भारत-ओमान में 'मुक्त व्यापार' शुरू: यूपी, उत्तराखंड और गुजरात के निर्यातकों की खुली किस्मत

'Free Trade' Begins Between India and Oman: Fortunes Open Up for Exporters in UP, Uttarakhand, and Gujarat

भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता यानी सीईपीए सोमवार से पूरी तरह लागू हो गया है। इस समझौते ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात समेत देश के 25 राज्यों के निर्यातकों की किस्मत के दरवाजे खोल दिए हैं।

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) सोमवार से लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक समझौते के साथ भारतीय निर्यातकों के लिए खाड़ी क्षेत्र के विशाल बाजार के दरवाजे खुल गए हैं। समझौते के तहत भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को ओमान में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, जबकि ओमान की 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भी शून्य-शुल्क सुविधा लागू होगी। इससे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात समेत देश के 25 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के उद्योगों और निर्यात क्लस्टरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। समझौते के लागू होते ही मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से कृषि उत्पादों, रत्न एवं आभूषणों की 10 खेपें ओमान के लिए रवाना कर दी गईं। इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और भारत में ओमान के राजदूत ईसा सालेह अल शिबानी ने संयुक्त रूप से इस समझौते के लागू होने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह करार केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत, खाड़ी देशों और पूर्वी अफ्रीका के बीच एक मजबूत आर्थिक गलियारे के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगा। सीईपीए के तहत कृषि, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग सामान, फुटवियर और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को पूर्ण शुल्क समाप्ति का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही भारतीय निर्यात निरीक्षण परिषद द्वारा जारी प्रमाणपत्रों को अब ओमानी बंदरगाहों पर सीधे मान्यता मिलेगी, जिससे निर्यात प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज हो जाएगी। उत्तर प्रदेश के कई पारंपरिक और आधुनिक उद्योगों को इस समझौते से विशेष लाभ मिलने वाला है। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, कानपुर और आगरा का फुटवियर उद्योग, भदोही के विश्वप्रसिद्ध कालीन, नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, कन्नौज का इत्र, मलिहाबाद के आम, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बासमती चावल तथा मेरठ की खेल सामग्री अब ओमान के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पहुंच सकेगी। उत्तराखंड के लिए भी यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य से निर्मित औषधियां, जैविक उत्पाद और कृषि आधारित वस्तुओं के निर्यात को नई गति मिलेगी। वहीं हिमाचल प्रदेश के सेब और जम्मू-कश्मीर के पश्मीना, कालीन तथा केसर उत्पादों को भी खाड़ी बाजार में बड़ा अवसर मिलेगा। गुजरात के उद्योग जगत के लिए यह करार किसी वरदान से कम नहीं है। सूरत के हीरे और आभूषण, राजकोट के इंजीनियरिंग उत्पाद, जामनगर के पीतल पुर्जे और रिफाइनरी उत्पाद, मोरबी के सिरेमिक सामान तथा कच्छ के हस्तशिल्प उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि मत्स्य उत्पाद, मांस, अंडे, समुद्री खाद्य पदार्थों और प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री पर शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होगी। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। भारत-ओमान सीईपीए को देश की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह समझौता भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगा।