नरसिंहपुर के कुछ युवक पिकनिक मनाने गए थे। शाम करीब सवा सात बजे सभी युवक हाईवे किनारे एक दुकान पर चाय पीने के लिए रुके थे। इसी दौरान लापरवाही से आ रहे एक अनियंत्रित डंपर ने सभी को चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भयावह थी कि बरपटी निवासी जयपाल लोधी (30) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वीरेंद्र (21), राजेंद्र (32) और राजपाल (20) ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। हादसे में गंभीर रूप से घायल आकाश लोधी और नीरज लोधी को इलाज के लिए जबलपुर के मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एडिशनल एसपी संदीप भूरिया ने बताया कि वारदात के बाद आरोपी चालक हाइवा समेत फरार हो गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित 'संसद मार्च' को लेकर जबरदस्त सियासी गरमाहट है। इस बीच, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक ट्वीट के जरिए सरकार और राजनीतिक दलों को अपना कड़ा संदेश भेजा है। वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे 20 जुलाई को ही अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं, बशर्ते उनकी तीन शर्तें मानी जाएं। सरकार शिक्षा व्यवस्था की नाकामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं की पूरी जिम्मेदारी ले। वांगचुक और सीजेपी की लीडरशिप को संसद तक जाने दिया जाए, जहां विभिन्न दलों के सांसद उन्हें इस मुद्दे को संसद में उठाने का भरोसा दिलाएं। यदि स्वास्थ्य कारणों से ऐसा संभव न हो, तो विभिन्न पार्टियों के नेता खुद अस्पताल आकर यह आश्वासन दें। वांगचुक और उनकी पत्नी ने अस्पताल में रखने को 'गैर-कानूनी नजरबंदी' करार दिया है, जहां उनके बोलने और मिलने पर रोक है। हालांकि, सरकार का कहना है कि उन्हें अदालत के निर्देश पर जंतर-मंतर से हटाया गया है। इस बीच पुलिस ने मार्च की इजाजत नहीं दी है, लेकिन वांगचुक की पत्नी के नेतृत्व के एलान के बाद जंतर-मंतर की चारों तरफ कड़ी बैरिकेडिंग कर दी गई है और सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।
नई दिल्ली। जब पूरी दुनिया और महाशक्ति अमेरिका का ध्यान पश्चिम एशिया में भड़क रहे युद्ध पर टिका था, ठीक उसी समय चीन ने बैकडोर से एक बेहद खतरनाक सैन्य चाल चल दी। एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने समुद्र के भीतर (पनडुब्बी से) चुपके से एक ऐसी मिसाइल का परीक्षण किया है जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। एशिया मीडिया सेंटर' द्वारा जारी इस विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने इस परीक्षण के लिए जानबूझकर उस समय को चुना जब अमेरिका पूरी तरह ईरान के साथ संघर्ष में उलझा हुआ था। फरवरी के आखिरी दिनों में जब अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई चरम पर पहुंच गई थी और अमेरिकी सेना समुद्री जहाजों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए ईरान के दर्जनों ठिकानों पर भीषण बमबारी कर रही थी, ठीक उसी हफ्ते चीन ने इस परमाणु मिसाइल को दागा।न्यूजीलैंड के एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि खाड़ी संकट के कारण अमेरिका और वैश्विक शक्तियों का ध्यान इस बड़े खतरे पर नहीं जा सका, जिसका फायदा उठाकर चीन ने चुपचाप अपनी सामरिक ताकत बढ़ा ली। ड्रैगन के इस गुप्त परीक्षण ने अब पूरे एशिया प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नए खतरे और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
नई दिल्ली। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम- 1971' में संशोधन से जुड़ा बेहद अहम विधेयक पेश करेंगे। इस नए कानून के तहत अब राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का अपमान करने वालों को तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं भुगतनी पड़ सकती हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के बाद अब 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान 'जन गण मन' की तरह ही समान कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। गौरतलब है कि मोदी सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं जयंती पर वर्ष भर के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रही है, और इसी कड़ी में यह बड़ा फैसला लिया गया है। चूंकि 'वंदे मातरम' को लेकर देश में लंबे समय से सियासी और वैचारिक बहस होती रही है, इसलिए मानसून सत्र के पहले ही दिन इस विधेयक के आने से सदन का पारा चढ़ना तय है। अधिकांश विपक्षी दलों के पुराने रुख को देखते हुए इस बिल पर संसद में तीखे टकराव और बेहद गर्म बहस होने के पूरे आसार हैं।
अब रुख करते हैं उत्तराखंड की ख़बरों की तरफ़-चमोली। भू-वैकुंठ बदरीनाथ धाम में वर्षों तक चली एक बेहद अनूठी और पारदर्शी धार्मिक परंपरा इन दिनों एक बार फिर चर्चाओं में है। वर्ष 2021 तक धाम में यह अटूट व्यवस्था थी कि मंदिर के दान पात्रों और थाली भेंट से जितनी भी धनराशि, सोना या चांदी प्राप्त होती थी, उसका पूरा ब्योरा रात को साक्षात भगवान बदरीविशाल को पढ़कर सुनाया जाता था। वर्ष 2012 में तत्कालीन सीईओ बीडी सिंह द्वारा शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत, शयन आरती के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी गर्भगृह की ओर मुख करके खड़े होते थे। वे श्रद्धालुओं और वेदपाठियों की मौजूदगी में भगवान से प्रार्थना करते हुए कहते थे, "प्रभु, यह समस्त चढ़ावा आपका है और इसका उपयोग आपके ही निमित्त किया जाएगा।" कोरोना काल में भी जारी रही यह अनूठी परंपरा वर्ष 2021 में बीडी सिंह के रिटायर होने के बाद अचानक बंद हो गई। पूर्व सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वर्ष 2012 में चढ़ावे की गणना करने वाले कर्मचारियों के लिए 'ढांगरी' (बिना जेब वाले कपड़े) पहनना अनिवार्य किया गया था, जिसका काफी विरोध हुआ। पूर्व में इस गणना में स्थानीय गांवों और पंडा पंचायत के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की व्यवस्था बनाई गई थी, जो बाद में बंद हो गई। फिलहाल दान की गिनती तो जारी है, लेकिन भगवान को सार्वजनिक रूप से हिसाब सुनाने की यह खूबसूरत रीत अब इतिहास बन चुकी है।
