UKSSSC की मेरिट लिस्ट में 'Explore Gyan' और 'UKUL'! आयोग को देनी पड़ी सफाई! चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल, सोशल मीडिया में वायरल हुई सूची

'Explore Gyan' and 'UKUL' appear in the UKSSSC merit list! The Commission forced to issue a clarification; questions raised regarding the selection process as the list goes viral on social media.

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की वाहन चालक एवं प्रवर्तन चालक भर्ती परीक्षा की औपबंधिक श्रेष्ठता सूची में सामने आए दो नामों "Explore Gyan" और "UKUL" ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर सूची वायरल होने के बाद आयोग को शनिवार को आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। आयोग के अनुसार वाहन चालक एवं प्रवर्तन चालक के 75 पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा के आधार पर 19 जून को जारी की गई औपबंधिक श्रेष्ठता सूची में जिन अभ्यर्थियों के नाम "Explore Gyan" और "UKUL" दिखाई दे रहे हैं, वे वास्तव में उन्हीं नामों से ऑनलाइन आवेदन पत्र में दर्ज किए गए थे। आयोग का कहना है कि आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों ने Candidate's Name वाले कॉलम में यही नाम अंकित किए थे और उसी आधार पर सूची प्रकाशित हुई। हालांकि आयोग का यह स्पष्टीकरण कई नए प्रश्न भी छोड़ गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई अभ्यर्थी अपने नाम के स्थान पर किसी यूट्यूब चैनल, ब्रांड या अन्य शब्दों का इस्तेमाल कर दे, तो क्या आवेदन प्रणाली में उसकी कोई प्रारंभिक जांच नहीं होती? क्या ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करते समय नाम और पहचान संबंधी विवरणों का स्वतः सत्यापन नहीं किया जाता? आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि ऑनलाइन आवेदन पत्र में दर्ज सूचनाओं की जिम्मेदारी स्वयं अभ्यर्थी की होती है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि चयन प्रक्रिया के अगले चरणों में मूल अभिलेखों के सत्यापन के दौरान यदि कोई विसंगति या भ्रामक जानकारी पाई जाती है तो अभ्यर्थिता निरस्त की जा सकती है और भविष्य की परीक्षाओं से भी प्रतिबंधित किया जा सकता है। फिर भी यह मामला केवल दो नामों का नहीं बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। पिछले वर्षों में उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई विवाद और प्रश्न उठते रहे हैं। ऐसे में मेरिट सूची में असामान्य नामों की मौजूदगी ने सोशल मीडिया पर बहस को और तेज कर दिया है। यदि आवेदन के दौरान आधार, हाईस्कूल प्रमाणपत्र या अन्य पहचान दस्तावेजों के अनुरूप नामों का स्वतः मिलान सुनिश्चित किया जाए तो इस प्रकार के विवादों से बचा जा सकता है। वहीं विपक्ष और अभ्यर्थियों का एक वर्ग भी यह सवाल उठा रहा है कि आखिर ऐसी प्रविष्टियां अंतिम सूची तक कैसे पहुंच गईं। फिलहाल आयोग ने सफाई देकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है, लेकिन यह घटना भर्ती प्रक्रिया में डिजिटल सत्यापन व्यवस्था की मजबूती और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर बहस को फिर से हवा दे गई है। सवाल अभी भी खड़ा है कि या यह महज आवेदन भरने में हुई एक असामान्य प्रविष्टि है, या फिर भर्ती प्रक्रिया के सत्यापन तंत्र में मौजूद किसी बड़ी खामी की ओर इशारा?