“डॉक्टर, दलाल और डील! ₹40 लाख का लालच और उत्तराखंड के युवक की किडनी,कानपुर के अवैध ट्रांसप्लांट नेटवर्क का भंडाफोड़
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए किडनी रैकेट ने एक बार फिर अवैध अंग तस्करी के नेटवर्क की भयावह सच्चाई उजागर कर दी है। इस मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनमें करोड़ों रुपये के लेनदेन से लेकर नौकरी के नाम पर लोगों को जाल में फंसाने तक के आरोप शामिल हैं।
यह मामला पहली बार फरवरी 2019 में बर्रा थाना क्षेत्र से सामने आया था, जब बांदा निवासी एक महिला ने आरोप लगाया कि उसे नौकरी दिलाने के बहाने गाजियाबाद ले जाकर उसकी किडनी निकालने की साजिश रची गई। महिला ने पांच नामजद समेत छह लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के बाद पुलिस ने 18 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मामले में ₹10 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन के चलते प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जांच शुरू की थी।
पीड़िता के अनुसार, वह अपने पति के साथ साकेत नगर में रहती थी, जहां एक परिचित युवक ने उसे नौकरी का लालच देकर अपने साथी के साथ गाजियाबाद ले गया। वहां मेडिकल जांच के नाम पर कई टेस्ट कराए गए। इसी दौरान महिला ने आरोपियों को किडनी ट्रांसप्लांट की बातचीत करते सुना, जिससे उसे शक हुआ कि यह संगठित गिरोह अंग तस्करी में शामिल है। विरोध करने पर उसे ₹40 लाख का लालच देकर चुप कराने की कोशिश की गई।
इसी बीच, कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का एक और मामला सामने आया है। यहां एक युवक से लगभग ₹9.5 लाख में किडनी खरीदकर उसे एक जरूरतमंद मरीज को ₹90 लाख से अधिक में बेचने का खुलासा हुआ है। आरोप है कि इस पूरे सौदे में दलालों और कुछ मेडिकल पेशेवरों की मिलीभगत थी।
सूत्रों के अनुसार, उत्तराखंड के एक युवक को पैसों की जरूरत का फायदा उठाते हुए उसे किडनी बेचने के लिए राजी किया गया। किडनी निकालने की प्रक्रिया रावतपुर स्थित एक अस्पताल में कराई गई। इसके बाद उसी अस्पताल में भर्ती एक महिला मरीज के परिजनों को यह किडनी भारी कीमत पर बेच दी गई।
जांच में यह भी सामने आया कि डोनर को तय रकम से कम भुगतान किया गया, जिसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की। इसी शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई तेज की और कई अस्पतालों पर छापेमारी की।
सोमवार रात पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के तीन प्रमुख अस्पतालों—प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल—में छापे मारे। इस दौरान किडनी से संबंधित मरीजों का रिकॉर्ड खंगाला गया और कई संदिग्ध दस्तावेज सामने आए।
कार्रवाई के दौरान दलाल, अस्पताल संचालक और डॉक्टर दंपती समेत करीब 10 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसमें कई बड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों का भी खुलासा किया जाएगा। फिलहाल, पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अवैध अंग प्रत्यारोपण की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।