देहरादून। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ तथा आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के इन संस्थानों में कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए धार्मिक और मूल्यपरक शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। इसके लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस नए पाठ्यक्रम को तैयार करने के लिए विषयवार विशेषज्ञ समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों में केवल शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि धार्मिक अध्ययन के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और संबंधित क्षेत्रों के दिग्गजों को भी शामिल किया जाएगा। यह समितियां अलग-अलग विषयों और आधुनिक जरूरतों के आधार पर पाठ्यक्रम का एक सटीक मसौदा तैयार कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगी। गौरतलब है कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में कक्षा 8 तक के पाठ्यक्रम को अपग्रेड करने का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। अब 9वीं से 12वीं के लिए यह कवायद शुरू हुई है। हालांकि, सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए कोई निश्चित समयसीमा (डेडलाइन) तो तय नहीं की है, लेकिन विभाग का प्रयास है कि इस आधुनिक और मूल्यपरक शिक्षा मॉडल को जल्द से जल्द पूरा कर लागू कर दिया जाए।
देहरादून। उत्तराखंड में मौसम विभाग द्वारा जारी भारी वर्षा के पूर्वानुमान को देखते हुए शासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने रविवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र का औचक दौरा कर प्रदेशभर की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने मानसून की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी विभागों और जिला प्रशासनों को अगले 24 घंटे पूरी तरह सतर्क रहने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन सचिव ने मौसम के मिजाज, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की स्थिति, बंद सड़कों को खोलने की व्यवस्था, नदियों के बढ़ते जलस्तर और राहत-बचाव संसाधनों की उपलब्धता का बारीकी से आकलन किया। भारी बारिश के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मैदानी इलाकों में जलभराव व अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की आशंका को देखते हुए विशेष एहतियात बरतने को कहा गया है। सचिव सुमन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिला और तहसील स्तर पर बने आपदा नियंत्रण कक्षों को राउंड-द-क्लॉक (24 घंटे) एक्टिव रखा जाए। किसी भी क्षेत्र में मार्ग बंद होने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर राहत एवं बचाव दलों को बिना समय गंवाए तत्काल मौके पर रवाना किया जाए, ताकि जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।
देहरादून। आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। चुनाव अभियान की आगे की रणनीति और पार्टी की दशा-दिशा तय करने के लिए आज (मंगलवार) देश की राजधानी दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा द्वारा बुलाई गई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में राज्य के शीर्ष नेताओं के साथ चुनावी रोडमैप पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी चुनाव अभियान के तहत राज्यभर में होने वाले बड़े कार्यक्रमों और रैलियों की रूपरेखा तय करना है। इसके साथ ही, उत्तराखंड में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने तथा लंबे समय से प्रतीक्षित नई प्रांतीय कार्यकारिणी के गठन समेत कई अहम सांगठनिक मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा होगी। बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश प्रभारी सैलजा ने उत्तराखंड कांग्रेस के 10 सबसे वरिष्ठ चेहरों को दिल्ली तलब किया है। इनमें प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, पूर्व अध्यक्ष करन माहरा और विधायक काजी निजामुद्दीन शामिल हैं। इन सभी नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े विशेष सुझावों और चुनावी रणनीति के खाके के साथ बैठक में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।
रुद्रपुर। दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपी की तलाश में रुद्रपुर पुलिस ने अब अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एसएसपी अजय गणपति के कड़े निर्देशन में पुलिस टीम ने न्यायालय के आदेश पर आरोपी के आवास पर पहुंचकर ढोल-नगाड़ों के साथ मुनादी कराई। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आरोपी ने निर्धारित समय के भीतर कोर्ट या पुलिस के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया, तो उसके मकान व संपत्ति की कुर्की कर दी जाएगी। पुलिस के अनुसार, मामले की विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ कोर्ट से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कराया गया था। इसके बाद पुलिस ने उसके कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन वह हर बार चकमा देकर फरार हो गया। आरोपी के लगातार भागने और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग न करने पर विवेचक ने कोर्ट से कड़े कदम उठाने की गुहार लगाई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 84 के तहत आरोपी के विरुद्ध उद्घोषणा (ढिंढोरा पीटने) के आदेश दिए। इसके अनुपालन में पुलिस टीम ने आरोपी के घर के बाहर नोटिस चस्पा कर आसपास के लोगों को भी आगाह किया कि वे आरोपी को शरण न दें। पुलिस ने साफ किया है कि कानून से भाग रहे आरोपी के पास अब सरेंडर करने का यह आखिरी मौका है।
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