इतिहास रचने की दहलीज पर धामी: उत्तराखंड के 'युवा' सीएम के 5 साल पूरे, 9 जुलाई को टूटेगा एनडी तिवारी का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

Dhami on the threshold of making history: Uttarakhand's 'young' CM completes 5 years; ND Tiwari's major record to be broken on July 9.

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीतिक सरजमीं पर आज एक नया इतिहास दर्ज हो गया है। सूबे के युवा और कड़े फैसले लेने के लिए मशहूर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज बतौर सीएम अपने सफल 5 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। भाजपा के इतिहास में धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने दो अलग-अलग विधानसभा कार्यकालों को मिलाकर सत्ता के शीर्ष पर लगातार 5 वर्ष का सफर तय किया है। इतना ही नहीं, आगामी 9 जुलाई को सीएम धामी उत्तराखंड के इतिहास में एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित करने जा रहे हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत नारायण दत्त तिवारी (एनडी तिवारी) का रिकॉर्ड तोड़कर राज्य में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले पहले राजनेता बन जाएंगे। भाजपा इस ऐतिहासिक मौके को एक बड़े उत्सव के रूप में मना रही है, जिसके तहत 4 जुलाई से 10 जुलाई तक प्रदेश भर में कई विकास उत्सव और गौरव कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

बता दें कि 4 जुलाई 2021 को जब पहली बार पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड की कमान सौंपी गई थी, तब उन्हें 'नवोदित' और कम अनुभवी माना जा रहा था। लेकिन अपने कड़े फैसलों और सहज स्वभाव से उन्होंने राजनीतिक गलियारों में चल रही नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहटों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। 2022 के विधानसभा चुनाव में भले ही वह अपनी खटीमा सीट हार गए, लेकिन उनके चेहरे पर भाजपा को मिली 47 सीटों की प्रचंड जीत ने हाईकमान के भरोसे को और मजबूत किया। उन्होंने चंपावत उपचुनाव रिकॉर्ड मतों से जीतकर वापसी की और तब से लगातार राज्य को नई दिशा दे रहे हैं। धामी सरकार के इन 5 सालों को केवल लंबी अवधि नहीं, बल्कि 'साहसिक फैसलों का कालखंड' माना जा रहा है। उनके कई फैसलों की गूंज देश भर में सुनाई दी।  राजनीतिक और सामाजिक विरोध के बावजूद, धामी सरकार ने 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लागू कर इतिहास रच दिया। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बना जहां यूसीसी लागू है। देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून: पेपर लीक माफियाओं पर नकेल कसने के लिए फरवरी 2023 में धामी सरकार ने कड़ा कानून बनाया, जिसमें दोषी को उम्रकैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। 1 जुलाई 2026 से राज्य में 'उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम' लागू कर मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया, जिसके तहत अब सभी मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेनी अनिवार्य होगी। जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून को सख्त करते हुए सजा को 10 साल किया गया। वहीं, पहाड़ी जिलों में बाहरी लोगों द्वारा कृषि भूमि खरीद को 250 वर्ग मीटर तक सीमित कर सख्त भू-कानून की दिशा में कदम बढ़ाया। 'लैंड जिहाद' के खिलाफ अभियान चलाते हुए 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और 200 से अधिक भ्रष्ट अफसरों पर गाज गिरी।उत्तराखंड की महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण और 'लखपति दीदी' योजना गेम चेंजर साबित हुई हैं। इसके अलावा, ऋषिकेश और रामनगर में जी20 बैठकों का सफल आयोजन, 3.57 लाख करोड़ के एमओयू के साथ 'ग्लोबल इन्वेस्टर समिट' और 38वें नेशनल गेम्स की मेजबानी ने धामी को एक नेशनल लीडर के तौर पर स्थापित किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उत्तराखंड की सियासत में बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है।